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ITCMAARS: आईटीसी (ITC Limited) किस तरह एआई आधारित ‘फार्मिंग ऐज़ अ सर्विस’ मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दे रही है

24 फरवरी 2026, नई दिल्ली: ITCMAARS: आईटीसी (ITC Limited) किस तरह एआई आधारित ‘फार्मिंग ऐज़ अ सर्विस’ मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दे रही है – आईटीसी (ITC Limited) अपनी डिजिटल कृषि पहल ITCMAARS को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के माध्यम से अगले चरण में ले जाने की तैयारी कर रही है। कंपनी का कहना है कि छोटे और सीमांत किसानों को हाइपर-पर्सनलाइज़्ड समाधान उपलब्ध कराने के बाद अब वह किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), जैविक किसानों और ग्रामीण समुदायों तक एआई आधारित सेवाओं का विस्तार करेगी।

23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में की गई घोषणा के अनुसार, यह पहल आईटीसी के ‘नेक्स्ट जेन एग्रीकल्चर’ विज़न का हिस्सा है, जिसका नेतृत्व कंपनी के चेयरमैन Sanjiv Puri कर रहे हैं। कंपनी ने कहा कि वह ITCMAARS को एक स्केलेबल डिजिटल एग्री-स्टैक के रूप में विकसित कर रही है, जिसका लक्ष्य आने वाले वर्षों में 1 करोड़ किसानों तक पहुँचना है।

FPO और जैविक खेती के लिए ‘फिजिटल’ मॉडल का विस्तार

2022 में शुरू किया गया ITCMAARS, कंपनी के अनुसार, अब एक पूर्ण ‘फार्मिंग ऐज़ अ सर्विस’ (FaaS) मॉडल में विकसित हो चुका है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म एक सुपर ऐप के माध्यम से किसानों को सेवाएँ देता है, जबकि जमीनी स्तर पर FPOs को एंकर संस्था के रूप में जोड़ा गया है।

आईटीसी ने बताया कि FPOs के लिए एक अलग कस्टमाइज़्ड ऐप भी उपलब्ध है, जिसे अब एआई क्षमताओं के साथ और मजबूत किया जा रहा है ताकि उनकी परिचालन दक्षता बढ़े और वे बड़े पैमाने पर कार्य कर सकें। कंपनी के अनुसार, जनरेटिव एआई और एजेंटिक एआई क्षमताओं को जोड़कर ITCMAARS को एक इंटेलिजेंस-ड्रिवन, कनेक्टेड एग्री-इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

कंपनी ने कहा कि ITCMAARS का कम्युनिटी प्लेटफॉर्म, जहाँ किसान आपस में सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं पर चर्चा करते हैं, उसे एआई आधारित डिजिटल असिस्टेंट और ऑटोमेटेड वर्कफ्लो से सशक्त किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि बड़ी संख्या में किसानों के प्रश्नों का समाधान रियल टाइम के करीब किया जा सके, जबकि कृषि विशेषज्ञों की सलाह को पूरक रूप में बनाए रखा जाए। इसके अलावा, आईटीसी ने जैविक खेती के लिए एक विशेष एआई-सक्षम एडवाइजरी प्लेटफॉर्म शुरू करने की भी योजना जताई है।

प्रभाव के दावे: अधिक उपज, कम लागत, बढ़ी आय

कंपनी के अनुसार, ITCMAARS प्लेटफॉर्म से अब तक 11 राज्यों में 22 लाख से अधिक किसान और 2,100 से अधिक FPOs लाभान्वित हुए हैं। आईटीसी का दावा है कि पायलट अनुमानों के आधार पर एकीकृत पहलों के परिणामस्वरूप उर्वरक उपयोग में 10–15 प्रतिशत तक कमी और फसल उपज में 15–20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी का कहना है कि इससे किसानों की कुल आय में लगभग 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।

आईटीसी ने यह भी कहा कि उसकी यह पहल भारत सरकार के ‘भारत VISTAAR’ जैसे प्रस्तावित बहुभाषी एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य एग्री-स्टैक और वैज्ञानिक अनुसंधान को जोड़कर किसानों को स्थानीय भाषा में हाइपर-लोकल सलाह उपलब्ध कराना है।

एआई टूल्स: कृषिमित्र, क्रॉप कैलेंडर और क्रॉप डॉक्टर

ITCMAARS इकोसिस्टम के केंद्र में ‘कृषि मित्र’ नामक एआई आधारित एग्री-को-पायलट है, जिसे Microsoft के सहयोग से विकसित किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह अपनी तरह का एक अग्रणी समाधान है और फिलहाल 8 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।

आईटीसी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में कृषि मित्र ने लगभग 2 लाख विशिष्ट किसान प्रश्नों का समाधान किया है। यह फसल प्रबंधन, मौसम, बाजार मूल्य, सरकारी योजनाओं और कृषि पद्धतियों से जुड़े सवालों के जवाब देता है, जिससे किसानों को बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलती है।

प्लेटफॉर्म पर एआई आधारित ‘क्रॉप कैलेंडर’ भी उपलब्ध है, जिसे कंपनी 53 फसल किस्मों के लिए वैज्ञानिक फसल चक्र योजना बनाने वाला डायनामिक नज इंजन बताती है। इसके अलावा ‘क्रॉप डॉक्टर’ नामक इमेज एनालिटिक्स टूल 70 फसलों में रोग की रियल टाइम पहचान और उपचार संबंधी सलाह प्रदान करता है। आईटीसी के अनुसार, इस फीचर का लगभग 3 लाख बार उपयोग किया जा चुका है, जिससे किसानों को समय पर सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिली है।

डेटा आधारित खरीद और जलवायु-स्मार्ट कृषि

आईटीसी ने बताया कि उसने ‘अस्त्र’ नामक मशीन लर्निंग आधारित क्रॉप सोर्सिंग मॉडल भी विकसित किया है, जो स्थानिक और समय-आधारित अनुकूलन, बेहतर मूल्य खोज और पूर्वानुमानित बाजार विश्लेषण में सहायता करता है। कंपनी का कहना है कि इससे उसकी खरीद प्रक्रिया अधिक कुशल हुई है और किसानों को बेहतर बाजार पहुँच मिली है।

इसके अतिरिक्त, आईटीसी ने ‘क्लाइमेट एआई’ टूल्स के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों और फसलों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन करने का दावा किया है। कंपनी के अनुसार, इन अध्ययनों के आधार पर माइक्रो-ज़ोन स्तर पर अनुकूलन और शमन योजनाएँ विकसित की जा रही हैं।

आईटीसी का दावा है कि उसका ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ कार्यक्रम 19 राज्यों में 31 लाख एकड़ क्षेत्र को कवर कर चुका है और अब तक 12 लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुँचा चुका है।


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