राज्य कृषि समाचार (State News)

ग्वालियर जिले में नरवाई प्रबंधन के लिये जागरूकता अभियान जारी

02 अप्रैल 2026, ग्वालियर: ग्वालियर जिले में नरवाई प्रबंधन के लिये जागरूकता अभियान जारी – जिला प्रशासन द्वारा नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विस्तृत कार्ययोजना लागू की गई है। इसके तहत व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। राजस्व एवं किसान कल्याण व कृषि विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा गाँव-गाँव में किसानों व हार्वेस्टर मालिकों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही नरवाई जलाने पर कानूनी प्रावधानों के तहत दिए जाने वाले दंड की जानकारी भी दी जा रही है।

नरवाई जलाने से घट जाती है खेत की उत्पादक क्षमता – इस क्रम में मंगलवार को हरसी, सिंघारन व भरथरी सहित डबरा व भितरवार क्षेत्र के अन्य ग्रामों में राजस्व अधिकारी खेतों पर पहुंचे और किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया। साथ ही हार्वेस्टर मालिकों को हार्वेस्टर में एसएमएस मशीन लगाने के लिए निर्देशित किया। किसानों को बताया गया कि खेत में ही वे फसल अवशेष अर्थात नरवाई व पराली जलाने के बजाय इसका वैज्ञानिक प्रबंधन करें। नरवाई जलाने से मृदा की उर्वरता पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है। लाभदायक सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, उत्पादकता घट जाती है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण एवं भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए नरवाई नहीं जलाएं।

कंबाइन हार्वेस्टर के साथ एसएमएस लगाना अनिवार्य – जिले में संचालित सभी कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) अथवा स्ट्रा रीपर का उपयोग अनिवार्य किया गया है। हार्वेस्टर मालिकों को स्पष्ट रूप से आगाह किया गया है कि बिना इन उपकरणों के कंबाइन हार्वेस्टर चलाने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जिला एवं तहसील स्तर पर निगरानी दल गठित – नरवाई प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर समिति गठित की गई है, जिसका अध्यक्ष अपर कलेक्टर एवं अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को बनाया गया है। उप संचालक किसान कल्याण एवं कृषि विकास को सदस्य सचिव बनाया गया है। इसके अलावा तहसील स्तर पर निगरानी दल गठित किए गए हैं, जिनमें तहसीलदार, थाना प्रभारी, पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी, पंचायत सचिव एवं रोजगार सहायक शामिल हैं।

15 जून तक चलेगा जन जागरूकता अभियान–  नरवाई प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए गत 1 मार्च से शुरू हुआ यह अभियान 15 जून तक चलेगा। इसके तहत गाँव-गाँव में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रा रीपर, मल्चर एवं बेलर जैसे कृषि यंत्रों के उपयोग के लिये किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषक गण इन उपकरणों का उपयोग कर फसल अवशेष का वैज्ञानिक प्रबंधन कर सकते हैं।

नरवाई से अतिरिक्त आय के अवसर – किसानों को समझाइश दी जा रही है कि नरवाई को जलाने के बजाय मल्चिंग, भूसा निर्माण अथवा पशुओं के चारे के रूप में उपयोग किया जा सकता है। बेलर सहित अन्य मशीनों की सहायता से फसल अवशेष के बंडल बनाकर उद्योगों, एथेनॉल एवं सीबीजी इकाइयों में ईंधन के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है। इसके अलावा हैप्पी सीडर या सुपर सीडर के माध्यम से बिना जुताई सीधे बोनी करने के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

नरवाई जलाने पर लगेगा अर्थदंड–  नरवाई जलाने की घटनाओं की निगरानी जिला प्रशासन द्वारा की जा रही है। नरवाई जलाने पर पर्यावरण संरक्षण के प्रावधानों के अनुसार 2 एकड़ से कम भूमि वाले कृषकों पर 2500 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक भूमि वाले कृषकों पर 5000 रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले कृषकों पर 15000 रुपये प्रति घटना अर्थदंड निर्धारित किया गया है।

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