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राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़ में गन्ने का भाव अब ₹425 प्रति क्विंटल, तेल ताड़ किसानों को मुफ्त पौध भी

22 अक्टूबर 2026, रायपु: छत्तीसगढ़ में गन्ने का भाव अब ₹425 प्रति क्विंटल, तेल ताड़ किसानों को मुफ्त पौध भी – छत्तीसगढ़ के गन्ना किसानों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ी राहत दी है। राज्य की सहकारी चीनी मिलें अब किसानों से गन्ना ₹355 के बजाय ₹425 प्रति क्विंटल की दर से खरीदेंगी। खास बात यह है कि संशोधित दर सिर्फ आने वाले पेराई सत्र पर ही नहीं, बल्कि 2025-26 के पेराई सत्र में खरीदे गए गन्ने पर भी लागू होगी, जिससे किसानों को बकाया राशि का फायदा मिलेगा।

यह फैसला भारतीय किसान संघ, छत्तीसगढ़ के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में लिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले का मकसद किसानों को उनकी उपज का सही और बेहतर दाम दिलाना है, ताकि खेती किसानों के लिए सम्मानजनक और लाभकारी आजीविका बन सके। किसान संघ के प्रतिनिधियों ने बैठक में गन्ने के वाजिब दाम के साथ-साथ समय पर भुगतान और पेराई सत्र शुरू होने में देरी न होने की भी मांग रखी थी, जिसके बाद सरकार ने मूल्य वृद्धि का ऐलान किया।

चार सहकारी चीनी मिलों पर असर

राज्य में चार सहकारी चीनी मिलें काम करती हैं और कबीरधाम (कवर्धा), सूरजपुर व बालोद जिले गन्ने की प्रमुख पैदावार वाले क्षेत्र माने जाते हैं। राज्य में गन्ने की खेती लगभग 31 हजार से 35 हजार हेक्टेयर में होती है और औसत उपज 56 से 60 टन प्रति हेक्टेयर के बीच रहती है। इस सीजन गन्ने का कुल उत्पादन करीब 18.66 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 20.41 लाख टन से थोड़ा कम है। शेयरधारक किसानों को इसके अलावा 50 किलो की चीनी बोरी भी ₹30 प्रति किलो की रियायती दर पर मिलती रहेगी।

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तेल ताड़ किसानों के लिए मुफ्त पौध और अन्य सुविधाएं

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम के तहत पात्र किसानों को कई रियायतें देने का भी फैसला किया है। इसमें मुफ्त ताड़ के तेल के पौधे, ड्रिप सिंचाई प्रणाली, बोरवेल और पंपसेट, जल संरक्षण संरचनाएं, वर्मीकम्पोस्ट गड्ढे तथा पौधों की सुरक्षा के लिए तार की जाली जैसी सुविधाएं शामिल हैं। प्रसंस्करण कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे समय पर खरीद और भुगतान सुनिश्चित करें, क्षतिग्रस्त पौधों को बदलें और नई नर्सरी स्थापित करें। किसानों से कृषि मैपर पोर्टल पर पंजीकरण कराने को भी कहा गया है। सरकार अगले साल पाम तेल की खेती का विस्तार लक्ष्य दोगुना करने की योजना बना रही है।

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गन्ना किसानों के लिए यह मूल्य वृद्धि ऐसे समय आई है जब कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसान भी वाजिब दाम और गन्ना तौल में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर केंद्र सरकार के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं। छत्तीसगढ़ का यह फैसला राज्य के गन्ना बेल्ट में किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ सहकारी चीनी मिलों की पेराई क्षमता बनाए रखने की दिशा में भी देखा जा रहा है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में गन्ने का रकबा पिछले कुछ वर्षों में बहुत ज्यादा नहीं बढ़ा है, और उत्पादन में मामूली गिरावट की एक वजह मौसम की अनिश्चितता भी रही है। ऐसे में खरीद मूल्य में यह बढ़ोतरी किसानों को गन्ने की खेती में बने रहने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है। तेल ताड़ मिशन के तहत मिलने वाली रियायतें भी उन किसानों के लिए खासतौर पर अहम हैं जो परंपरागत फसलों के साथ-साथ बागवानी की ओर रुख करना चाहते हैं, क्योंकि ड्रिप सिंचाई और जल संरक्षण ढांचे पर आने वाली शुरुआती लागत आम तौर पर छोटे किसानों के लिए एक बड़ी बाधा रही है।

राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि चीनी मिलों को गन्ना खरीद और भुगतान में देरी की स्थिति में जवाबदेह बनाया जाएगा, ताकि किसानों को समय पर पैसा मिल सके। कृषि मैपर पोर्टल पर पंजीकरण को अनिवार्य बनाने के पीछे मकसद यह भी है कि तेल ताड़ और गन्ने दोनों फसलों के रकबे का सटीक डेटा सरकार के पास रहे, जिससे भविष्य में योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर तरीके से हो सके। किसान संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, हालांकि उनका कहना है कि भुगतान में देरी न हो, इस पर भी सरकार को लगातार नजर रखनी होगी।

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