भारत की कृषि नीति अब मात्रा और गुणवत्ता आधारित विकास पर केंद्रित: शिवराज सिंह चौहान
23 मार्च 2026, नई दिल्ली: भारत की कृषि नीति अब मात्रा और गुणवत्ता आधारित विकास पर केंद्रित: शिवराज सिंह चौहान – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की व्यापक समीक्षा की। बैठक में विशेष रूप से हाल ही में कई राज्यों में अत्यधिक वर्षा, ओलावृष्टि और प्रतिकूल मौसम के कारण हुए फसल नुकसान, बीमा दावों की प्रक्रिया और किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराने के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि फसल नुकसान का वैज्ञानिक आकलन, बीमा दावों का सही निपटान और किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
फसल नुकसान के वैज्ञानिक आकलन और बीमा दावों पर विशेष जोर
बैठक में कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी किसानों को नुकसान हुआ है, वहां राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि क्रॉप कटिंग प्रयोग समय पर किए जाएं, फसल नुकसान का वैज्ञानिक तरीके से आकलन हो और राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि बीमा दावे सही और वैज्ञानिक आधार पर तैयार किए जाएं ताकि प्रभावित किसानों को शीघ्र सहायता मिल सके।
मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए तैयारी जरूरी
बैठक में मौसम की स्थिति और आगामी पूर्वानुमानों की भी समीक्षा की गई। भारतीय मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में दो और पश्चिमी विक्षोभ की संभावना जताई है।
इसे ध्यान में रखते हुए किसानों को समय पर सलाह (एडवाइजरी) देने, फसल सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।
दलहन में आत्मनिर्भरता और MSP पर खरीद का आश्वासन
कृषि मंत्री ने बताया कि रबी फसलों का उत्पादन इस वर्ष अच्छा रहा है और सरकार गेहूं एवं धान की खरीद जल्द शुरू करने जा रही है। इसके साथ ही दलहन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसान अरहर (तुअर), उड़द और मसूर जितनी भी मात्रा में बेचना चाहें, सरकार उसकी खरीद करेगी। इसके लिए NAFED और NCCFजैसी एजेंसियों के माध्यम से खरीद सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर अपनी उपज न बेचनी पड़े।
उत्पादन के साथ गुणवत्ता पर भी जोर
मंत्री ने कहा कि अब कृषि नीति में केवल उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुधार पर भी बराबर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने मध्यप्रदेश के ‘शरबती’ गेहूं का उदाहरण देते हुए बताया कि बेहतर गुणवत्ता के कारण इसे बाजार में अधिक कीमत मिलती है।
उन्होंने किसानों को उन्नत और बायो-फोर्टिफाइड किस्मों को अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही, ताकि उन्हें MSP से अधिक मूल्य प्राप्त हो सके।
विकसित कृषि संकल्प अभियान और क्षेत्रीय रणनीति
बैठक में विकसित कृषि संकल्प अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। इस अभियान के माध्यम से किसानों को बुवाई से पहले वैज्ञानिक जानकारी, सही फसल चयन और क्षेत्र विशेष के अनुसार कृषि मार्गदर्शन दिया जाएगा।
अब देशभर में कृषि योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए पांच क्षेत्रों—उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और पहाड़ी राज्यों—में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, प्रगतिशील किसानों, एफपीओ और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी।
बीज से बाजार तक समग्र रणनीति
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ‘बीज से बाजार’ तक पूरी कृषि श्रृंखला को मजबूत करने पर काम कर रही है, ताकि किसानों को हर स्तर पर सहयोग मिल सके।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार किसानों के साथ खड़ी है और उनका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत बनाना है।
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