4 अधिकारी सस्पेंड, 6 को सेवा से बर्खास्तगी का नोटिस मिलेगा

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भोपाल। उद्यानिकी विभाग के इतिहास में पहली बार हुई गंभीरता से जांच में आगर मालवा जिले में हुए सब्सिडी घोटाले की परत-दर परत खुलती जा रही हैं। पॉली हाऊस, नेट हाऊस और ड्रिप इरीगेशन में गंभीर आर्थिक अनियमितता में दोषी पाए जाने पर 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। शेष 6 अधिकारियों को सेवा से पृथक करने का नोटिस देने की तैयारी की जा रही है, जिसकी कार्यवाही जारी है।
ज्ञातव्य है कि आगर मालवा जिले में किसानों के नाम पर नेट हाऊस व पॉली हाऊस की करोड़ों की सब्सिडी कागजों में बांट दी गई, जबकि खेतों पर कुछ भी नहीं मिला। इस मामले में तीन अधिकारी तथा गुजरात की पिंक विजन कंपनी पर केस दर्ज कराया गया है। इसी प्रकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के मुख्य घटक ‘पर ड्राप मोर क्रापÓ में भी वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर 10 अधिकारियों एवं 6 कंपनियों पर एफआईआर दर्ज करायी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक दोनों प्रकरणों में दोषी अधिकारियों के खिलाफ शासन सख्त कार्यवाही कर रहा है। अब तक आगर मालवा के उप संचालक उद्यान श्री आर.सी. पिपल्दे, बड़ौद के उद्यान विकास अधिकारी श्री सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, नलखेड़ा के उद्यान विकास अधिकारी श्री एस.पी. राठौर एवं आगर मालवा के ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी श्री अनोखीलाल चौहान को निलंबित कर दिया गया है।
सूत्रों का कहना है कि शेष बचे ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारियों में श्री विजय चौधरी (सुसनेर), श्री दीपक पाटीदार (आगर मालवा), श्री प्रवीण पाल (बड़ौद), श्री राहुल पाटीदार (नलखेड़ा), श्री अनिल बिरला (सुसनेर) एवं संदीप उपाध्याय (कानड़) के खिलाफ शासन द्वारा सेवा से पृथक करने का नोटिस देने की कार्यवाही की जा रही है। इन प्रकरणों में दोषी पाई गई कंपनियों के खिलाफ भी जांच के आधार पर आगे कार्यवाही की जाएगी।

कैसे फंसे अधिकारी
और कंपनियां
जानकारी के मुताबिक उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों एवं भोपाल, इन्दौर, खरगोन, महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़ की कंपनियों से सांठगांठ कर इस घोटाले को अंजाम दिया गया। भौतिक सत्यापन गलत हुआ, किसान का संतुष्टि पत्र भी फर्जी लगाया, खेत और फसल के हिसाब से सामग्री आधी बांटी गई और किसान के फर्जी नाम से एस्टीमेट और बिल लगाए गए।
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