ग्राम–2026 के साथ राजस्थान की कृषि को मिल रहा व्यापक आयाम, तकनीक और नीतियों से खुल रहे अवसर
26 मार्च 2026, जयपुर: ग्राम–2026 के साथ राजस्थान की कृषि को मिल रहा व्यापक आयाम, तकनीक और नीतियों से खुल रहे अवसर – राजस्थान पारंपरिक रूप से एक कृषि प्रधान राज्य रहा है, लेकिन भौगोलिक विषमताओं, सीमित जल संसाधनों और सूखे जैसी चुनौतियों के कारण कृषि क्षेत्र में लंबे समय तक जोखिम और अनिश्चितता रहती है। वर्षा पर निर्भर खेती, कम उत्पादकता और सीमित तकनीकी हस्तक्षेप के चलते किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। हालांकि, हाल के वर्षों में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और किसान-केंद्रित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से इस परिदृश्य में उल्लेखनीय बदलाव आया है। आज राजस्थान कृषि नवाचार, उत्पादकता वृद्धि और निवेश के क्षेत्र में तेजी से उभरते हुए राज्यों में शामिल हो रहा है।
किसानों के आर्थिक सशक्तीकरण की नई दिशा—
कृषि क्षेत्र में बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी किसानों की आय और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना रहा है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने केंद्र की योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए अतिरिक्त सहायता प्रदान की है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को मिलने वाली राशि में राज्य स्तर पर अतिरिक्त सहयोग जोड़कर कुल सहायता को बढ़ाया गया है, जिससे लाखों किसानों को प्रतिवर्ष अधिक आर्थिक संबल मिल रहा है।
इसके साथ ही, बड़ी संख्या में किसानों को हजारों करोड़ रुपये के फसली ऋण और ब्याज अनुदान उपलब्ध कराए गए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 6565 करोड़ रुपये तक के बीमा क्लेम वितरित किए गए, जिससे प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को राहत मिली और उनकी जोखिम वहन क्षमता में वृद्धि हुई।
जल प्रबंधन और सिंचाई में संरचनात्मक सुधार—
राजस्थान जैसे जल-संकटग्रस्त राज्य में सिंचाई और जल संरक्षण को प्राथमिकता देना एक रणनीतिक निर्णय रहा है। राज्य में 43 हज़ार 844 फार्म पॉण्ड का निर्माण कर वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया गया है, वहीं 2.23 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ड्रिप एवं मिनी स्प्रिंकलर प्रणाली स्थापित की गई है।
इसके अतिरिक्त, 35 हज़ार 368 से अधिक फार्म पौंड और 302.95 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया इसके अलावा 32 हज़ार 918 किलोमीटर की सिंचाई पाइपलाइन बिछाकर खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है। साथ ही, 37010 किलोमीटर क्षेत्र में तारबंदी कार्य कर फसलों को सुरक्षा प्रदान की गई है। इन प्रयासों ने जल उपयोग दक्षता में सुधार किया है और खेती को अधिक स्थिर और उत्पादक बनाया है।
यंत्रीकरण और तकनीकी हस्तक्षेप से बढ़ी उत्पादकता—
राज्य सरकार ने कृषि को आधुनिक बनाने के लिए यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया है। 1 लाख 10 हज़ार पचास कृषि यंत्रों पर लगभग 283 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया, जिससे किसानों की लागत में कमी आई और उत्पादकता बढ़ी।
तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य “ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम–2026)” जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच का आयोजन कर रहा है। यह आयोजन कृषि क्षेत्र में निवेश, आधुनिक तकनीकों और वैश्विक सहयोग को जोड़ने का कार्य करेगा, जिसमें 75,000 से अधिक किसानों और 250 से अधिक कंपनियों की भागीदारी प्रस्तावित है।
मृदा स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण इनपुट पर जोर—
मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए 18 लाख से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए हैं, जिससे उन्हें अपनी भूमि के पोषक तत्वों की सटीक जानकारी मिल रही है। इसके साथ ही, 66 लाख से अधिक किसानों को उन्नत बीज मिनीकिट वितरित किए गए।
खेती में गुणवत्ता सुधार के लिए वर्मी कम्पोस्ट को बढ़ावा दिया गया है। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 59 हज़ार 788 वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों की स्थापना भी की गई है, जिससे टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित हो रही है।
प्रशिक्षण और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से बदलाव—
कृषि क्षेत्र में ज्ञान और कौशल विकास को भी प्राथमिकता दी गई है। 8.82 लाख से अधिक किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे नई तकनीकों को अपनाने में सक्षम हुए हैं।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। 80 हजार से अधिक छात्राओं को 10+2 कृषि, स्नातक एवं स्नातकोत्तर कृषि तथा पीएचडी में अध्ययन हेतु क्रमशः 15,000, 25,000 तथा 40,000 रुपए प्रति छात्रा प्रतिवर्ष के अनुसार 144.84 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई है। इससे कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है और समावेशी विकास को बल मिला है।
उद्यानिकी क्षेत्र में विविधीकरण और मूल्य संवर्धन—
उद्यानिकी क्षेत्र ने किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य में 65,412 सोलर पंप सेट स्थापित कर किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया गया है, जिस पर 921 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया।
इसके अलावा, 2.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन प्रणाली स्थापित की गई है, जबकि 38.99 वर्गमीटर में ग्रीन हाउस और 10.13 वर्गमीटर से अधिक शेडनेट हाउस जैसी संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए क्रमशः 172.77 करोड़ रुपए तथा 38.80 करोड़ रुपए का अनुदान दिया गया है। फल बागवानी के अंतर्गत हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में नए बाग स्थापित किए गए, जिससे किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर प्रोत्साहन मिला है।
वैश्विक निवेश और साझेदारी की ओर बढ़ता कदम
राजस्थान अब कृषि को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखकर उसे निवेश, व्यापार और तकनीकी नवाचार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ‘ग्राम–2026’ के माध्यम से राज्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कृषि क्षमता को प्रस्तुत कर रहा है, जिसमें विभिन्न देशों और निवेशकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।
इन सभी पहलों ने राजस्थान के कृषि परिदृश्य को एक नई दिशा दी है। पारंपरिक चुनौतियों से जूझते हुए राज्य ने आधुनिक तकनीक, प्रभावी नीतियों और निवेश के माध्यम से कृषि को अधिक सशक्त, टिकाऊ और लाभकारी बनाया है। किसानों की आय बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और नवाचार को बढ़ावा देने के इन प्रयासों से राजस्थान कृषि विकास के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।
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