मध्य प्रदेश के किसानों ने रायपुर के आरंग में सीखी मखाना की खेती, बेहतर उत्पादन के गुर सीखे
14 मार्च 2026, भोपाल: मध्य प्रदेश के किसानों ने रायपुर के आरंग में सीखी मखाना की खेती, बेहतर उत्पादन के गुर सीखे – धान के कटोरे के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ में अब एक नई फसल अपनी पहचान बना रही है- सुपर फूड मखाना, जिसे ‘काला हीरा’ भी कहा जाता है। स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर मखाने की खेती अब राज्य में आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ की जा रही है। इसी कड़ी में Madhya Pradesh के किसानों ने रायपुर जिले के Arang क्षेत्र में मखाना की खेती और उसके प्रसंस्करण की तकनीक को नजदीक से समझा।
प्रशिक्षण और भ्रमण कार्यक्रम आयोजित
मखाना उत्पादन पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर जनपद सदस्य Rinku Chandrakar भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan के प्रयासों से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड को केंद्रीय सेक्टर स्कीम में शामिल किया गया है, जिससे किसानों को नई संभावनाएं मिलेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में मखाना का पहला व्यावसायिक उत्पादन लिंग्दिया गांव के किसान स्वर्गीय कृष्ण कुमार चंद्राकर ने शुरू किया था। बाद में 5 दिसंबर 2021 को यहां प्रदेश का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किया गया, जिसके बाद आरंग क्षेत्र मखाना उत्पादन के लिए पहचान बनाने लगा है।
अन्य राज्यों के किसान भी ले रहे प्रशिक्षण
जनपद सदस्य रिंकू चंद्राकर ने कहा कि यह क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि प्रदेश का पहला मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण केंद्र लिंगाडीह में स्थापित हुआ। उन्होंने बताया कि आसपास के गांवों—छटेरा, निसदा और अन्य क्षेत्रों में भी मखाना की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य राज्यों के किसान भी मखाना की खेती सीखने आ रहे हैं, जो प्रदेश के लिए गौरव की बात है।
ओजस फार्म में किसानों ने लिया प्रशिक्षण
मध्य प्रदेश के Umaria district से करीब 50 किसानों का एक दल कृषि विभाग के मार्गदर्शन में आरंग ब्लॉक स्थित ओजस फार्म पहुंचा। यहां किसानों ने मखाना की खेती, उत्पादन तकनीक और प्रसंस्करण के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रीय मखाना महोत्सव 2024 और 2025 में सम्मानित मखाना उत्पादक किसान तथा ओजस फार्म दाऊजी मखाना के प्रबंधक Sanjay Namdev ने बताया कि मखाना की खेती में प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और उत्पादन लगभग 10 क्विंटल तक प्राप्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह फसल लगभग छह महीने में तैयार हो जाती है और इसमें कीट-रोग का खतरा बहुत कम होता है, जिससे किसानों को नुकसान का जोखिम भी कम रहता है।
प्रोसेसिंग से बढ़ता है मुनाफा
ICAR-CIPHET लुधियाना से प्रशिक्षण प्राप्त Shiv Narayan Sahu ने किसानों को मखाना के प्रसंस्करण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 किलो बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम मखाना पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक मिलती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि यदि किसान मखाना का उत्पादन कर स्वयं उसका प्रसंस्करण और पैकेजिंग करते हैं, तो उन्हें प्रति एकड़ अधिक लाभ मिल सकता है।
वैज्ञानिकों ने बताई आधुनिक तकनीक
Indira Gandhi Krishi Vishwavidyalaya के पीएचडी शोधार्थी डॉ. योगेंद्र चंदेल ने किसानों को मखाना की खेती की वैज्ञानिक विधि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती तालाब और खेत दोनों तरीकों से की जा सकती है। अधिक उत्पादन के लिए लगभग 55 दिन की नर्सरी के 4000 पौधों की रोपाई, एक मीटर की दूरी पर पौध से पौध और कतार से कतार के बीच दूरी रखते हुए करनी चाहिए। इसके साथ ही समय-समय पर निराई-गुड़ाई और खाद प्रबंधन करने से बेहतर उत्पादन मिलता है।
किसानों में दिखा उत्साह
भ्रमण दल के प्रभारी और कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मखाना बोर्ड के माध्यम से इस फसल को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है। मध्य प्रदेश से आए किसानों ने बताया कि मखाना की खेती से अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है और वे इसे अपने खेतों में अपनाने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

