मिर्च की उन्नत खेती

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संकर मिर्च की खेती – 2

  • डॉ. एस. के. त्यागी
    वैज्ञानिक (उद्यान विज्ञान) कृषि विज्ञान केंद्र,
    खरगोन, मो. : 8770083621

31 अगस्त 2022,  मिर्च की उन्नत खेती  – खेत की तैयारी कैसे करें: रबी फसल की कटाई के बाद अपैल माह में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें। इसके एक माह बाद रोटावेटर या कल्टीवेटर चलाकर खेत को तैयार करें। ढेला रहित और भुरभुरी मिट्टी वाले खेत मिर्च के लिये उत्तम होते हैं। खेत में पानी भरने से मिर्च की फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है अत: अधिक उत्पादन के लिये खेत में जल निकास की व्यवस्था करना आवश्यक होता है। यदि मिर्च में ड्रिप सिंचाई का उपयोग करना हो तो रोपाई के लिए120 सेमी के अंतराल पर 60 सेमी चौड़ी एवं 30 सेमी ऊँची बेड्स तैयार करें।

नर्सरी प्रबंधन

संकर किस्मों के लिए 100 ग्राम बीज प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। मिर्च की पौध 40-50 मेश की कीट अवरोधक नेट के अंदर तैयार करें। मिर्च की पौध तैयार करने के लिए ऐसे स्थान का चुनाव करें जहाँ पर पर्याप्त मात्रा में धूप आती हो तथा बीजों की बुवाई 3&1 मीटर आकार की भूमि से 10 सेमी ऊँची उठी क्यारी में करें। मिर्च की पौधशाला की तैयारी के समय 50 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरडी को 3 किलोग्राम पूर्णतया सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर प्रति 3 वर्ग मीटर क्षेत्र में मिट्टी में मिलाएं। बीज को बुवाई के पूर्व मेटालेक्सिल- एम 31.8 प्रतिशत ईएस 2 मिली प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। इसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड 70 प्रतिशत डब्ल्यूएस ञ्च 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार करें। यदि बीज उत्पादक संस्था द्वारा बीज पूर्व से ही उपपचारित हो तो पुन: बीजोपचार की आवश्यकता नहीं है। अगले दिन क्यारी में 5 सेमी की दूरी पर 0.5-1 सेमी गहरी नालियाँ बनाकर बीज बुवाई करें। नियमित रूप से सुबह एवं शाम के समय हल्की सिंचाई करें। बीज बुआई के 15 दिन बाद इमिडाक्लोप्रीड 17.8 प्रतिशत एसएल 0.25 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें। मिर्च की पौध बुआई के 35 दिन बाद रोपाई के लिए तैयार हो जाती है।

मिर्च की रोपाई कब करें

मिर्च की मुख्य फसल खरीफ में तैयार की जाती है। जिसकी रोपाई जून-जुलाई में की जाती है। शरद ऋतु की फसल की रोपाई सितम्बर-अक्टूबर में की जाती है। रोपाई के 35 दिन पूर्व बीजों की बुआई कर पौध तैयार करें।

रोपाई कैसे करें

नर्सरी में बीज की बुआई के 35 दिन बाद पौधे रोपने लायक हो जाते हैं। संकर किस्मों के लिए कतार से कतार की दूरी 120 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 30 से 40 सेंटीमीटर रखें। रोपाई के पूर्व पौध को इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल 0.3 मिली प्रति लीटर पानी के घोल में 30 मिनट पौध की जड़ों को डुबोने के बाद खेत में रोपाई करें। साथ ही मिर्च के खेत के चारों ओर मक्का या ज्वार की 2-3 कतारें लगायें।

एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन

मिर्च में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करें। सामान्यत: मिर्च की रोपाई के पूर्व 100 क्विंटल गोबर की पूर्णत: पकी हुई खाद एवं 1 क्विंटल नीम खली प्रति एकड़ खेत की अंतिम जुताई के समय मिट्टी में मिलाएं। साथ ही रोपाई के पूर्व बेड्स पर 20 किलोग्राम गोबर की खाद में 2 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा विरडी, 1 किलोग्राम एजोस्पिरिलम और 1 किलोग्राम फॉस्फो बैक्टीरिया प्रति एकड़ मिलायें। यदि मृदा में जिंक की कमी हो तो जिंक सल्फेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ खेत की अंतिम जुताई के समय मृदा में मिलाएँ। इसके अतिरिक्त मिर्च की फसल को 50 किलोग्राम नत्रजन, 32 किलोग्राम फास्फोरस एवं 32 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ की दर से आवश्यकता होती है। इसमें फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा एवं नत्रजन की एक तिहाई मात्रा रोपाई के पूर्व आधार खाद के रूप में दें। शेष नत्रजन की मात्रा को दो बराबर भागों में बांटकर रोपाई के 30 दिन एवं 60 दिन बाद दें। पौध रोपण के 40 दिन बाद से 10 दिनों के अंतराल पर जिंक सल्फेट ञ्च 0.5 प्रतिशत का पर्णीय छिडक़ाव करें एवं रोपण के 60 दिनों के बाद 19:19:19 + रूठ्ठ ञ्च 1 प्रतिशत का छिडक़ाव करें।

फर्टीगेशन तकनीक द्वारा पोषक तत्व प्रबंधन

मिर्च में खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करें। ड्रिप द्वारा उर्वरकों का उपयोग करने की तकनीक को फर्टीगेशन कहते हैं। इस विधि में फर्टीलाइजर टैंक या वेंचुरी के माध्यम से पानी मे घुलनशील उर्वरकों का उपयोग करते हैं। सामान्यत: मिर्च की रोपाई के पूर्व 100 क्विंटल गोबर की पूर्णत: पकी हुई खाद एवं 1 क्विंटल नीम खली प्रति एकड़ खेत की अंतिम जुताई के समय मिट्टी में मिलाएं। साथ ही रोपाई के पूर्व बेड्स पर 20 किलोग्राम गोबर की खाद में 2 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा विरडी, 1 किलोग्राम एजोस्पिरिलम और 1 किलोग्राम फास्फो बैक्टीरिया प्रति एकड़ मिलायें। यदि मृदा में जिंक की कमी हो तो जिंक सल्फेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ खेत की अंतिम जुताई के समय मृदा में मिलाएं। इसके अतिरिक्त मिर्च की फसल को 50 किलोग्राम नत्रजन, 32 किलोग्राम फास्फोरस एवं 32 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़ की दर से आवश्यकता होती है। इसमें फास्फोरस का 75 प्रतिशत मात्रा सिंगल सुपर फास्फेट के माध्यम से पौध की रोपाई के पूर्व खेत में मिला दें एवं नत्रजन, पोटाश की पूरी मात्रा एवं फास्फोरस की शेष मात्रा ड्रिप द्वारा घुलनशील उर्वरकों जैसे 19:19:19, 00:52:34, 13:00:45, 12:61:00, 0:0:50, यूरिया,  अमोनियम सल्फेट एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश के माध्यम से 2 किलोग्राम प्रति एकड़ सप्ताह में दो बार दें। द्वितीयक पोषक तत्व कैल्शियम, मैग्नीशियम एवं सल्फर के लिए कैल्शियम नाइट्रेट एवं मैग्नीशियम सल्फेट 4 किलोग्राम प्रति एकड़ माह में एक बार एवं बोरान 500 ग्राम प्रति एकड़ एवं सूक्ष्म पोषक तत्व 250 ग्राम प्रति एकड़ माह में एक बार ड्रिप के माध्यम से दें। पौध रोपण के 40 दिन बाद से 10 दिनों के अंतराल पर जिंक सल्फेट ञ्च 0.5 प्रतिशत का पर्णीय छिडक़ाव करें एवं रोपण के 60 दिनों के बाद 19:19:19 + रूठ्ठ ञ्च 1 प्रतिशत का छिडक़ाव करें।

मिर्च में खरपतवार प्रबंधन कैसे करें

सामान्यत: मिर्च में पहली निंदाई 20-25 तथा दूसरी निंदाई 35-40 दिन पश्चात करें या डोरा या कोलपा चलायें। हाथ से निंदाई या डोरा/कोलपा को ही प्राथमिकता दें। प्लास्टिक मल्च का उपयोग करने से खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ मृदा नमी का भी संरक्षण होता है।

सिंचाई प्रबंधन

पौध रोपण के तुरंत बाद हल्की सी सिंचाई करें, गर्मी के दिनों में 5 से 7 दिनों के अंतर से तथा शरद ऋतु में 10 से 15 दिन के अंतर से सिंचाई करें। ड्रिप द्वारा सिंचाई मृदा के प्रकार, मृदा में नमी की मात्रा, मौसम एवं फसल की अवस्था के अनुसार प्रतिदिन या एक दिन छोडक़र की जा सकती है।

पौध वृद्धि नियंत्रकों का उपयोग कैसे करें

मिर्च में रोपाई के 25, 45 एवं 65 दिन बाद ट्राईकॉन्टानाल 0.05 प्रतिशत ईसी 100 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानी मे घोलकर छिडक़ाव करें। मिर्च में पुष्प एवं फलों को झडऩे से रोकने एवं पुष्पन एवं फलन की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के लिए नेप्थेलिन एसिटिक एसिड 5 प्रतिशत 10 पीपीएम (10 मिलीग्राम प्रति 10 ली. पानी) में घोलकर छिडक़ाव पुष्पन के समय एवं 20 दिन बाद छिडक़ाव करें।

उपज क्षमता

उच्च तकनीक से खेती करने पर संकर किस्मों से 100-125 क्विंटल हरी मिर्च या 20-25 क्विंटल लाल सूखी मिर्च प्रति एकड़ प्राप्त हो सकती है।

प्लास्टिक पलवार की तकनीक

strawberry

मिर्च फसल की आधुनिक खेती में सिंचाई के लिए ड्रिप पद्धति के साथ-साथ 30 माइक्रोन मोटाई वाली सिल्वर ब्लैक कलर की प्लास्टिक मल्चिंग शीट का प्रयोग किया जाता है। जिससे खरपतवार प्रबंधन के साथ साथ सिंचाई जल की मात्रा में भी कम आती है एवं मिर्च में रस चूसक कीट का प्रकोप कम होता है एवं उपज में 40 से 50 प्रतिशत की वृद्धि पाई गई है।

प्रो- ट्रे में पौध तैयार करने की तकनीक

संकर किस्मों के लिए 100 ग्राम बीज प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। मिर्च की पौध 40-50 मेश की कीट अवरोधक नेट के अंदर तैयार करें। सबसे पहले प्रो ट्रे को कोकोपिट से भर दें। इसके बाद ट्रे के कोश के बीच मे 0.5 सेमी गहरा छिद्र बनाकर एक बीज एक छिद्र में बोयें इसके बाद ट्रे में ऊपर से और कोकोपिट डालकर बीजों को ढंक दें। बीज को बुवाई के पूर्व मेटालेक्सिल- एम 31.8 प्रतिशत ईएस 2 मिली प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। इसके उपरांत इमिडाक्लोप्रिड 70 प्रतिशत डब्ल्यूएस ञ्च 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार करें। यदि बीज उत्पादक संस्था द्वारा बीज पूर्व से ही उपपचारित हो तो पुन: बीजोपचार की आवश्यकता नहीं है। बुआई के पश्चात् ट्रे को 4 दिनों (अंकुरण होने से पूर्व) तक पालीथिन से ढक देते हैं, इससे अंकुरण अधिक एवं जल्दी होता है। 5वें दिन ट्रे से पॉलीथिन शीट को हटाकर ट्रे को नेट हाउस में एक एक करके अलग-अलग रख देते हैं। इसके बाद ट्रे में सिंचाई करें। प्लग- ट्रे में लगी नर्सरी पौध पर पानी इस तरीके से डालें जिससे प्रत्येक सेल्स (पौधे) में हमेशा पर्याप्त नमी बनी रहे। सिंचाई फुहार के माध्यम से सुबह के समय डालें। बुआई के 18 दिन बाद पौध पोषण हेतु पौध की जड़ों में एनपीके (19:19:19) 2 ग्राम/लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें।

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