फर्जी आंकड़ों पर मिला कृषि कर्मण अवॉर्ड

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पूर्व सरकार एवं अधिकारी जिम्मेदार, जांच होगी

भोपाल। म.प्र. को फर्जी आंकड़ों के आधार पर कृषि कर्मण अवार्ड मिले हैं जबकि धरातल पर हकीकत कुछ और ही है। इसके लिए पूर्व सरकार एवं अधिकारी जिम्मेदार है, मामले के खुलासे के लिए जांच बिठायी जाएगी। यह बात म.प्र. के कृषि मंत्री श्री सचिन यादव ने गत दिनों कही। उन्होंने केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया। प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार को कोसते हुए कहा कि कृषि विकास दर भी फर्जी थी जिसे केवल कागजों में दर्शाया गया था। उन्होंने कृषि कमर्ण अवार्ड की 14 करोड़ रूपये से अधिक धन राशि के उपयोग सम्बंधी सवाल पर चुप्पी साधी और कहा कि कांग्रेस सरकार को खाली खजाना मिलने के कारण योजनाओं के क्रियान्वयन में परेशानी आ रही है। 

श्री यादव ने कहा कि खाली खजाना मिलने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने अब तक प्रथम चरण में 20 लाख किसानों का 7154 करोड़ से अधिक का ऋण माफ किया है तथा दूसरे चरण में 12 लाख से अधिक किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 10 लाख डिफाल्टर किसानों को ऋण माफी योजना में शामिल किया गया है जिनके लिए बैंकों के दरवाजे बंद हो गए थे।

केन्द्र ने नहीं दी राहत राशि

श्री सचिन यादव ने बताया कि प्रदेश में अति-वृष्टि और बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। लगभग 55 लाख किसानों की 60 लाख हेक्टेयर की फसलें खराब हुई। नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से 6621 करोड़ 28 लाख रूपये की सहायता देने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि किसान की सबसे बड़ी ताकत फसल बीमा की राशि होती है। राज्य सरकार ने इस भीषण प्राकृतिक आपदा में खरीफ वर्ष 2019 में फसल बीमा के राज्यांश अग्रिम की राशि 509.60 करोड़ का भुगतान बीमा कंपनियों को कर दिया है, लेकिन पूर्व सरकार ने राज्यांश राशि 2301 करोड़ रूपये का भुगतान अभी तक नहीं किया है। इसलिये केंद्र सरकार इस वर्ष फसल बीमा का हिस्सा नहीं दे रही है। 

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