सोयाबीन को कीड़ों से बचाने की कवायद

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(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। मंत्रि-परिषद् ने गत दिनों राज्य में कुछ क्षेत्र में सोयाबीन फसल पर इल्ली के प्रभाव पर चिंता व्यक्त करते हुए इस पर नियंत्रण की व्यापक कार्ययोजना पर चर्चा की। कृषि विभाग की ओर से केबिनेट में प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा द्वारा प्रस्तुत प्रेजेन्टेशन में बताया गया कि सोयाबीन क्षेत्र का महज 2 प्रतिशत हिस्सा इल्ली से प्रभावित है। इसके बावजूद राज्य शासन ने युद्ध-स्तर पर किसानों की मदद के लिए कार्य करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कृषि विभाग को सोयाबीन में रोग पर नियंत्रण के
लिए सक्रिय और सजग रहने के निर्देश दिए। केबिनेट में कृषि विभाग ने जानकारी दी कि सोयाबीन की फसलों में रोग और कीट प्रकोप हरी इल्ली-लिपलिपी, इल्ली-काली, इल्ली-तम्बाकू, इल्ली-सफेद मक्खी, पीला मोजेक वायरस के रूप में देखने को मिला है। राज्य में 58 लाख 7 हजार हेक्टेयर सोयाबीन क्षेत्र में से मात्र एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कीट प्रकोप का ज्यादा प्रभाव दिखा है।
वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा सोयाबीन अनुसंधान केन्द्र इन्दौर के वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ शर्मा, सीहोर कृषि महाविद्यालय के डॉ. श्रीमती खाण्डवे एवं डॉ. डी.आर. सक्सेना तथा ज.ने.कृ.वि.वि. जबलपुर के डॉ. एस.वी. दास से कीट नियंत्रण पर चर्चा हुई।
राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम और निरीक्षण दल
सोयाबीन फसल पर कीट प्रकोप से संबंधित 24 घंटे मार्गदर्शन देने के लिए राज्य कंट्रोल रूम कार्य करेगा। रूम का दूरभाष क्रमांक 2558823 रहेगा। 51 जिले में क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्र के साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम भ्रमण कर रिपोर्ट देगी। ऐसे विकासखंडों, जहाँ सोयाबीन में बीमारी है, उसके लिये पृथक टीम गठित की जाएगी। जिलों में नियंत्रण कक्ष सुबह 8 से शाम 8 बजे तक कार्य करेंगे।
पौध संरक्षण दवा
राष्ट्रीय तिलहन मिशन तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना में पौध संरक्षण दवा घटक के लक्ष्य के अनुसार किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान या प्रति हेक्टेयर 500 रुपए (अधिकतम दो हेक्टेयर के लिए) पर मिलेगी। इसके लिये 1.57 करोड़ की राशि मंजूर की गई है।
एसएमएस सलाह और सोशल मीडिया का उपयोग
जानकारी के मुताबिक कृषि विभाग द्वारा लगभग 40 लाख किसानों को सोयाबीन की विभिन्न बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण की सलाह एक महीने तक भेजी जाएगी। कृषि विभाग मैदानी अमले से वीडियो कान्फ्रेन्सिंग से चर्चा करेगा। इसमें जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर और राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे। फसल पर रोग के नियंत्रण के उपायों में सोशल मीडिया का उपयोग भी प्रारंभ किया जा रहा है। इसके अलावा फेस बुक, ट्वीटर, वाट्सएप, यू-ट्यूब के माध्यम से किसानों को आवश्यक सलाह देने की शुरूआत की गई है। कृषि विभाग ने राज्य के नक्शे पर बीमारी और कीट प्रकोप प्रभावित क्षेत्र का चिन्हांकन किया है।
कीट बीमारी के नियंत्रण के लिए क्षेत्रीय बोलियों में पेम्पलेट के वितरण का कार्य इसी हफ्ते किया जाएगा।

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