सरसों भी बनी भावांतर योजना का हिस्सा
खुश हैं सीहोर के सरसों उत्पादक किसान
24 मार्च 2026, सीहोर: सरसों भी बनी भावांतर योजना का हिस्सा – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाए जाने का निर्णय प्रदेश के किसानों के लिए नई उम्मीद और विश्वास लेकर आया है। सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी फसलों को उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण फैसले ले रही है। इसी क्रम में हाल ही में प्रदेश सरकार ने सरसों की फसल को भी भावांतर भुगतान योजना में शामिल करने का निर्णय लेकर किसानों को बड़ी राहत प्रदान की है। इससे पहले सोयाबीन फसल पर भावांतर योजना का लाभ दिलाकर सरकार ने किसानों के हित संरक्षण की अपनी प्रतिबद्धता को साबित किया था, वहीं अब सरसों उत्पादक किसानों को भी इस योजना से जोड़ा जाना कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रदेश सरकार के इस निर्णय से खासतौर पर रबी सीजन में सरसों की खेती करने वाले किसानों में उत्साह और संतोष का वातावरण देखा जा रहा है। किसानों का कहना है कि बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के कारण उन्हें अक्सर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था, लेकिन भावांतर योजना के माध्यम से अब उन्हें न्यूनतम मूल्य की सुरक्षा मिल सकेगी। सीहोर जिले के ग्राम बमुलिया दोराहा निवासी सरसों उत्पादक किसान श्री थानसिंह मीना ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए लगातार निर्णय ले रही है। उन्होंने बताया कि सरसों को भावांतर योजना में शामिल किया जाना किसानों को उचित दाम दिलाने वाला फैसला है, जिससे खेती को मजबूती मिलेगी और किसानों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
किसानों का मानना है कि वर्ष 2026 को कृषि वर्ष घोषित करना केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं बल्कि कृषि को केंद्र में रखकर विकास की नई दिशा तय करने का प्रयास है। सिंचाई, फसल संरक्षण, समर्थन मूल्य और बाजार सुरक्षा जैसे विषयों पर सरकार की सक्रियता से खेती लाभकारी बनने की ओर अग्रसर है। किसान श्री थानसिंह मीना ने कहा कि प्रदेश सरकार खेती को घाटे का सौदा नहीं बल्कि सम्मानजनक और लाभकारी व्यवसाय बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सरसों को भावांतर योजना में शामिल किए जाने से प्रदेश के लाखों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। किसानों का कहना है कि सरकार के ऐसे निर्णय खेती के प्रति नई ऊर्जा पैदा करते हैं और युवाओं को भी कृषि से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। कृषि वर्ष के दौरान लिए जा रहे किसान हितैषी निर्णय यह संदेश दे रहे हैं कि प्रदेश सरकार का मूल लक्ष्य किसान समृद्धि के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
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