राज्य कृषि समाचार (State News)

किसानों पर लगाम और चाबुक का वार, ऋण जमा करने की तारीख बढ़ाने की मांग

कृषक जगत सर्वे, समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में देरी

04 अप्रैल 2026, इंदौरकिसानों पर लगाम और चाबुक का वार, ऋण जमा करने की तारीख बढ़ाने की मांग – प्रदेश में इस वर्ष गेहूं की सरकारी खरीदी में देरी ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। एक ओर मंडियों में MSP से 400–500 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर सहकारी समितियों के ऋण चुकाने की अंतिम तिथि 31 मार्च होने से किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। मजबूरी में कई किसानों को फसल औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ी, गहने गिरवी रखने पड़े या ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा। किसानों पर व्यवस्था  लगाम खींचकर चाबुक मार रही है। किसानों ने सहकारी समिति के ऋण जमा करने की तारीख बढ़ाने और ब्याज  माफ करने की मांग की है। इस संबंध में कृषक जगत ने  प्रदेश के विभिन्न जिलों के किसानों से उनके विचार जाने तो उनकी कई परेशानियां  उजागर हुईं ।

किसानों की जमीनी हकीकत

इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के  ग्राम खंजरपुरा  के श्री संदीप पिछोलिया ने कहा कि किसानों को  फसल निकाले काफी समय हो गया है।  ज्यादा  विलंब से  तुलाई होने पर  गेहूं में कीट लगेगा। किसान की जब तक फसल नहीं बिकेगी , वह ऋण जमा कैसे करेगा ?  उसे बाजार में कम भाव में गेहूं की फसल बेचनी पड़ेगी। वहीं ग्राम सुमठा  के श्री नरेंद्र पंवार ने भी फसल नहीं बिकने से किसान ऋण जमा नहीं कर पाए और सोसायटी  में ओवर ड्यू हो गए। गेहूं की खरीदी 15 मार्च से  होनी थी और ऋण जमा करने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल होनी चाहिए।ग्राम बिरगोदा के श्री  शैलेष  ठाकुर ने कहा कि इस साल किसानों की समस्या यह है कि पैसा बाद में आएगा और ऋण पहले भरना है। फसल बिकने पर ही किसानों के पास रुपए आते हैं। अभी गेहूं की फसल नहीं बिकी है ऐसे में  किसानों को किसी से ब्याज पर उधार लेकर , गहने  गिरवी रखकर या फसल को औने- पौने दाम में बेचकर ऋण चुकाना पड़ता है , ताकि समिति की शून्य प्रतिशत वाली योजना का लाभ मिलने से वंचित न हों। ग्राम भोंडवास के श्री जीवन सिंह परिहार कहा कि गेहूं खरीदी में देरी से परेशानी बढ़ गई  है। कई किसानों का गेहूं खेत में पड़ा है। आकस्मिक वर्षा और हवा -आंधी से गेहूं की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा  जिससे किसानों का ही नुकसान होगा।

किसान संगठन का आरोप: “तारीख बदलना किसानों के साथ अन्याय”

भारतीय किसान संघ, इंदौर संभाग के अध्यक्ष श्री कृष्णपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि गेहूं खरीदी में लगातार हो रही देरी से किसान परेशान हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि खरीदी की तारीख बार-बार बदली जा रही है—पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल तय की गई है, जो किसानों के साथ अन्याय है।उन्होंने बताया कि वर्तमान में मंडियों में गेहूं लगभग 2100 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि MSP 2625 रुपये प्रति क्विंटल है।“इससे किसानों को करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है।”

राठौड़ ने कहा कि सहकारी समितियों में ऋण जमा करने की तारीख नहीं बढ़ाए जाने से किसानों में भारी रोष है।उन्होंने मांग की कि जो किसान डिफाल्टर हो गए हैं, उनके लिए अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, ताकि उन्हें अतिरिक्त ब्याज का बोझ न झेलना पड़े।अंत में उन्होंने सवाल उठाया,“किसान कल्याण वर्ष में किसानों के साथ यह कैसा अन्याय है?”

धार जिले में भी किसानों की यही पीड़ा

धार जिले की मनावर तहसील के ग्राम निगरनी के किसान श्री कमल चोयल ने बताया कि सरकारी खरीदी शुरू नहीं होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
“हार्वेस्टर और थ्रेशर का भुगतान नकद करना पड़ता है। ऐसे में मजबूरी में किसान खुले बाजार में गेहूं बेच रहा है, जहां उसे करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है।”

ग्राम बिजूर (धार) के श्री दिनेश कामदार ने कहा कि इस वर्ष गेहूं का उत्पादन भी अपेक्षाकृत कम रहा है।

“इस बार हमें केवल 10–11 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन मिला है। मौसम की मार, खरीदी में देरी और ऋण चुकाने की चिंता—इन सब कारणों से किसान परेशान और नाराज हैं। ऋण वसूली की तारीख बढ़ाई जानी चाहिए।”

नागदा (धार) के श्री कृष्णा सांखला ने भी खरीदी में देरी पर नाराजगी जताई।

“सरकारी खरीदी में देरी से किसान त्रस्त हैं और कई किसान डिफाल्टर हो गए हैं। कड़ी मेहनत के बाद भी जब फसल का उचित मूल्य नहीं मिलता, तो किसान को भारी मानसिक और आर्थिक पीड़ा होती है।”उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसानों के बीच सरकार के प्रति असंतोष बढ़ रहा है।

देवास-उज्जैन क्षेत्र: लागत बढ़ीदाम कम

देवास जिले के पदमपुरा के एक किसान ने बताया कि मंडी में गेहूं 1800 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है।
“डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ गई है, लेकिन किसान को अपनी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। कर्ज में डूबा किसान आखिर जाए तो जाए कहां?”

सन्नौड़ (देवास) के श्री सत्यनारायण पटेल ने कहा,

“फसल कटते ही मजदूरों और हार्वेस्टर का भुगतान नकद करना पड़ता है। खरीदी में देरी से किसान बेचैन है, ऊपर से मौसम भी खराब है। मंडी में बेचने पर घाटा हो रहा है।”

मताना खुर्द के श्री धर्मेंद्र सिंह ने भंडारण समस्या उठाई।

“गेहूं खुले में पड़ा है, बारिश का खतरा है। खरीदी शुरू नहीं हुई और ऋण की तारीख निकल गई—किसान ऋण कैसे चुकाए?”

उज्जैन से सुझाव: ऋण तिथि 15 मई हो

अजड़ावदा (उज्जैन) के प्रगतिशील किसान श्री योगेंद्र कौशिक ने कहा,

“सरकार को रबी ऋण वसूली की अंतिम तारीख 15 मई करनी चाहिए। पहले ऐसा ही होता था। मार्च में ऋण वसूली का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि फसल अप्रैल में आती है।”

खरगोन: किसानों ने उठाया कर्जबेची फसल सस्ते में

अमलाथा के श्री दिग्विजय सिंह सोलंकी ने बताया कि उन्होंने दूध व्यवसाय से आय लेकर ऋण चुकाया, लेकिन कई किसान ऐसा नहीं कर पाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि CCI की तर्ज पर ऐप शुरू किया जाए, जिससे किसानों को उपज बेचने में सुविधा मिले।कोठा बरुड़ के श्री प्रवीण कुमरावत ने बताया,“मैंने 20 क्विंटल गेहूं 2200 रुपये में बेचकर 40 हजार रुपये का ऋण चुकाया। कई किसानों को मजबूरी में ब्याज पर पैसे लेने पड़े।”

पांढुर्ना: किसानों पर दोहरी मार

नीलकंठ के किसान श्री योगेश धारपुरे के पास 150 क्विंटल गेहूं है, लेकिन वे बेच नहीं पा रहे।“बाजार में बेचने पर नुकसान है, लेकिन ऋण भी चुकाना है—स्थिति कठिन है।” खेड़ीधजेवार के श्री नितेश वघाले ने ऋण चुकाने के लिए चना और गेहूं सस्ते में बेचा, जिससे उन्हें करीब 25 हजार रुपये का नुकसान हुआ और 4540 रुपये ब्याज भी देना पड़ा।

महिला किसान श्रीमती वनमाला खोड़े ने एफडी पर लोन लेकर ऋण चुकाया।उन्होंने कहा कि KCC ऋण प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया जाना चाहिए। ग्राम बोरखेड़ी के श्री राहुल बिलखड़े ने बताया कि उन्होंने गोल्ड लोन लेकर 2.96 लाख रुपये का ऋण चुकाया, जिस पर 14% ब्याज देना पड़ेगा।

किसान संगठन की मांग

भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री श्री नीरज दुबे ने कहा,“फसल अप्रैल में आती है, तो मार्च तक ऋण वसूली का कोई तर्क नहीं है। अंतिम तिथि 30 अप्रैल की जानी चाहिए।”

सहकारी समिति और बैंक का पक्ष

पांढुर्ना सहकारी समिति के सहायक प्रबंधक श्री संतोष कुमार वर्मा ने बताया कि लगभग 70% ऋण वसूली हो चुकी है।“31 मार्च तक ऋण चुकाने पर ब्याज नहीं लगता, लेकिन उसके बाद 7% वार्षिक ब्याज देना होगा।”जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक श्री निलेश भांगे ने बताया कि 31 मार्च को क्लोजिंग हो चुकी है।“तारीख बढ़ाने का निर्णय अभी नहीं हुआ है, लेकिन बढ़ती है तो किसानों को राहत मिलेगी।”

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किसानों पर लगाम और चाबुक का वार, ऋण जमा करने की तारीख बढ़ाने की मांग

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