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राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़: आयल पाम की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को पौधे, बोरवेल और टपक सिंचाई पर मिलेगा अनुदान

11 अक्टूबर 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़: आयल पाम की खेती को मिलेगा बढ़ावा, किसानों को पौधे, बोरवेल और टपक सिंचाई पर मिलेगा अनुदान – छत्तीसगढ़ में आयल पाम की खेती का विस्तार करने और खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के उद्देश्य से उद्यानिकी विभाग ने योजना की समीक्षा की। तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहायक आयुक्त (ऑयल पाम) कृष्णकांत दुबे ने प्रवास के अंतिम दिन राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक ली। इसमें उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों और राज्य सरकार से अनुबंधित ऑयल पाम प्रसंस्करण कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में खेती का रकबा बढ़ाने, किसानों को अनुदान का लाभ समय पर उपलब्ध कराने, गुणवत्तापूर्ण पौधों की आपूर्ति और उत्पादित उपज की खरीदी व भुगतान से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

अगले साल खेती का लक्ष्य दोगुना करने की तैयारी

समीक्षा बैठक में सहायक आयुक्त कृष्णकांत दुबे ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में ऑयल पाम की खेती के निरीक्षण के दौरान मिले अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि भारत सरकार आगामी वर्षों में ऑयल पाम की खेती का क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। अगले वर्ष इसके लक्ष्य को दोगुना करने की योजना है।

उन्होंने जिला अधिकारियों को अभी से कार्ययोजना तैयार करने और किसानों को ऑयल पाम की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। साथ ही, किसानों तक योजना के लाभ, खेती की तकनीक और अनुदान संबंधी प्रावधानों की जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया।

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उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी संचालक लोकेश कुमार ने कहा कि ऑयल पाम योजना का उद्देश्य केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं है। इसके तहत पौधों का समुचित विकास, उत्पादन में वृद्धि और किसानों को आर्थिक लाभ सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इससे खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने योजना की सफलता के लिए विभागीय अधिकारियों, किसानों और प्रसंस्करण कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय बनाने की आवश्यकता बताई।

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पौधे, बोरवेल और टपक सिंचाई पर मिलेगा अनुदान

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम के तहत किसानों को निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इसके अलावा टपक सिंचाई प्रणाली, बोरवेल, पंपसेट, जल संरक्षण संरचना और वर्मी कम्पोस्ट पिट के लिए भी नियमानुसार अनुदान दिया जाता है। पौधों को चूहों और अन्य कारणों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए वायर मेश पर भी अनुदान का प्रावधान है।

सहायक आयुक्त कृष्णकांत दुबे ने कंपनियों को किसानों तक समय पर उच्च गुणवत्ता वाले पौधे पहुंचाने और पौधरोपण से लेकर रखरखाव तक आवश्यक तकनीकी सहयोग देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को इन सुविधाओं और अनुदान संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी जाए, ताकि वे योजना का लाभ उठा सकें।

किसानों को समय पर मिले अनुदान और उपज का भुगतान

संचालक लोकेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऑयल पाम उत्पादक किसानों को अनुदान का भुगतान समय पर किया जाए। साथ ही, किसानों द्वारा उत्पादित फ्रेश फ्रूट बंच (एफएफबी) की निर्धारित समय पर खरीदी और उसकी राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ऑयल पाम की खेती करने वाले किसानों का विवरण कृषि मैपर पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करने को कहा। इससे राज्य और केंद्र सरकार को योजना की प्रगति की अद्यतन जानकारी मिल सकेगी।

खराब पौधों की जगह दिए जाएंगे नए पौधे

बैठक में वर्चुअल माध्यम से जुड़े जिलों के अधिकारियों और किसानों से भी संवाद किया गया। किसानों ने प्रतिकूल मौसम और प्राकृतिक कारणों से पौधों के खराब होने के साथ सिंचाई के लिए जलस्रोतों की कमी जैसी समस्याएं सामने रखीं। इस पर संबंधित कंपनियों को खराब पौधों के स्थान पर उच्च गुणवत्ता वाले नए पौधे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। किसानों को सिंचाई के लिए जलस्रोत विकसित करने पर उपलब्ध अनुदान संबंधी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारियों ने बताया कि बोरवेल सहित विभिन्न सिंचाई संरचनाओं का सत्यापन अन्य विभागों से कराए जाने के कारण कई बार अनुदान वितरण में देरी होती है। इस पर संचालक लोकेश कुमार ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर सत्यापन और अनुदान से जुड़ी प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।

कंपनियों को नर्सरी विकसित करने के निर्देश

सहायक आयुक्त कृष्णकांत दुबे ने आयल पाम प्रसंस्करण कंपनियों के प्रतिनिधियों से उनकी समस्याएं और सुझाव सुने। उन्होंने कंपनियों को गुणवत्तापूर्ण पौधों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपनी नर्सरी विकसित करने और पौधों के उचित रखरखाव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि नर्सरी स्थापना के लिए भारत सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने का भी प्रावधान है।

बैठक में राजनांदगांव जिले में ऑयल पाम योजना के तहत किए जा रहे कार्यों और प्रगति की सराहना की गई। साथ ही, अन्य जिलों को भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस अवसर पर संयुक्त संचालक उद्यान नीरज शाहा, प्रभारी संयुक्त संचालक सुरेश कुमार ठाकुर सहित विभागीय अधिकारी, विभिन्न जिलों के उद्यानिकी अधिकारी, किसान और ऑयल पाम प्रसंस्करण कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

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