अनंतपुर केला कलस्‍टर से लगभग 14,000 केला किसानों  को लाभ होगा

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11 अप्रैल 2022, नई दिल्ली । अनंतपुर केला कलस्‍टर से लगभग 14,000 केला किसानों  को लाभ होगा भारत सरकार के कृषि  मंत्रालय में अपर सचिव, आईएएस डॉ. अभिलक्ष लिखी ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एचसीडीपी) की समीक्षा करने के लिए आंध्र प्रदेश अनंतपुर जिले के नरपाला मंडल के कर्णपुडिकी गांव का दौरा किया। अनंतपुर को केले के लिए एचसीडीपी के तहत पायलट क्लस्टर के रूप में चुना गया है। इस दौरे में डॉ. लिखी ने इस क्लस्टर के केला मूल्य श्रृंखला के हितधारकों के साथ बातचीत की। केला उत्पादकों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह कार्यक्रम उत्पादन से पहले, उत्पादन, कटाई के बाद प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स, विपणन और ब्रांडिंग सहित संपूर्ण मूल्य श्रृंखला की चुनौतियों का समाधान खोजता है।

एचसीडीपी को वहां की भौगोलिक विशेषता का लाभ उठाने और बागवानी क्लस्टर के एकीकृत तथा बाजार के अनुरूप विकास को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने केला उत्पादकों को अच्छी कृषि पद्धतियों के महत्व के बारे में बताया, जिसके परिणामस्वरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्राप्त होते हैं जिससे अंततः अच्छी कमाई होती है। उन्होंने ब्लॉक स्तर के बागवानी अधिकारियों से क्लस्टर विकास कार्यक्रम पर किसानों के साथ एक कार्यशाला आयोजित करने और उन्हें कार्यक्रम के पहलुओं तथा उद्देश्यों को समझाने का आग्रह किया।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 55 बागवानी क्‍लस्‍टरों की पहचान की है, जिनमें से 12 को कार्यक्रम के पायलट लॉन्च के लिए चुना गया है। पायलट चरण के समूह केंद्रों में सेव के लिए शोपियां (जम्मू-कश्मीर) और किन्नौर (हिमाचल प्रदेश), आम के लिए लखनऊ (यूपी), कच्छ (गुजरात) और महबूबनगर (तेलंगाना), केले के लिए अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) और थेनी (तमिलनाडु), अंगूर के लिए नासिक (महाराष्ट्र), अनानास के लिए सिपाहीजला (त्रिपुरा), सोलापुर (महाराष्ट्र) और चित्रदुर्ग (कर्नाटक) और हल्दी के लिए पश्चिम जयंतिया हिल्स (मेघालय) शामिल हैं। ।

कार्यक्रम की पहुंच और प्रभाव के बारे में बात करते हुए डॉ. लिखी ने कहा, “अनंतपुर में केला क्लस्टर से लगभग 14,000 केला किसानों और मूल्य श्रृंखला से जुड़े हितधारकों को लाभ होगा और यह लगभग 7.5 लाख मीट्रिक टन केले का प्रबंधन करेगा। इस कार्यक्रम के साथ, हमारा लक्ष्य लक्षित फसलों के निर्यात में 20-25% तक बढ़ोतरी करना और समूह फसलों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए क्‍लस्‍टर – विशिष्ट ब्रांड बनाना है।

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