4000 स्क्वायर फीट से शुरू की पॉलीहाउस फार्मिंग, बदल गई किस्मत; आज प्रतिदिन हो रही 6–7 हजार की कमाई
25 मार्च 2026, भोपाल: 4000 स्क्वायर फीट से शुरू की पॉलीहाउस फार्मिंग, बदल गई किस्मत; आज प्रतिदिन हो रही 6–7 हजार की कमाई – मध्यप्रदेश के भोपाल जिले के फन्दा क्षेत्र के ग्राम पंचायत लांबाखेड़ा के किसान किशन मौर्य ने आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदलने की प्रेरक मिसाल प्रस्तुत की है।
पारंपरिक खेती से सीमित आय अर्जित करने वाले श्री मौर्य आज पॉलीहाउस और वैज्ञानिक खेती के माध्यम से प्रतिदिन हजारों रुपये की आय प्राप्त कर रहे हैं। श्री मौर्य ने उद्यानिकी विभाग की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना का लाभ लेते हुए लगभग 4 हजार वर्गमीटर पॉलीहाउस में आधुनिक तकनीक से खेती प्रारंभ की।
आधुनिक तकनीक से उच्च मूल्य फसल उत्पादन
उन्होंने ब्रोकोली, लाल गोभी, चीनी गोभी, रोमिन सलाद, लोलो रोसो, लेट्यूस, तुलसी, अजमोद, रॉकेट, रोसमेरी, थाइम तथा चेरी टमाटर सहित विभिन्न उच्च मूल्य वाली फसलों के लगभग 25 हजार पौधों का रोपण किया। इस खेती में उन्होंने ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाई, जिस पर उन्हें शासन से 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ प्राप्त हुआ। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति से की जा रही इस खेती में तीन माह के भीतर फसल तैयार हो जाती है।
रोजाना कमा रहे 6-7 हजार रुपए
श्री मौर्य प्रतिदिन लगभग 2500 से 3000 फूल एवं सब्जियों का उत्पादन कर भोपाल सहित अन्य राज्यों के बाजारों में आपूर्ति कर रहे हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 6 से 7 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही उन्होंने एक एकड़ भूमि में गुलाब, जरबेरा और गेंदा के लगभग 30 हजार पौधों का रोपण भी किया है। उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के लिए उन्होंने अपने पॉलीहाउस में सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम स्थापित किया है, जिसकी लागत लगभग 4 लाख रुपये है। इस पर उन्हें 2 लाख रुपये की सब्सिडी शासन से प्राप्त हुई। इस ऑटोमेशन सिस्टम के माध्यम से पानी, खाद और दवाइयों की संतुलित मात्रा 24×7 स्वतः नियंत्रित प्रणाली से पौधों तक पहुंचाई जा रही है, जिससे समय और लागत दोनों की बचत हो रही है।
बने अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
श्री मौर्य के पॉलीहाउस में उत्पादित गुलाब और जरबेरा के फूलों की आपूर्ति भोपाल के साथ-साथ लखनऊ, दिल्ली और जयपुर तक की जा रही है। आधुनिक तकनीक अपनाकर वे पारंपरिक खेती से आधुनिक बागवानी की ओर अग्रसर होने वाले भोपाल जिले के अग्रणी किसानों में शामिल हो गए हैं।
श्री मौर्य इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं को देते हैं। वे कहते हैं कि “सरकार की योजनाओं और विभागीय मार्गदर्शन से हमें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है और समाज में एक नई पहचान भी मिली है।” श्री किशन मौर्य की यह सफलता कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। यह सिद्ध करती है कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक पद्धति और शासकीय योजनाओं के सहयोग से खेती को एक लाभकारी और समृद्ध व्यवसाय में बदला जा सकता है।
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