बागवानी फसलों की बरबादी क्यों ?

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देश में किसानों की बागवानी फसलों के प्रति रुचि वर्ष प्रति वर्ष बढ़ती चली जा रही है इसे एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए। यह किसानों की आय को अगले पांच साल में दुगना करने के ध्येय को पूरा करने में भी सहायक होगी। साथ-साथ यह देशवासियों के स्वास्थ्य के प्रति उनकी जागरुकता को भी दर्शाता है। देश में वर्ष 2016-17 में बागवानी फसलों का कुल क्षेत्र बढ़ कर 251 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया जो वर्ष 2015-16 में 245 लाख हेक्टेयर था। एक ही वर्ष में क्षेत्र में 6 लाख हेक्टर की वृद्धि एक सकारात्मक वृद्धि है जिसका असर आने वाले वर्षों में देखा जायेगा। फलों, वृक्षों का रकबा जो वर्ष 2015-16 में 63.01 लाख हेक्टेयर था वर्ष 2016-17 में बढ़कर 64.57 लाख हेक्टेयर हो गया। इसमें एक ही वर्ष में 2.38 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। इस कारण फलों का उत्पादन जो वर्ष 2015-16 में 901.83 लाख टन था वर्ष 2016-17 में बढ़कर 937.07 लाख टन तक पहुंच गया। एक ही वर्ष में 35.24 लाख टन की फल उत्पादन में वृद्धि कोई साधारण वृद्धि नहीं है। सब्जियों का कुल रकबा जो वर्ष 2015-16 में 101.06 लाख हेक्टर था। वर्ष 2016-17 में बढ़कर 102.95 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। इसमें एक ही वर्ष में 1.76 प्रतिशत क्षेत्र की वृद्धि हुई है। क्षेत्र में वृद्धि का असर सब्जियों के उत्पादन में भी पड़ा है जहां वर्ष 2015-16 में सब्जियों का कुल उत्पादन 1690.64 लाख टन तक पहुंच गया। वर्ष 2016-17 में सब्जियों के उत्पादन में इसके पहले के वर्ष की तुलना में 71.13 लाख टन की उत्पादन में वृद्धि 4.20 प्रतिशत है जो किसानों को आने वाले वर्षों में सब्जी उत्पादन के प्रति आकर्षित करेगी।
फलों व सब्जियों को अधिक समय तक नहीं रखा जा सकता है। देश में इनके भण्डारण के लिए शीत गृहों की संख्या में वृद्धि तो हुई है परन्तु यह पर्याप्त नहीं है। इस कारण किसान को विपणन में कोई बाधा आने के कारण फसल के सही भाव नहीं मिल पाते। कभी-कभी तो ऐसी स्थिति आ जाती है कि किसान को पूरी फसल फेकनी पड़ती है। सरकार को बागवानी फसलों के भण्डारण के लिए उपयुक्त शीत गृहों, भण्डार गृहों को बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ में फलों व सब्जियों के प्रसंस्करण के लिए उनके उत्पादन क्षेत्र अनुसार परिरक्षण इकाईयों का गठन करना आवश्यक हो गया है ताकि किसानों को उनके उत्पादन से अतिरिक्त लाभ प्राप्त हो सके और उत्पादों की बरबादी रोकी जा सके।

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