टमाटर फटने की समस्या से कैसे बचें? यूपी कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की खास सलाह
08 जनवरी 2026, भोपाल: टमाटर फटने की समस्या से कैसे बचें? यूपी कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की खास सलाह – सर्दी के मौसम में टमाटर की खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया मानी जाती है, लेकिन फसल पकने के समय टमाटर के फटने (फ्रूट क्रैकिंग) की समस्या किसानों को भारी नुकसान पहुंचाती है। फटा हुआ टमाटर बाजार में कम दाम पर बिकता है या फिर पूरी तरह बेकार हो जाता है, जिससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर असर पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए जरूरी सलाह साझा की है।
उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि टमाटर की फसल में फल फटने की समस्या आम है, लेकिन सही प्रबंधन से इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जैसे ही टमाटर का फल फटता है, उसकी बाजार कीमत लगभग खत्म हो जाती है और किसान को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसलिए समय रहते इसके कारणों को समझना और उचित उपाय अपनाना बेहद जरूरी है।
टमाटर फटने के मुख्य कारण
डॉ. पंकज त्रिपाठी के अनुसार टमाटर फटने के दो प्रमुख कारण होते हैं। पहला कारण है अनियमित या असंतुलित सिंचाई। जब खेत लंबे समय तक सूखा रहता है और फिर अचानक अधिक पानी दिया जाता है, तो फल तेजी से बढ़ता है और उसका छिलका फट जाता है। दूसरा बड़ा कारण है बोरोन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी। इसके अलावा तापमान में अचानक गिरावट या उतार-चढ़ाव होने पर भी फ्रूट क्रैकिंग की समस्या देखने को मिलती है।
फसल बचाने के लिए जरूरी उपाय
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि टमाटर की फसल में सिंचाई हमेशा नियमित अंतराल पर करें और लंबे समय तक खेत को सूखा न छोड़ें। अनियमित सिंचाई से बचाव करने पर फल फटने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसके साथ ही पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराना भी बेहद जरूरी है।
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि टमाटर की खड़ी फसल में प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम बोरोन और 1 ग्राम कैल्शियम नाइट्रेट मिलाकर छिड़काव करने से फल का छिलका मजबूत होता है और फटने की समस्या कम होती है। इससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
बुवाई से पहले और खेत की तैयारी पर ध्यान जरूरी
कृषि विभाग के अनुसार, टमाटर की खेती शुरू करने से पहले ही सावधानी बरतनी चाहिए। बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 10 किलोग्राम बोरेक्स पाउडर का भुरकाव (बेसल डोज) करना लाभकारी रहता है। इससे मिट्टी में बोरोन की कमी पूरी हो जाती है और आगे चलकर फसल सुरक्षित रहती है।
इसके अलावा खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था होना भी बहुत जरूरी है। जलभराव की स्थिति में फसल को नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है और पौधों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। इसलिए खेत की तैयारी के समय पानी की निकासी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।
सही देखभाल से मिलेगा बेहतर उत्पादन
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान सिंचाई, पोषण और खेत प्रबंधन पर ध्यान दें, तो टमाटर फटने की समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है। इससे न केवल फसल की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि किसानों को बाजार में बेहतर दाम भी मिलेंगे और आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।
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