राज्य कृषि समाचार (State News)

रायपुर की महिला किसान ने परंपरागत खेती छोड़ अपनाया ये तरीका! 1.45 हेक्टेयर में ग्राफ्टेड बैंगन से कमाए 9.6 लाख रुपए

31 मार्च 2026, रायपुर: रायपुर की महिला किसान ने परंपरागत खेती छोड़ अपनाया ये तरीका! 1.45 हेक्टेयर में ग्राफ्टेड बैंगन से कमाए 9.6 लाख रुपए – छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के ग्राम बम्बुरडीह की कृषक श्रीमती अमृत बाई बंजारे ने सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर शानदार सफलता हासिल की है। परंपरागत धान की खेती छोड़कर उन्होंने 1.45 हेक्टेयर भूमि में ग्राफ्टेड बैंगन (किस्म टछत् 212) की उन्नत खेती की, जिससे उन्हें इस वर्ष लगभग 80 टन उत्पादन और 9.6 लाख रुपए की आय प्राप्त हुई। यह आय उनकी पूर्व की पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

श्रीमती बंजारे बताती हैं कि उनकी शैक्षणिक योग्यता केवल 5वीं कक्षा तक है। पहले वह अपनी 2.87 हेक्टेयर भूमि में परंपरागत रूप से धान की खेती किया करती थीं, जिसमें उत्पादन कम और लागत अधिक होने के कारण लाभ सीमित था। इस साल उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीक अपनाते हुए वैज्ञानिक पद्धति से बैंगन की खेती की।

आधुनिक तकनीकों से बढ़ा उत्पादन और बची पानी की बचत

ग्राफ्टेड बैंगन की खेती में ड्रिप सिंचाई प्रणाली, मल्चिंग पेपर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल किया गया। इन तकनीकों से न केवल फसल की गुणवत्ता बेहतर हुई, बल्कि जल की बचत भी हुई। इससे बैंगन का उत्पादन बढ़ा और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिला।

उल्लेखनीय है कि श्रीमती बंजारे को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्राफ्टेड बैंगन उत्पादन हेतु 30,000 रुपये तथा राज्य पोषित योजना के तहत समेकित उद्यानिकी विकास के लिए 54,485 रुपये का अनुदान भी प्रदान किया गया। इस वित्तीय सहयोग ने उन्हें आधुनिक तकनीक अपनाने और खेती में जोखिम कम करने के लिए प्रेरित किया।

परंपरागत खेती से आधुनिक कृषि की ओर

श्रीमती बंजारे की सफलता से यह स्पष्ट होता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद वैज्ञानिक पद्धति और आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। ग्राफ्टेड बैंगन की खेती ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और यह उनके लिए परंपरागत खेती से हटकर लाभकारी विकल्प साबित हुआ। 

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