मशीनों से आसान हुई खेती

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मशीनों से आसान हुई खेती – वर्तमान समय कृषि यंत्रीकरण का युग है। कृषि यंत्रीकरण से समय पर कृषि गतिविधियों को संपादित कर न केवल उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि उत्पादन लागत को भी कम किया जा सकता है।

उन्नत कृषि यंत्रों की आवश्यकता क्यों?

  • कृषि कार्यों की अधिकता।
  • मजदूरों के अभाव में कृषि कार्यों का समय पर पूरा न हो पाना।
  • परम्परागत यंत्रों/पुराने यंत्रों से कृषि कार्य न होना।
  • कृषि कार्यों के समय पर्याप्त संख्या में मजदूरों की उपलब्धता का अभाव।
  • उत्पादन लागत में बढ़ोत्तरी।
  • कृषि कार्य पूर्णरूप से न होने या समय पर न होने पर उत्पादन व उत्पादकता में कमी आती है।

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विभिन्न कृषि कार्यों की प्रवृति के अनुसार कृषि यंत्रों/उपकरणों का वर्गीकरण निम्न अनुसार किया जा सकता है-

  • भूमि की तैयारी के यंत्र।
  • बुवाई व रोपाई के यंत्र।
  • निंदाई व गुड़़ाई के यंत्र।
  • फसल सुरक्षा के यंत्र।
  • फसल कटाई/खुदाई के यंत्र।
  • फसल गहार्ई/मड़ाई के यंत्र।
  • उद्यानिकी कार्यों के लिये यंत्र।

भूमि की तैयारी के यंत्र

ट्रैक्टर चलित कल्टीवेटर- यह द्वितीयक जुताई हेतु प्रयुक्त किये जाना वाला उपकरण है। कल्टीवेटर बीज की बुवाई से पूर्व खेत को तैयार करने में उपयोग किया जाता है। इसकी कार्य क्षमता 04.-05/ हेक्टेयर प्रति घंटा है।

ट्रैक्टर चलित मोल्ड बोर्ड हल- प्रारंभिक जुताई करने एवं गहरी जुताई करने के लिये उपयोग किया जाता है। गहरी जुताई करने के फलस्वरूप मिट्टी के बड़े-बड़े ढेले बन जाते हैं। जो वर्षा होने पर पानी अवशोषित करके मुलायम हो जाते हैं। इस यंत्र की कार्यक्षमता 0.2-0.3 हेक्टेयर प्रति घंटा है।

ट्रैक्टर चलित रोटावेटर- यह द्वितीयक जुताई यंत्र है। यह यंत्र मिट्टी को काटता है, उसे भुरभुरी बनाकर चूर्णित करता है, इसके उपयोग से बीज का जमाव अच्छा होता है, तथा फसल की प्रारंभिक बढ़वार अच्छी होती है। इसकी कार्य क्षमता 0.3 से 0.4 हेक्टेयर प्रति घंटा है।

खूंटीदार मचाई यंत्र- इससे मिट्टी के ढेलों को तोड़कर यंत्रीकृत धान प्रतिरोपण के लिये सामान्य मचाई की जाती है। इसे कैज व्हील के साथ लगाकर प्रचालित करने से उच्च मचाई दक्षता प्राप्त की जा सकती है। इस यंत्र की कार्यक्षमता 0.40 हेक्टेयर प्रति घंटा है।

पावरटिलर- यह यंत्र लघु व मध्यम वर्ग के किसानों के लिये सघन खेती हेतु सर्वाधिक उपयुक्त शक्ति का स्रोत है। इसका इंजन हल्के भार वाला मध्यम/हाई स्पीड वाटर कूल- 15 अश्व शक्ति का होता है। इसके द्वारा एक दिवस (8 घंटे) में लगभग 0.8 से 1 हेक्टेयर जुताई, पडलिंग व निराई-गुड़ाई की जा सकती है।

बुवाई एवं रोपाई यंत्र

डिबलर मशीन- यह हस्त चलित मशीन है, जिसका उपयोग सोयाबीन, चना, गेहूं, अरहर व अन्य फसलों की बुवाई हेतु किया जाता है। इसके उपयोग द्वारा बीज की बचत होती है।

तीन कतारी बीज व उर्वरक बुवाई यंत्र- यह पशु चलित यंत्र है, जिससे गेहूं, चना, सोयाबीन, अरहर, मसूर, सूर्यमुखी, कुसुम आदि के बीज व उर्वरक को एक साथ बोया जा सकता है।

पशु चलित बुवाई यंत्र- यह एक तीन कतारी यंत्र है, जिसमें मूंगफली, मक्का, अरहर, ज्वार, तिलहन व दलहनी फसलों के बीजों को आसानी से बोया जा सकता है। इसकी कार्यक्षमता 0.12 हेक्टेयर प्रति घंटा होती है।

सीड कम फर्टीड्रिल मशीन- यह ट्रैक्टर चलित यंत्र है। इसके द्वारा बुवाई के साथ-साथ उर्वरक डालने का कार्य भी होता है। इस मशीन में बीज व उर्वरक के लिये अलग-अलग बाक्स बनाये जाते हैं। इस मशीन के द्वारा गेहूं, चना, सोयाबीन, अलसी, मक्का, धान व अन्य फसलों की बुवाई आसानी से की जा सकती है।

जीरो टिल सीड कम फर्टीड्रिल मशीन- यह ट्रैक्टर चलित यंत्र है। धान- गेहूं फसल प्रणाली वाले क्षेत्रों में गेहूं बुवाई हेतु अत्यंत उपयोगी यंत्र है। धान फसल की कटाई उपरांत बिना बखरनी किये सीधे गेहूं की बुवाई की जा सकती है, जिससे समय की बचत के साथ-साथ लागत में भी कमी आती है। इस मशीन के उपयोग के मंडूसी, गुल्लीडंडा के पौधे कम उगते हैं, क्योंकि खरपतवार के बीज जुताई न करने से गहराई में पड़े रहते हंै, जिससे उनका जमाव नहीं होता है। इस यंत्र में उपयोग के कारण गेहूं फसल में खरपतवार का प्रकोप भी कम होता है।

कटाई, गहाई व मड़ाई के यंत्र

रीपर- यह अनाज की फसल को काटने के लिये उपयोग में आने वाला यंत्र है। रीपर में कटरवार के साथ एक प्लेटफार्म भी लगा होता है। कटाई के बाद एक तरफ कटी हुई फसल इकट्ठा होती है।

हस्त चलित ओसाई पंखा- इस यंत्र में पंखों की सहायता से हवा का बहाव बनाया जाता है। इसके सामने अनाज और भूसे का मिश्रण उड़ेला जाता है। भूसा होने के कारण दूर गिरता है तथा दाना साफ हो जाता है। इसमें साईकिल की सीट पर आदमी बैठकर पैडल द्वारा पंखा घुमाता है। इस विधि से पंखा चलाने में आसानी रहती है। और थकान कम होती है।

संयुक्त कटाई- गहाई यंत्र (कम्बाईन हार्वेस्टर)- इस यंत्र का उपयोग विकसित देशों में काफी समय से हो रहा है। भारत में भी इसका उपयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। इससे फसल की कटाई व गहाई एक साथ की जाती है। इस मशीन के उपयोग से भूसा प्राप्त नहीं हो पाता है। इस मशीन से कम समय में अधिक क्षेत्रफल की कटाई-गहाई की जा सकती है।

स्ट्रा रीपर – इस यंत्र का उपयोग कम्बाइन हार्वेस्टर से फसल कटाई के उपरांत खेत में पड़े फसल अवशेष से भूसा बनाने के लिये किया जाता है।

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