राज्य कृषि समाचार (State News)

नर्मदापुरम में मखाना खेती बनी किसानों की नई उम्मीद, आय बढ़ाने का नया विकल्प

20 मार्च 2026, नर्मदापुरम: नर्मदापुरम में मखाना खेती बनी किसानों की नई उम्मीद, आय बढ़ाने का नया विकल्प –  मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में मखाना की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद की किरण बनकर उभर रही है। जहां पहले किसान सोयाबीन, गेहूं, चना और दालों जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते थे, जो मौसम की अनिश्चितता और बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होती थीं, वहीं अब मखाना की खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प बनती जा रही है।

वर्ष 2025 में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा नर्मदापुरम जिले में मखाना खेती का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसानों को प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। साथ ही किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण और कृषि विशेषज्ञों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को मखाना खेती के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ जिले के कई प्रगतिशील किसानों के दल को बिहार के दरभंगा स्थित राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र में अध्ययन भ्रमण के लिए भेजा गया। इस दौरान किसानों ने मखाना की खेती, उसके प्रसंस्करण और विपणन से संबंधित आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।

नर्मदापुरम जिले में छोटे और मझोले किसानों के एक समूह ने कम उपजाऊ एवं जलभराव वाली भूमि तथा तालाबों को मखाना की खेती के लिए चुना है। यह पहल किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है और यह साबित कर रही है कि मध्य प्रदेश के क्षेत्रों में भी मखाना की खेती संभव और लाभकारी हो सकती है।

किसान इसे जलवायु जोखिम को कम करने और उच्च मूल्य वाली नकदी फसल के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार का सहयोग से तथा किसानों द्वारा इस तकनीक को अपनाने से आने वाले समय में नर्मदापुरम मखाना उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सही योजना, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग के माध्यम से कम उपजाऊ या बंजर भूमि को भी समृद्धि का स्रोत बनाया जा सकता है और ग्रामीण क्षेत्रों में नई आजीविका के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।

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