कृषि केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की है धुरी
11 अप्रैल 2026, भोपाल: कृषि केवल आजीविका नहीं, हमारी संस्कृति और अर्थव्यवस्था की है धुरी – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कृषि केवल आजीविका नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। कृषि हमारी अर्थव्यवस्था की धुरी है और प्रदेश के समग्र विकास का आधार भी है। उन्होंने कहा कि आज कृषि एक नए मोड़ पर खड़ी है, जहां जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़, मृदा की घटती उर्वरता और बाजार की अस्थिरता जैसी चुनौतियां हमें नई सोच और नवाचार की ओर प्रेरित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कृषि क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए योजनाओं का विस्तार हुआ है, तकनीक को खेतों तक पहुंचाया गया है और नवाचार को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। “ड्रोन दीदी” जैसी पहल के माध्यम से महिलाएं भी आधुनिक कृषि तकनीक से जुड़ रही हैं, वहीं कृषि सखियों के माध्यम से जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी किसानों तक पहुंचाई जा रही है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “कृषिः मूलं जीवनम्” का भाव हमारे समाज की जीवन-दृष्टि को व्यक्त करता है। कृषि धन्य है, पवित्र है और जीवन का मूल आधार है। इसी भावना को आत्मसात करते हुए “समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश” की थीम पर पूरे वर्ष 2026 को प्रदेश में कृषि उत्सव मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को भविष्य की कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना और कृषि को लाभकारी, स्थायी तथा तकनीक आधारित रोजगार सृजन मॉडल में परिवर्तित करना है।
कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की भावना के अनुरूप जय जवान-जय किसान के साथ जय विज्ञान जोड़ा गया था और वर्तमान दौर में इसमें “जय अनुसंधान” को भी जोड़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती, कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन और बेहतर मार्केट लिंकेज के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में खेती में नवीन पद्धतियों और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। रसायन मुक्त खेती, जैविक कृषि और प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि अवशेषों अर्थात पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन, मंडियों के आधुनिकीकरण और कृषि उत्पादों को ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफार्म से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए भी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में कृषि को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे कृषक परिवारों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिल सके और शहरी परिवारों को ग्रामीण संस्कृति से परिचित होने का अवसर प्राप्त हो। साथ ही फूड प्रोसेसिंग और एग्री इंडस्ट्री को बढ़ावा देकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने और प्रदेश के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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