भारत में सोयाबीन उत्पादन 16% घटा, 2025–26 में फसल 105 लाख टन पर सिमटी
18 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: भारत में सोयाबीन उत्पादन 16% घटा, 2025–26 में फसल 105 लाख टन पर सिमटी – देश के लाखों सोयाबीन किसानों के लिए इस सीजन की तस्वीर अब साफ होती जा रही है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के ताजा अनुमान के अनुसार, तेल वर्ष 2025–26 (अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026) में भारत का सोयाबीन उत्पादन घटकर 105.36 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल की तुलना में करीब 16 प्रतिशत कम है, जब उत्पादन 125.82 लाख टन रहा था।
पैदावार घटी, लेकिन बाजार में हलचल बनी हुई
इस साल खेतों से कम उपज आने की वजह से मंडियों में सोयाबीन की आवक भी सीमित रही है। अक्टूबर से नवंबर 2025 के बीच देशभर में लगभग 33 लाख टन सोयाबीन मंडियों में पहुंचा, जो पिछले साल के बराबर तो है, लेकिन उम्मीद से कम माना जा रहा है। इसके बावजूद सोयाबीन की पेराई (क्रशिंग) में तेजी देखी गई और इसी अवधि में 20.5 लाख टन सोयाबीन की पेराई हुई, जो पिछले साल से अधिक है।
पुराने भंडार भी घटे, किसानों के पास माल कम
पिछले साल से जो सोयाबीन का स्टॉक बचा था, वह भी इस बार कम है। SOPA के अनुसार, पुराने सीजन से सिर्फ 4.66 लाख टन सोयाबीन ही आगे आया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा करीब 9 लाख टन था। 1 दिसंबर 2025 तक मिलों, व्यापारियों और किसानों के पास कुल मिलाकर 76.56 लाख टन सोयाबीन स्टॉक रहने का अनुमान है, जो बीते साल की तुलना में काफी कम है।
ग्रामीण इलाकों में इसका मतलब साफ है—कई किसानों के पास अब बेचने लायक माल सीमित बचा है। ऐसे में भाव को लेकर उम्मीदें तो हैं, लेकिन बाजार की चाल पर सबकी नजर टिकी है।
बीज और आयात का असर
इस सीजन में करीब 12 लाख टन सोयाबीन बीज के लिए रोका गया है, ताकि अगली बोनी प्रभावित न हो। वहीं, देश में लगभग 6 लाख टन सोयाबीन आयात होने का अनुमान है, ताकि उद्योगों की जरूरत पूरी की जा सके।
सोयाबीन खली की मांग मजबूत
जहां दाने की उपलब्धता कम है, वहीं सोयाबीन खली (डी-ऑयल केक) की मांग अच्छी बनी हुई है। अक्टूबर–नवंबर 2025 के दौरान 16.18 लाख टनखली का उत्पादन हुआ। खास बात यह है कि इसी अवधि में 3.34 लाख टन सोयाबीन खली का निर्यात हुआ, जो पिछले साल से ज्यादा है। पोल्ट्री और पशु आहार में खली की मांग बनी हुई है, हालांकि घरेलू खपत में हल्की गिरावट दर्ज की गई है।
किसान क्या समझें?
कुल मिलाकर, इस साल सोयाबीन की फसल कम रही है और स्टॉक भी घटा है। ऐसे में आगे चलकर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। किसानों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी में माल बेचने के बजाय मंडी भाव, निर्यात मांग और पेराई की स्थिति पर नजर रखें। आने वाले महीनों में बाजार किस दिशा में जाएगा, यह काफी हद तक खली के निर्यात और तेल उद्योग की मांग पर निर्भर करेगा।
SOPA ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े सरकारी और व्यापारिक स्रोतों से जुटाए गए अनुमान हैं और सीजन के आगे बढ़ने के साथ इनमें बदलाव संभव है।
सवाल–जवाब | सोयाबीन सीजन 2025–26: किसानों को क्या जानना चाहिए?
प्रश्न 1: इस साल देश में सोयाबीन की पैदावार कितनी रही है?
इस साल (तेल वर्ष 2025–26) भारत में सोयाबीन की पैदावार करीब 105.36 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 16 प्रतिशत कम है।
प्रश्न 2: पिछले साल के मुकाबले फसल क्यों घटी?
कई इलाकों में मौसम की मार, कहीं कम बारिश तो कहीं ज्यादा नमी, और कुछ जगहों पर कीट-रोग का असर देखने को मिला। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा।
प्रश्न 3: मंडियों में इस बार आवक कैसी रही?
अक्टूबर से नवंबर 2025 के बीच करीब 33 लाख टन सोयाबीन मंडियों में पहुंचा। आवक बहुत ज्यादा नहीं रही, क्योंकि कई किसानों के पास माल ही कम था।
प्रश्न 4: पेराई (क्रशिंग) बढ़ने का क्या मतलब है?
इस साल अक्टूबर–नवंबर में 20.5 लाख टन सोयाबीन की पेराई हुई, जो पिछले साल से ज्यादा है। इसका मतलब है कि मिलों की मांग बनी हुई है और उद्योग चल रहा है।
प्रश्न 5: अभी देश में कितना सोयाबीन स्टॉक बचा है?
1 दिसंबर 2025 तक किसानों, व्यापारियों और मिलों के पास मिलाकर करीब 76.56 लाख टन सोयाबीन स्टॉक रहने का अनुमान है। यह पिछले साल से काफी कम है।
प्रश्न 6: क्या कम स्टॉक से भाव बढ़ सकते हैं?
आमतौर पर कम स्टॉक से बाजार में मजबूती आती है, लेकिन भाव पूरी तरह मांग, आयात और खली के निर्यात पर निर्भर करते हैं। इसलिए धीरे-धीरे बाजार को देखना जरूरी है।
प्रश्न 7: बीज के लिए कितना सोयाबीन रोका गया है?
करीब 12 लाख टन सोयाबीन बीज के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि अगली बोनी पर कोई असर न पड़े।
प्रश्न 8: क्या इस साल सोयाबीन का आयात हुआ है?
हां, उद्योग की जरूरत को देखते हुए इस तेल वर्ष में करीब 6 लाख टन सोयाबीन आयात होने का अनुमान है।
प्रश्न 9: सोयाबीन खली की स्थिति कैसी है?
सोयाबीन खली का उत्पादन अक्टूबर–नवंबर में 16.18 लाख टन रहा। खास बात यह है कि खली का 3.34 लाख टन निर्यात हुआ, जो पिछले साल से ज्यादा है।
प्रश्न 10: खली की मांग किसानों के लिए क्यों अहम है?
जब खली का निर्यात और घरेलू मांग अच्छी रहती है, तो मिलें ज्यादा पेराई करती हैं। इससे सोयाबीन दाने की मांग बढ़ती है, जिसका फायदा अंततः किसानों को मिलता है।
प्रश्न 11: इस समय किसान क्या रणनीति अपनाएं?
अगर किसान के पास भंडारण की सुविधा है, तो एक साथ पूरा माल बेचने की बजाय बाजार पर नजर रखते हुए चरणबद्ध बिक्री बेहतर हो सकती है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


