जलगांव में ₹200 करोड़ का ‘केला क्लस्टर’ स्वीकृत: बागवानी क्षेत्र को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
20 मार्च 2026, नई दिल्ली/जलगांव: जलगांव में ₹200 करोड़ का ‘केला क्लस्टर’ स्वीकृत: बागवानी क्षेत्र को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन – केंद्र सरकार ने बागवानी क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महाराष्ट्र के जलगांव में ₹200 करोड़ के ‘केला क्लस्टर’ को मंजूरी दे दी है। यह घोषणा केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुढ़ी पड़वा के अवसर पर जलगांव में केला उत्पादक किसानों से संवाद के दौरान की।
मंत्री ने जलगांव को ‘केला नगरी’ बताते हुए कहा कि खानदेश क्षेत्र देश के बागवानी उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है और इस क्लस्टर के माध्यम से यहां के किसानों को नई ताकत मिलेगी।
केला उत्पादन से लेकर निर्यात तक बनेगी मजबूत श्रृंखला
प्रस्तावित केला क्लस्टर के तहत उत्पादन से लेकर विपणन और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा। इसमें गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस (GAP), यंत्रीकरण, जैव-नियंत्रण, फल कवरिंग और प्री-कूलिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसके अलावा कोल्ड स्टोरेज, राइपेनिंग चैंबर, रेफ्रिजरेटेड वाहनों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और निर्यात से जुड़ी आधुनिक अवसंरचना का निर्माण भी किया जाएगा। इन सुविधाओं के लिए ‘मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH)’ और ‘एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)’ के तहत सब्सिडी प्रदान की जाएगी, जिससे किसानों को सीधे लाभ मिलेगा।
किसानों को उचित मूल्य दिलाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने किसानों को मिलने वाले कम दाम और शहरों में ऊंचे दाम के बीच अंतर पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि किसान टमाटर जैसी फसलें बहुत कम कीमत पर बेचने को मजबूर होते हैं, जबकि वही उत्पाद शहरों में महंगे दाम पर बिकते हैं।
उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करेंगे, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
MSP के विकल्प पर काम, PM-AASHA के तहत नए मॉडल
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केले जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के लिए MSP व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में सरकार एक वैकल्पिक मॉडल पर काम कर रही है, जिसमें बाजार भाव बहुत गिरने पर किसानों को लागत या तय कीमत और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई की जा सके।
उन्होंने बताया कि मिर्च और आम जैसी फसलों में इस तरह के प्रयोग किए जा चुके हैं और ‘पीएम-आशा (PM-AASHA)’ योजना के तहत नए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं।
प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील
मंत्री ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता और जैविक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा घट रही है और लाभकारी जीव नष्ट हो रहे हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाएं और शुरुआत छोटे स्तर से करें। सही तरीके से अपनाने पर प्राकृतिक खेती से उत्पादन में कमी नहीं आती, बल्कि भूमि की क्षमता बढ़ती है।
जलगांव के केले को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों के सुझावों के आधार पर एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा, ताकि स्थानीय समस्याओं का समाधान किया जा सके। उन्होंने जलगांव के केले को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का भरोसा दिया।
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