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राज्य कृषि समाचार (State News)

कर्नाटक में सूखे का संकट और गहराया, 46,324 करोड़ के नुकसान का अनुमान; केंद्रीय दल ने आज से शुरू किया सर्वेक्षण

04 अक्टूबर 2026, बेंगलुरु: कर्नाटक में सूखे का संकट और गहराया, 46,324 करोड़ के नुकसान का अनुमान; केंद्रीय दल ने आज से शुरू किया सर्वेक्षण – कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। राज्य सरकार ने अब कुल 177 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है और पूरे राज्य में फसल नुकसान का अनुमान बढ़कर 46,324.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी बीच केंद्र सरकार की एक टीम ने आज से राज्य के सूखा प्रभावित जिलों का जमीनी सर्वेक्षण शुरू कर दिया है।

राज्य सरकार के मुताबिक सूखे से करीब 47.09 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा है। इसमें तुअर, मक्का, कपास, गन्ना, सोयाबीन, मूंग, प्याज, सुपारी और लाल मिर्च जैसी फसलें शामिल हैं। राज्य सरकार का कहना है कि मॉनसून खत्म होने तक प्रभावित तालुकों की संख्या 220 तक पहुंच सकती है।

76 नए तालुके जुड़े, मदद की मांग बढ़ी

सूखे की घोषणा दो चरणों में हुई है। पहले चरण में 101 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित करते हुए राज्य ने केंद्र से 3,705.30 करोड़ रुपये की मदद मांगी थी। इसके बाद दूसरे चरण में 76 और तालुके जोड़े गए, जहां फसल नुकसान का अनुमान 27,576.2 करोड़ रुपये आंका गया है। करीब 40 और तालुकों में अभी जमीनी पड़ताल चल रही है।

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उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (एनडीआरएफ) के मानकों के तहत 7,142.64 करोड़ रुपये, इनपुट सब्सिडी के लिए 4,998.60 करोड़ रुपये और चारे व पेयजल व्यवस्था के लिए 2,144.04 करोड़ रुपये की मांग की है। उन्होंने राज्य और केंद्रीय आपदा राहत कोष के मौजूदा मानकों में भी संशोधन की मांग उठाई है।

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उप मुख्यमंत्री परमेश्वर के मुताबिक किसानों को समय पर और उनके वास्तविक नुकसान के अनुपात में ही राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से राहत राशि के आकलन और वितरण में तेजी लाने का भी आग्रह किया है।

केंद्रीय दल का चार दिवसीय दौरा शुरू

राज्य सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार ने एक अंतर-मंत्रालयी टीम गठित की है, जिसमें कृषि, सिंचाई, ग्रामीण विकास, पेयजल, खाद्य वितरण और पशुपालन विभागों के अधिकारी शामिल हैं। यह टीम आज से चार दिन तक कर्नाटक के अलग-अलग जिलों का दौरा करेगी।

टीम को तीन समूहों में बांटा गया है। एक समूह तुमकुरु, चित्रदुर्ग, दावणगेरे और विजयनगर जिलों का दौरा करेगा। दूसरा समूह हासन, मैसूरु और चामराजनगर जिलों में जाएगा, जबकि तीसरा समूह उत्तर कर्नाटक के यादगीर, रायचूर, बागलकोट और कोप्पल जिलों का दौरा करेगा।

टीम खेतों में जाकर फसल नुकसान की सीमा, पेयजल की उपलब्धता और किसानों की दिक्कतों का सीधा आकलन करेगी। इसी तरह की एक आकलन प्रक्रिया पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भी चल रही है, जहां भी बड़े हिस्से को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है।

केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्र सरकार आगे राहत राशि पर फैसला करेगी। राज्य सरकार को उम्मीद है कि टीम का दौरा पूरा होने के बाद राहत राशि जल्द जारी हो सकेगी, जिससे प्रभावित इलाकों में चारे और पेयजल की व्यवस्था में भी मदद मिलेगी।

महाराष्ट्र में भी हालात गंभीर

कर्नाटक की तरह ही पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र में भी सूखे का असर बड़े स्तर पर देखा जा रहा है। राज्य सरकार ने अपने करीब दो-तिहाई हिस्से को सूखा प्रभावित घोषित कर रखा है, जिसके बाद केंद्र सरकार ने वहां भी आकलन के लिए टीम भेजने का फैसला किया है।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही कह चुके हैं कि केंद्र सरकार सूखा प्रभावित दोनों राज्यों के साथ मिलकर काम करेगी और जमीनी हकीकत के आधार पर ही राहत का आकलन किया जाएगा। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल मॉनसून की बारिश में कमी का आंकड़ा कुछ समय पहले 14 प्रतिशत था, जो अब घटकर 12 प्रतिशत पर आ गया है, लेकिन दक्षिण कर्नाटक और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में बारिश की कमी का असर अब भी खेतों पर साफ दिख रहा है।

किसान संगठनों का कहना है कि खरीफ की बोई गई फसल पहले ही बारिश की कमी से प्रभावित हो चुकी है, इसलिए राहत राशि के वितरण में जितनी जल्दी हो सकेगी, उतना ही किसानों को आगे की बुआई और घर खर्च चलाने में मदद मिलेगी। दोनों राज्यों की सरकारें केंद्र से मिलने वाली रिपोर्ट और राहत राशि पर करीब से नजर रखे हुए हैं।

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