मार्च की गर्मी से बढ़ी किसानों की चिंता, फसल उत्पादन में 8–10% गिरावट की संभावना; वैज्ञानिकों ने बताए बचाव के उपाय
12 मार्च 2026, भोपाल: मार्च की गर्मी से बढ़ी किसानों की चिंता, फसल उत्पादन में 8–10% गिरावट की संभावना; वैज्ञानिकों ने बताए बचाव के उपाय – वर्तमान में देखा जा रहा है कि माह मार्च के शुरुआत में ही तापमान 32 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा रहा है जो कि वर्तमान आज सोमवार को 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। जिसका दतिया जिले में बोई गई फसलें सरसों, चना, मटर, मसूर एवं गेहूं पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। जिससे कि विशेषकर देर में बोई गई फसलों के प्रभावित होने की संभावना अत्यधिक है।
अत्यधिक तापमान होने के कारण फसलें निश्चित अवधि से पूर्व पक जाती हैं और फसलों में दाने का भराव भी कम होता है। इन परिस्थितियों में उत्पादन में 8-10 प्रतिशत की गिरावट देखी जा सकती है साथ ही साथ फसल गुणवत्ता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
किसान भाईयों को इस विपरीत प्रभाव से बचने के लिये वैज्ञानिकों द्वारा परामर्श दिये जा रहे हैं जिसमें मुख्य रूप से मिट्टी में नमी बनाये रखने के लिये शाम के समय हल्की सिंचाई करें, ताकि पौधों को गर्मी से राहत मिले एवं मिट्टी ठंडी रहे। पोटाश या पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव करें जिससे फसलें तापीय तनाव का सामना कर सकें।
गेहूं की फसल में 2 प्रतिशत यूरिया का घोल बनाकर छिड़काव करें। दोपहर के समय या तेज हवा के दौरान सिंचाई न करें क्योंकि इससे गेहूं की फसल गिर सकती है। गेहूं की फसल में जिन किसानों ने देर से बोनी की है, दाना भराव की स्थिति आ रही है वह किसान थायो यूरिया 500 ग्रा., 500 ली. पानी में एक हेक्टेयर में छिड़काव करें। जिससे गर्मी से उत्पन्न तनाव की स्थिति से फसलों को बचाया जा सके।
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