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राज्य कृषि समाचार (State News)

MP कैबिनेट का बड़ा फैसला: मूंग खरीदी सीमा 25% से बढ़ाकर 60% हुई, 41 हजार करोड़ के प्रस्ताव मंजूर

03 सितंबर 2026, भोपाल: MP कैबिनेट का बड़ा फैसला: मूंग खरीदी सीमा 25% से बढ़ाकर 60% हुई, 41 हजार करोड़ के प्रस्ताव मंजूर – मध्य प्रदेश के किसानों के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में बड़ा फैसला लिया गया है। मंगलवार को मंत्रालय में हुई बैठक में पंजीकृत किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग की उपज के उपार्जन की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया। इसके साथ ही प्रदेश के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़े करीब 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

60% तक होगी मूंग की खरीदी

मंत्रि-परिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग और उड़द के उपार्जन के लिए 1 जुलाई 2026 से किए गए मुख्यमंत्री के निर्णय का अनुसमर्थन किया। दरअसल, रबी वर्ष 2025-26 यानी विपणन वर्ष 2026-27 में प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन के लिए पहले पंजीकृत किसानों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत तक ही उपार्जन किए जाने का निर्णय लिया गया था। अब इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए पंजीकृत किसानों से उनकी मूंग की उपज का 60 प्रतिशत तक उपार्जन किए जाने का निर्णय लिया गया है। मंगलवार को कैबिनेट ने इसी फैसले का अनुसमर्थन किया। इस फैसले का सीधा लाभ यह होगा कि पंजीकृत किसान अपनी ग्रीष्मकालीन मूंग की पहले के मुकाबले अधिक उपज निर्धारित उपार्जन व्यवस्था के तहत दे सकेंगे।

ग्रामीण रोजगार योजना के लिए 29,619 करोड़ रुपये

कैबिनेट ने ‘विकसित भारत (ग्रामीण): वीबी जी राम जी विकसित भारत जी राम जी योजना मध्यप्रदेश’ के क्रियान्वयन का भी अनुसमर्थन किया। इस योजना को 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील किए जाने का निर्णय लिया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना की अनुमानित लागत 3,183 करोड़ रुपये है, जबकि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना की निरंतरता के लिए कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रुपये होगी। केंद्र और राज्य का अंश 60:40 के अनुपात में रहेगा। इसमें राज्यांश 10,574 करोड़ रुपये होगा।

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पांच वर्षों में प्रशासनिक व्यय के लिए 946 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसे राज्य सरकार वहन करेगी। नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अब 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण बुनियादी ढांचे को तैयार करना है। इसके लिए ग्राम पंचायतें GIS आधारित तकनीक, पीएम गति शक्ति लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हुए ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार करेंगी। योजना में पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और हर छह महीने में सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य किया गया है। प्रत्येक जिले में शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए लोकपाल की नियुक्ति भी की जाएगी।

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दुग्ध उत्पादकों और सांची ब्रांड के लिए 2,973 करोड़

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक किया जाएगा। दुग्ध संकलन को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन और दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन किया जाएगा। वहीं दूध के पैकेट की बिक्री 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को भी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा।

पश्चिम भोपाल बायपास के लिए 3,774 करोड़ रुपये

प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर के निर्माण के लिए 3,774 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। बायपास की लंबाई 35.61 किलोमीटर होगी। इसके निर्माण से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल से नहीं गुजरना पड़ेगा और करीब 21 किलोमीटर की दूरी कम होगी।

मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग को मंजूरी

कैबिनेट ने मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग को 4-लेन मय पेव्ड शोल्डर के साथ हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल पर बनाने के लिए 3,272 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। मार्ग की लंबाई 67.116 किलोमीटर होगी। यह मार्ग क्षेत्रीय, अंतर-राज्यीय और औद्योगिक यातायात के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया है।

RGPV का पुनर्गठन, बनेंगे तीन नए विश्वविद्यालय

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का पुनर्गठन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। भोपाल में मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन में मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय और जबलपुर में महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। वर्तमान में RGPV के अंतर्गत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थाएं और 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। नए विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में प्रदेश के तकनीकी महाविद्यालयों को संभागवार विभाजित किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक

प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में मशीनों और उपकरणों के रखरखाव के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रहेगी। इसके अलावा चिकित्सा संस्थानों की विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओटी समेत अन्य मरम्मत कार्य शामिल हैं।

नए जिलों में पदों के सृजन को मंजूरी

नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालयों के संचालन के लिए 21 पदों की स्वीकृति दी गई है। वहीं निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। इस तरह मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में किसानों के लिए मूंग खरीदी सीमा बढ़ाने से लेकर ग्रामीण रोजगार, डेयरी विकास, सड़क, तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इन फैसलों से जुड़े वित्तीय प्रस्तावों की कुल राशि 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक है।

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