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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पीएम-किसान के अपात्र लाभार्थियों से ₹335 करोड़ की वसूली

10 दिसंबर 2024, नई दिल्ली: पीएम-किसान के अपात्र लाभार्थियों से ₹335 करोड़ की वसूली – प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के तहत अब तक अपात्र लाभार्थियों से ₹335 करोड़ की वसूली की जा चुकी है। फरवरी 2019 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य भूमिधारी किसानों के परिवारों को सालाना ₹6,000 की आर्थिक सहायता प्रदान करना है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी DBT योजनाओं में से एक है, जो बिचौलियों की भूमिका समाप्त करते हुए लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाती है।

योजना के तहत अब तक पात्र किसानों को 18 किस्तों में कुल ₹3.46 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। शुरुआत में, यह योजना विश्वास आधारित पद्धति पर संचालित होती थी, जिसमें राज्यों द्वारा किसानों का पंजीकरण स्व-प्रमाणन के आधार पर किया जाता था। कुछ राज्यों के लिए आधार सीडिंग की अनिवार्यता को भी आरंभिक चरणों में छूट दी गई थी। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए समय के साथ PFMS, UIDAI, और आयकर विभाग के साथ एकीकरण जैसे तकनीकी हस्तक्षेप लागू किए गए। इसके अलावा, भूमि सीडिंग, आधार आधारित भुगतान और ई-केवाईसी को भी अनिवार्य किया गया।

इन सुधारों के कारण आयकर दाता, उच्च आय वर्ग के व्यक्ति और सरकारी कर्मचारी जैसे अपात्र लाभार्थियों की पहचान की गई। संबंधित राज्य सरकारों द्वारा इन व्यक्तियों से राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक ₹335 करोड़ की वसूली की गई है।

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जो किसान अनिवार्य मानदंड पूरे नहीं कर सके, उनके लाभ अस्थायी रूप से रोक दिए गए। मानदंड पूरा करने के बाद वे फिर से पात्र हो जाते हैं और लंबित राशि प्राप्त कर सकते हैं। इस योजना के तहत पंजीकरण एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें किसान स्वयं पीएम-किसान पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। आवेदन की जांच और स्वीकृति संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा की जाती है, जिसके बाद लाभ की राशि प्रक्रिया में लाई जाती है।

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यह योजना सभी भूमिधारी किसानों, जिनमें छोटे और सीमांत किसान भी शामिल हैं, को उनकी भूमि की मात्रा के बावजूद सहायता प्रदान करती है। हालांकि, वर्तमान में इस योजना को किरायेदार किसानों तक विस्तारित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

यह जानकारी कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री राम नाथ ठाकुर ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से दी।

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