राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

फिक्की इंडिया हॉर्टिकल्चर समिट 2026: उच्च मूल्य बागवानी से बढ़ेगी किसानों की आय

11 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: फिक्की इंडिया हॉर्टिकल्चर समिट 2026: उच्च मूल्य बागवानी से बढ़ेगी किसानों की आय – फिक्की इंडिया हॉर्टिकल्चर समिट 2026 में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि बागवानी भारत की कृषि व्यवस्था में परिवर्तन का एक प्रमुख इंजन बनकर उभर रही है और यह कृषि के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग एक-तिहाई योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र किसानों के लिए नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ कृषि को अधिक मूल्य आधारित और लचीला बना रहा है। 

अपने मुख्य भाषण में उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अब मात्र उत्पादन बढ़ाने से आगे बढ़कर मूल्य आधारित विकास की दिशा में अग्रसर है, जहां उच्च मूल्य वाली फसलों, बेहतर गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और दीर्घकालिक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 

इस अवसर पर फिक्की और ग्रांट थॉर्नटन भारत द्वारा संयुक्त रूप से तैयार रिपोर्ट “Vision 2030: Focusing on High-Value Horticulture for Atmanirbhar Bharat” जारी की गई। इस रिपोर्ट में बागवानी क्षेत्र की क्षमता को पूरी तरह विकसित करने के लिए रणनीतिक मार्ग सुझाए गए हैं, जिनमें उत्पादकता, मूल्य संवर्धन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर विशेष जोर दिया गया है। 

सम्मेलन के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, मजबूत प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर निर्यात-आयात संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि किसानों की आय बढ़ाई जा सके। साथ ही, नवाचार, जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों और एकीकृत समाधान को भविष्य की बागवानी के लिए आवश्यक बताया गया। 

पैनल चर्चाओं में उच्च मूल्य बागवानी के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार किया गया। हाई-वैल्यू हॉर्टिकल्चर में विकास को गति देनेपर आयोजित सत्र में कृषि विविधीकरण, तकनीक अपनाने और जलवायु-लचीली खेती पर जोर दिया गया। वहीं बागवानी में मूल्य सृजन पर चर्चा में स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी), प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने और ESG (पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन) प्राथमिकताओं को व्यापार रणनीतियों से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई। 

इसके अलावा वैल्यू चेन चुनौतियों और बाजार संपर्क पर भी चर्चा हुई, जिसमें कुशल सप्लाई चेन, बेहतर मूल्य निर्धारण और नीति समर्थन की अहमियत को रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों ने किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने और आय सुधारने के लिए महत्वपूर्ण बताया।

सत्रों में निर्यात क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर भी चर्चा हुई, जिसमें भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से तकनीक व बाजार विस्तार पर जोर दिया गया। 

सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि बागवानी खाद्य सुरक्षा से आगे बढ़कर पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसके लिए कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, निजी निवेश और स्थानीय स्तर पर उत्पादन मॉडल को बढ़ावा देना आवश्यक है, जिससे दक्षता बढ़े और कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। 

सम्मेलन के अंत में यह सहमति बनी कि सरकार, उद्योग और किसानों के बीच मजबूत साझेदारी के माध्यम से उच्च मूल्य बागवानी भारत में किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण समृद्धि को प्रोत्साहित करने और देश को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत बागवानी शक्ति बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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