गुना में बीजीय मसालों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, किसानों को निर्यात एवं बाजार उन्मुख खेती की मिली जानकारी
21 मार्च 2026, गुना: गुना में बीजीय मसालों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी, किसानों को निर्यात एवं बाजार उन्मुख खेती की मिली जानकारी – स्पाइसेस बोर्ड, भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय गुना (मध्य प्रदेश) द्वारा स्थानीय प्ले होटल में “बीजिया मसालों पर राष्ट्रीय स्तरीय संगोष्ठी एवं विपणन संपर्क कार्यक्रम” का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, निर्यातक एवं एफपीओ प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से 25 एफपीओ (FPO) के प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुना जिले के कलेक्टर किशोर कन्याल रहे, जिन्होंने अपने संबोधन में किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन एवं बाजार उन्मुख खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मसाला फसलों में अपार निर्यात संभावनाएं हैं, जिनका लाभ किसान संगठित प्रयासों से उठा सकते हैं।
स्पाइसेस बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी डॉ. भारत गुडदे (वैज्ञानिक ‘सी’) ने बीजीय मसालों के गुणवत्ता मानकों, प्रमाणन (Certification) एवं निर्यात प्रक्रियाओं पर विस्तार से जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र आरोन के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र ने उन्नत कृषि तकनीकों एवं उत्पादन वृद्धि के उपायों पर प्रकाश डाला।
डीडीएच उद्यानिकी (DDH Horticulture) श्री के.पी. किरार ने धनिया (Coriander) के बीज चयन, उत्पादन तकनीक एवं जैविक खेती पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के उपयोग, संतुलित पोषण प्रबंधन एवं जैविक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
आशीष जायसवाल (सहायक निदेशक, स्पाइसेस बोर्ड, गुना) ने अपने व्याख्यान में किसानों को मसालों के विपणन, वैल्यू एडिशन एवं बाजार से सीधा जुड़ाव पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि कैसे किसान समूह (FPO) बनाकर बेहतर दाम प्राप्त कर सकते हैं तथा गुणवत्ता आधारित उत्पादन से निर्यात बाजार में मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। कार्यक्रम में प्रमुख निर्यातक पी.सी. के. महेश्वरनन (धनिया निर्यातक) ने धनिया (Coriander) के निर्यात पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय धनिया की अच्छी मांग है, लेकिन गुणवत्ता, ग्रेडिंग, सफाई एवं अवशेष (Residue) मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान एफपीओ एवं निर्यातकों के बीच आपसी लिंकेज (Linkage) भी स्थापित कराया गया, जिससे एफपीओ अपने उत्पाद सीधे निर्यातकों को बेच सकेंगे। इससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होने के साथ-साथ विपणन की प्रक्रिया भी सरल होगी।
इसके अतिरिक्त नंदकुमार (सहायक निदेशक, छिंदवाड़ा) सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी बीजिया मसालों के उत्पादन, गुणवत्ता सुधार एवं विपणन रणनीतियों पर अपने विचार रखे। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत तकनीकों, गुणवत्ता मानकों एवं निर्यात अवसरों से अवगत कराना था। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से संवाद कर अपने अनुभव साझा किए और आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम का समापन सफलतापूर्वक हुआ तथा इसे किसानों एवं निर्यातकों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया गया।
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