भोपाल में एपीडा का रीजनल सेंटर खोलने का आग्रह

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भोपाल। प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि डा. राजेश राजौरा ने जैविक उत्पादों के विपणन एवं प्रबंधन को गति देने के लिए एपीडा के महाप्रबंधक से भोपाल में रीजनल सेंटर खोलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सेंटर के खुलने से प्रदेश के जैविक उत्पादों का विपणन आसानी से होगा तथा जैविक खेती के प्रति किसान आकर्षित होंगे। प्रमुख सचिव प्रदेश में जैविक उत्पादों के विपणन एवं प्रबंधन विषय पर जानकारी देने के लिये एपीडा एवं म.प्र. कृषि विभाग द्वारा आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे। कार्यशाला में संचालक कृषि श्री मोहनलाल, बीज प्रमाणीकरण एवं जैविक प्रमाणीकरण के एम.डी.    श्री के.एस. टेकाम, संयुक्त संचालक श्री के.पी. अहिरवार सहित बड़ी संख्या में कृषि अधिकारियों एवं किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव कृषि डॉ. राजौरा ने कहा कि एपीडा ने प्रदेश में कार्यशाला कर सराहनीय कार्य किया है हमें एपीडा की जरूरत है।
एपीडा के महाप्रबंधक डॉ. तरूण बजाज ने कहा कि एपीडा 2001 से जैविक उत्पादों का निर्यात कर रहा है यह लगभग 200 करोड़ का होता है। इसके और अधिक बढऩे की संभावना है। उन्होंने कहा कि म.प्र. जैविक उत्पाद में आगे है। निर्यात होने वाले कुल जैविक उत्पादों में म.प्र. की भागीदारी 50 फीसदी से अधिक है।
इसके पूर्व एपीडा के उपमहाप्रबंधक डॉ. सी.बी. सिंह ने एपीडा की गतिविधियों तथा उसके इतिहास पर प्रकाश डाला।
एपीडा के सलाहकार डा. ए.के. यादव ने कहा कि कपास एवं सोयाबीन के निर्यात में म.प्र. का स्थान अव्वल है। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों के निर्यात में प्रदेश और आगे जा सकता है। इसके लिए जैविक बीज की जरूरत है।
जैविक प्रमाणीकरण संस्था के एमडी श्री टेकाम ने जैविक बीज का टैग होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि तीन साल तक जैविक उत्पादन लेने के बाद जैविक प्रमाण पत्र दिया जाता है।
कार्यशाला में आभार प्रदर्शन करते हुए संचालक कृषि ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाने तथा पांच वर्षों में किसानों की आय दोगुना करने में इस तरह की कार्यशालाएं उपयोगी साबित होगी। कार्यक्रम का संचालन श्री एस.व्ही. श्रीवास्तव ने किया।

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