बीज–खाद–पेस्टीसाइड माफिया पर शिकंजा: नया Seed व Pesticide Act ला रही सरकार- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह
19 मार्च 2026, नई दिल्ली: बीज–खाद–पेस्टीसाइड माफिया पर शिकंजा: नया Seed व Pesticide Act ला रही सरकार- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह – बुधवार को लोकसभा में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय पर हुई विस्तृत चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार सिर्फ शासन नहीं चलाती, समाज बदलती है, जीवन बदलती है और राष्ट्र का भविष्य गढ़ती है। किसानों के हितों, कृषि सुधारों, आधुनिक तकनीक, सिंचाई, बीमा, प्राकृतिक खेती और डिजिटल एग्रीकल्चर की चर्चा करते हुए उन्होंने विपक्ष के प्रश्नों के जवाब दिए।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों के नाम पर सिर्फ सियासी नारे और अर्द्धसत्यों से काम नहीं चलेगा। खेत–खलिहान की हकीकत पर बात करनी होगी। उन्होंने दो टूक कहा कि सवाल ये होना चाहिए कि किसान के लिए ज़मीन पर क्या काम हुआ, कितना पैसा सीधे उसके खाते में पहुँचा और कौन सी व्यवस्था बदली।
MSP, सिंचाई और नदी जोड़ो: अधूरी विरासत को आगे बढ़ाने का दावा
श्री चौहान ने याद दिलाया कि पिछली सरकार के समय 140 सिंचाई परियोजनाओं में से 99 परियोजनाएं दशकों से लटकी पड़ी थीं, जिन पर कोई काम आगे नहीं बढ़ रहा था। मोदी सरकार ने इन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्राथमिकता दी और लगभग 27 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचित क्षेत्र सुनिश्चित करने की दिशा में तेज़ी से काम बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का “नदी जोड़ो” (रिवर लिंकिंग) ड्रीम प्रोजेक्ट भी वास्तव में मोदी सरकार के दौरान आगे बढ़ा, जहाँ कैन–बेतवा जैसी परियोजनाएं मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ते हुए बाढ़–सूखे की समस्या का दीर्घकालिक समाधान देने के लिए शुरू की गईं।
गुणवत्तापूर्ण बीज– कीटनाशक: किसान के साथ छल नहीं होने देंगे
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सिर्फ ₹500 या ₹1000 की घोषणा से किसानों का भला नहीं होगा, असली सवाल है कि बीज, खाद और कीटनाशक की गुणवत्ता क्या है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार नया Pesticide Act और Seed Act लाने जा रही है जिसमें किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, मानक खाद, और सुरक्षित व प्रभावी कीटनाशक सुनिश्चित किए जाएंगे। श्री चौहान ने बताया कि सरकार ने स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया है कि कोई भी बायो–स्टिम्यूलेंट तभी बाज़ार में बिकेगा जब कम से कम ICAR के संस्थानों/कृषि विश्वविद्यालयों में तीन स्वतंत्र परीक्षण यह प्रमाणित कर दे कि उसका लाभ है। उन्होंने कहा कि “लगभग 8000 उत्पादों में से केवल लगभग 500 ही मानकों पर खरे उतरे हैं, बाकी को अनुमति नहीं दी गई,” यह संदेश देते हुए कि मोदी सरकार किसानों के साथ धोखा करने वालों पर नकेल कसने के लिए प्रतिबद्ध है।
डिजिटल क्रांति: 9 करोड़ Farmer ID और ‘भारत विस्तार’ AI प्लेटफॉर्म
श्री चौहान ने बताया कि Digital Agriculture Mission के तहत अब तक लगभग 9 करोड़ Farmer ID तैयार की जा चुकी हैं। किसान के पास किसान–आईडी होने पर बैंक में लोन स्वीकृत होने में “एक मिनट” से ज़्यादा नहीं लगना चाहिए क्योंकि उसकी पूरी प्रोफाइल, जमीन, फसल और लेनदेन का डेटा डिजिटल रूप से उपलब्ध होगा। पहले किसान को बैंक के चक्कर काटने पड़ते थे, फाइलों–कागज़ों में पैसा और समय दोनों खर्च होते थे; अब यह बाधा डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाई जा रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और एग्री–स्टैक डेटा के उपयोग से PM–Kisan से लेकर MSP खरीद तक हर योजना में किसानों को लक्षित और पारदर्शी लाभ मिलेगा।
वित्त मंत्री की घोषणा का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘भारत विस्तार’ नामक AI प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया है: किसान खेत से फसल की तस्वीर भेजकर या फोन करके पूछ सकेंगे कि “फसल में क्या बीमारी है, क्या दवा डालूं, मेरी मिट्टी के मुताबिक कौन सी फसल बोऊँ?” उसे उसकी अपनी भाषा में त्वरित सलाह मिलेगी। केंद्रीय मंत्री ने इसे किसान के हाथ में विशेषज्ञ–सलाह और तकनीक का नया हथियार बताया जो मोदी सरकार के “टेक–ड्रिवन किसान कल्याण” मॉडल का प्रतीक है।
प्राकृतिक खेती, मिट्टी की सेहत और राज्यवार कृषि रोडमैप
श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंता है कि अत्यधिक केमिकल फर्टिलाइज़र से धरती माँ की सेहत बिगड़ रही है और आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि उत्पादन से इंकार कर सकती है। उसी भाव से प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 1 करोड़ किसानों को जागरूक, 18 लाख किसानों को प्रशिक्षित करने और 75 लाख हेक्टेयर में चरणबद्ध रूप से प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया है जिसमें अभी लाखों किसान और लाखों हेक्टेयर भूमि जुड़ चुकी है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रूप से ये सिद्ध है कि सही ढंग से प्राकृतिक खेती करने पर कई मामलों में उत्पादन घटता नहीं, बल्कि बढ़ सकता है और लागत में भारी कमी आती है; इसीलिए मोदी सरकार इसे “भारत की आने वाली पीढ़ियों के लिए मिट्टी की अमानत” मानकर आगे बढ़ा रही है। श्री चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि राज्य का विषय होने के बावजूद, केंद्र अब हर राज्य के साथ मिलकर एग्रो–क्लाइमेटिक कंडीशन के आधार पर “राज्य कृषि रोडमैप” बना रहा है: कहां कौन सी फसल, कौन सा फल, कौन सी सब्ज़ी उपयुक्त है, किस जिले में कौन सा वैल्यू–चेन विकसित किया जा सकता है, इसके लिए ICAR की विशेषज्ञ टीम और राज्यों के साथ संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
अपने जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मोदी सरकार के लिए समाज में सबसे पीछे, सबसे नीचे खड़ा व्यक्ति ही “दरिद्र नारायण” है और उसकी सेवा ही “भगवान की पूजा” है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य सिर्फ कृषि उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसान की आय बढ़ाना, गांव की समृद्धि और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत का निर्माण है।
अपने विशिष्ट अंदाज़ में उन्होंने कहा कि “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली हमारी सरकार किसानों की ज़िंदगी और भारत के भविष्य को बदलने की ठानी हुई है। इसी राजनीतिक ऊर्जा और प्रशासनिक आक्रामकता के साथ उन्होंने किसानों, कृषि सुधारों और ग्रामीण विकास के एजेंडा को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
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