कभी-कभी ज्वार जहरीली क्यों पशुओं के लिए ?

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कभी-कभी ज्वार जहरीली क्यों पशुओं के लिए ?

कभी-कभी ज्वार जहरीली क्यों पशुओं के लिए – खरीफ की चारा फसल ज्वार बहुत ही न्यूट्रिशियस है और इसमें 8 से 10 प्रतिशत तक क्रूड प्रोटीन पाई जाती है। सिंगल कट वैराइटी में 200 से 300 क्विंटल हरा चारा प्रति हेक्टेयर और मल्टी कट वैराइटी में 600 से 900 क्विंटल हरा चारा प्रति हेक्टेयर प्राप्त किया जा सकता है। मगर एक दुर्गुण भी है इसमें। इसके अंदर एक साइनोजेनिक ग्लूकोसाइड पाया जाता है जिसका नाम है धूरिन। ये धूरिन ही समस्या की जड़ है।

क्या करता है ये धूरिन?

यह धूरिन कुछ नहीं करता मगर यह साइनाइड का बाप है। पशु के रुमेन में मौजूद माइक्रोऑर्गनिजम इस कम्पाउंड का हाइड्रोलिसिस करके पशु के पेट में साइनाइड नामक जहर पैदा करते हैं। और बस कहानी यहीं से एक नया मोड़ लेती है।

यह साइनाइड कोशिकाओं में मौजूद साइटोक्रोम ऑक्सीडेज नामक एंजाइम को काम करने से रोकता है। जिसके कारण हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन रिलीज नहीं हो पाती और पशु का दम घुटने लग जाता है और दम घुटने से मर जाता है। और यह काम इतनी तेजी से होता है कि ना तो पशु कुछ समझ पाता है और ना उसका मालिक। जानवर खुला छूट गया और पहुंच गया ज्वार के खेत में और खाने लगा ज्वार और बस वहीं से अनंत यात्रा पर निकल जाता है।

जब ज्वार इतनी खतरनाक है तो फिर लोग उसे उगाते क्यों हैं?

ज्वार में धूरिन की मात्रा एक दो बारिश होने के बाद घटने लगती है। इसलिए धूरिन तभी तक हानि पहुंचाता है जब तक कि बारिश नहीं हुई हो। बारिश होने पर धूरिन का प्रभाव खत्म हो जाता है और फिर सभी पशुओं को ज्वार खिलाई जा सकती है।

इसलिए सभी किसान भाइयों से अनुरोध है कि-

  • बारिश होने से पहले अपने पशुओं को ज्वार का चारा ना खिलाएं।
  • आपके पास फसल की सिंचाई की व्यवस्था हो तो फसल को एक दो बार सिंचाई के बाद ही काटकर खिलाएं।
  • ज्वार को काटकर खिलाने की सबसे बेहतरीन अवस्था है जब उसमें 50 प्रतिशत फूल आ जाए। इस अवस्था में भी धूरिन की एक्टिविटी कम हो जाती है।
  • इसके अलावा ज्वार को काटकर धूप में सुखाकर हे बनाकर भी खिलाया जा सकता है। इस प्रकार बनाई हुई हे में भी हाइड्रोजन साइनाइड की मात्रा कम हो जाती है।

अगर जानवर ने बारिश से पहले ज्वार खा ली तो फैसला ऑन दा स्पॉट हो जाएगा और फिर आप नाम लगाते घूमोगे पड़ोसियों के कि हमारे जानवर को जहर दे दिया।

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