मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी ऊपर से आदेश के इंतजार में अटकी

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21 जून 2022, भोपाल । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी ऊपर से आदेश के इंतजार में अटकी – मध्य प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी नहीं हो रही है, इससे किसान परेशान है। मानसूनी वर्षा प्रारंभ हो गई है और किसान खरीफ की तैयारी में लग गया है। अब किसान असमंजस में है कि खरीफ की बोनी करें या मूंग खरीदी का पंजीयन कराने का पता लगाता फिरे। इधर उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक ऊपर से खरीदी के आदेश नहीं होने के कारण मामला अधर में लटक गया है। ऐसी स्थिति में किसान को दो तरफा नुकसान हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक प्रदेश में आमदनी बढ़ाने की आस में इस बार किसानों ने लगभग 12 लाख हेक्टेयर में मूंग ली है और लगभग 15 लाख टन उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है। जबकि केंद्र सरकार ने इस वर्ष मात्र दो लाख 25 हजार टन मूंग खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से पूरी मूंग का उपार्जन समर्थन मूल्य पर करने के लिए अनुमति मांगी है। यदि यह मिल जाती है तो समर्थन मूल्य पर होने वाली खरीदी का वित्तीय भार राज्य सरकार के ऊपर नहीं आएगा।

प्रदेश में ग्रीष्मकालीन मूंग का क्षेत्र लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश से इस वर्ष 4 लाख 3 हजार मीट्रिक टन मूंग और 27 हजार मीट्रिक टन उड़द के प्रस्तावित उपार्जन से संबंधित प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया था। केन्द्र सरकार ने मूंग के लिए 2 लाख 25 हजार 525 मीट्रिक टन और उड़द के लिए 21 हजार 400 मीट्रिक का उपार्जन लक्ष्य दिया है। जबकि पिछले वर्ष 4 लाख 39 हजार 563 मीट्रिक टन मूंग की खरीदी 301 केन्द्रों से की गई थी। राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार के लक्ष्य से तीन गुना अधिक खरीदी की। कुल एक लाख 85 हजार किसानों से मूंग की खरीद की गई थी। जो गोदाम में भरी है। इस वर्ष बम्पर उत्पादन तथा समर्थन मूल्य 7275 रुपये प्रति क्विंटल होने के कारण किसान सरकार द्वारा किए जाने वाले उपार्जन का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अंतिम निर्णय अभी तक नहीं हो पाया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है, वो उत्पादन की तुलना में काफी कम है। इसलिए भी ऊपर से आदेश नहीं हो पा रहा है।

राज्य में मूंग खरीदी न होने से किसान परेशान है। बारिश शुरू हो गई है, घर में भण्डारण के लिए जगह नहीं है। यदि भण्डारण करते भी हैं तो कीड़े लगने एवं रंग हल्का होने का खतरा है, फिर एफएक्यू मानक में खरी नहीं उतरने पर मंडी में औने-पौने दाम मिलेंगे, जो चिंता का सबसे बड़ा कारण बन गया है। अब ऊपर वाला कौन है, कृषि मंत्री, मुख्यमंत्री या केन्द्र सरकार?

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