राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

एमएसपी, बीमा और योजनाओं से आय बढ़ने का दावा, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चुनौतीपूर्ण

25 मार्च 2026, नई दिल्ली: एमएसपी, बीमा और योजनाओं से आय बढ़ने का दावा, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी चुनौतीपूर्ण – केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार किसानों को “हर हाल में उचित दाम” देने के लिए प्रतिबद्ध है और कई किसानों की आय दोगुनी हुई है।

मंत्री के अनुसार, सरकार ने लागत + 50% एमएसपी, रिकॉर्ड खरीद, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम आशा योजना, भावांतर भुगतान और मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के जरिए किसानों को सुरक्षा कवच दिया है। बीमा योजना के तहत किसानों से लगभग 36,055 करोड़ रुपये प्रीमियम के मुकाबले 1.92 लाख करोड़ रुपये से अधिक दावे का भुगतान किया गया है। डिजिटल फार्मर आईडी के माध्यम से आपदा के समय त्वरित राहत देने के उदाहरण भी सामने आए हैं।

लेकिन जमीनी सच्चाई क्या कहती है?

सरकारी दावों के बावजूदखेती की वास्तविक स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

• एमएसपी का लाभ सीमित:

देश में केवल लगभग 6–7% किसान ही एमएसपी पर अपनी उपज बेच पाते हैं (मुख्यतः गेहूं-धान उत्पादक राज्य जैसे पंजाब, हरियाणा)। दलहन, तिलहन और सब्ज़ियों में यह प्रतिशत और भी कम है, जहां अधिकांश किसान खुले बाजार में एमएसपी से कम दाम पर बिक्री करते हैं।

• लागत बनाम आय का अंतर:

कृषि लागत (C2) में लगातार वृद्धि हो रही है—

  • उर्वरक, डीजल और मजदूरी में पिछले 5–7 वर्षों में 20–40% तक बढ़ोतरी
  • वहीं, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार औसत किसान परिवार की मासिक आय लगभग ₹10,200 (2018-19) रही, जिसमें लागत घटाने के बाद शुद्ध बचत काफी सीमित रहती है।

• फसल बीमा में देरी और असमानता:

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत कई राज्यों में दावों के भुगतान में 6 महीने से 1 साल तक की देरी देखी गई है।
हालांकि कुल भुगतान अधिक है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता या आंशिक भुगतान होता है।

• बाजार जोखिम बरकरार:

फल-सब्ज़ी क्षेत्र (जो कुल कृषि मूल्य का ~40% हिस्सा है) में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव होता है—

  • टमाटर, प्याज जैसी फसलों में कई बार कीमतें लागत से नीचे गिर जाती हैं
  • नीति आयोग के अनुसार किसानों को कई बार उपभोक्ता मूल्य का 25–40% ही हिस्सा मिल पाता है।

• छोटे किसानों की स्थिति:

भारत में लगभग 86% किसान छोटे और सीमांत (2 हेक्टेयर से कम भूमि) हैं।
इन किसानों की आय मुख्यतः खेती + मजदूरी + पशुपालन पर निर्भर होती है, और कृषि से अकेले स्थायी आय अभी भी चुनौती बनी हुई है।

सरकार की योजनाएं और डिजिटल पहल निश्चित रूप से ढांचा मजबूत कर रही हैं, लेकिन किसान की आय में वास्तविक और व्यापक सुधार के लिए बाजार सुधार, लागत नियंत्रण और सुनिश्चित खरीद व्यवस्था पर और ठोस काम जरूरी है।

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