रीवा में कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा संपन्न
21 मार्च 2026, रीवा: रीवा में कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा संपन्न – किसान कल्याण वर्ष 2026 के उपलक्ष्य में सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र रीवा में एक वृहद कृषक वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। उप संचालक सह परियोजना संचालक ‘आत्मा’ के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर आधुनिक कृषि तकनीकों और नवीन सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना रहा।
कार्यक्रम के आरम्भ में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अजय कुमार पाण्डेय ने किसानों को समसामयिक कृषि कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से सलाह दी कि सरसों की कटाई के बाद खेत खाली न छोड़ें। अतिरिक्त आय के लिए ग्रीष्मकालीन मूंग और सब्जियों की खेती करें। उचित प्रबंधन से जायद के मौसम में किसान अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। उप संचालक कृषि श्री यू.पी. बागरी ने नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की प्रथा पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने किसानों को इसके दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करते हुए बताया कि नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण में भारी बढ़ोत्तरी होती है और मिट्टी के जरूरी कार्बनिक पदार्थ नष्ट हो जाते हैं। भूमि के लिए लाभकारी सूक्ष्म जीव जलकर मर जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।
सहायक संचालक कृषि डॉ. सुरेश पटेल ने भारत सरकार की डिजिटल पहल ‘एग्रीस्टैक’ और ‘फार्मर रजिस्ट्री’ पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसानों का एकीकृत डेटाबेस बनने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और ऋण व सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों को मिलेगा। साथ ही उर्वरक वितरण को सुगम बनाने के लिए ई-टोकन व्यवस्था की बारीकियों से भी अवगत कराया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में कृषि महाविद्यालय रीवा के अधिष्ठाता डॉ. एस.के. त्रिपाठी एवं संयुक्त संचालक श्री यू.पी. बागरी ने वर्ष 2024-25 में आत्मा योजना के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसानों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर विभिन्न विकासखंडों से आए किसान, कृषि वैज्ञानिक, एटीएम और बीटीएम उपस्थित रहे।
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