केवीके दिल्ली में किसान प्रशिक्षण आयोजित: किसानों को सरसों फसल की फली अवस्था में सिंचाई, कीट-रोग और उर्वरक प्रबंधन की जानकारी दी गई
10 जनवरी 2026, नई दिल्ली: केवीके दिल्ली में किसान प्रशिक्षण आयोजित: किसानों को सरसों फसल की फली अवस्था में सिंचाई, कीट-रोग और उर्वरक प्रबंधन की जानकारी दी गई – भाकृअनुप के कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), उजवा, दिल्ली द्वारा आज क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन (सीएफएलडी) कार्यक्रम के अंतर्गत सरसों फसल प्रबंधन पर एक दिवसीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को जनवरी और फरवरी माह में सरसों फसल के लिए अपनाई जाने वाली उन्नत कृषि तकनीकों, कीट-रोग प्रबंधन और सिंचाई प्रबंधन की जानकारी देना था।
प्रदर्शन और प्रशिक्षण का उद्देश्य
डॉ. डी.के. राणा, अध्यक्ष, ने बताया कि रबी मौसम के दौरान दिल्ली देहात क्षेत्र में 125 किसानों के प्रक्षेत्र (50 हेक्टेयर) में क्लस्टर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं। इन प्रदर्शनों में किसानों के खेतों में नई सरसों प्रजाति आर.एच.-1424 का प्रदर्शन शामिल है। यह प्रजाति तिलहनी फसलों के उत्पादन में वृद्धि करने और किसानों को नवीनतम तकनीकों से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायक साबित होगी।
सिंचाई और फसल प्रबंधन पर वैज्ञानिक मार्गदर्शन
प्रशिक्षण के दौरान, डॉ. समर पाल सिंह (विशेषज्ञ, सस्य विज्ञान) ने किसानों को फली बनने की अवस्था में दूसरी सिंचाई के महत्व पर बल दिया। इससे दाना भराव बेहतर होगा और उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही, उन्होंने हल्की सिंचाई करने की सलाह दी, यदि पाले की संभावना हो, ताकि फसल सुरक्षित रहे। उन्होंने संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई और फसल की नियमित निगरानी पर भी मार्गदर्शन दिया।
कीट और रोग प्रबंधन
डॉ. बाबू लाल फगोडिया (विशेषज्ञ, पादप संरक्षण) ने किसानों को सरसों फसल में होने वाले प्रमुख कीट जैसे एफिड (माहू), आरा मक्खी, चितकबरा कीड़ा और रोग जैसे आल्टरनेरिया ब्लाइट, मृदुरोमिल तुलासिता, सफेद रतुआ, सफेद चूर्णी रोग और तना गलन की पहचान और समय पर प्रबंधन के उपाय बताए। उन्होंने समन्वित कीट प्रबंधन (IPM) के महत्व पर भी विशेष ध्यान दिया।
किसानों को आधुनिक कृषि से जोड़ा
कार्यक्रम के समापन पर कैलाश (विशेषज्ञ, कृषि प्रसार) ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को अद्यतन वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक कौशल प्रदान करने में मददगार हैं। इससे सरसों फसल की उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ेगी और किसान उत्तम कृषि प्रबंधन पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
किसानों की भागीदारी और फसल अवलोकन
प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और केन्द्र पर प्रदर्शित सरसों फसल का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। इससे उन्हें खेत में तकनीकों को समझने और तुरंत अपनाने का अवसर मिला।
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