सवाल–जवाब I सोयाबीन सीजन 2025–26: किसानों को क्या जानना चाहिए?
20 दिसंबर 2025, नई दिल्ली: सवाल–जवाब I सोयाबीन सीजन 2025–26: किसानों को क्या जानना चाहिए? –
प्रश्न 1: इस साल देश में सोयाबीन की पैदावार कितनी रही है?
इस साल (तेल वर्ष 2025–26) भारत में सोयाबीन की पैदावार करीब 105.36 लाख टन रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग 16 प्रतिशत कम है।
प्रश्न 2: पिछले साल के मुकाबले फसल क्यों घटी?
कई इलाकों में मौसम की मार, कहीं कम बारिश तो कहीं ज्यादा नमी, और कुछ जगहों पर कीट-रोग का असर देखने को मिला। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा।
प्रश्न 3: मंडियों में इस बार आवक कैसी रही?
अक्टूबर से नवंबर 2025 के बीच करीब 33 लाख टन सोयाबीन मंडियों में पहुंचा। आवक बहुत ज्यादा नहीं रही, क्योंकि कई किसानों के पास माल ही कम था।
प्रश्न 4: पेराई (क्रशिंग) बढ़ने का क्या मतलब है?
इस साल अक्टूबर–नवंबर में 20.5 लाख टन सोयाबीन की पेराई हुई, जो पिछले साल से ज्यादा है। इसका मतलब है कि मिलों की मांग बनी हुई है और उद्योग चल रहा है।
प्रश्न 5: अभी देश में कितना सोयाबीन स्टॉक बचा है?
1 दिसंबर 2025 तक किसानों, व्यापारियों और मिलों के पास मिलाकर करीब 76.56 लाख टन सोयाबीन स्टॉक रहने का अनुमान है। यह पिछले साल से काफी कम है।
प्रश्न 6: क्या कम स्टॉक से भाव बढ़ सकते हैं?
आमतौर पर कम स्टॉक से बाजार में मजबूती आती है, लेकिन भाव पूरी तरह मांग, आयात और खली के निर्यात पर निर्भर करते हैं। इसलिए धीरे-धीरे बाजार को देखना जरूरी है।
प्रश्न 7: बीज के लिए कितना सोयाबीन रोका गया है?
करीब 12 लाख टन सोयाबीन बीज के लिए सुरक्षित रखा गया है, ताकि अगली बोनी पर कोई असर न पड़े।
प्रश्न 8: क्या इस साल सोयाबीन का आयात हुआ है?
हां, उद्योग की जरूरत को देखते हुए इस तेल वर्ष में करीब 6 लाख टन सोयाबीन आयात होने का अनुमान है।
प्रश्न 9: सोयाबीन खली की स्थिति कैसी है?
सोयाबीन खली का उत्पादन अक्टूबर–नवंबर में 16.18 लाख टन रहा। खास बात यह है कि खली का 3.34 लाख टन निर्यात हुआ, जो पिछले साल से ज्यादा है।
प्रश्न 10: खली की मांग किसानों के लिए क्यों अहम है?
जब खली का निर्यात और घरेलू मांग अच्छी रहती है, तो मिलें ज्यादा पेराई करती हैं। इससे सोयाबीन दाने की मांग बढ़ती है, जिसका फायदा अंततः किसानों को मिलता है।
प्रश्न 11: इस समय किसान क्या रणनीति अपनाएं?
अगर किसान के पास भंडारण की सुविधा है, तो एक साथ पूरा माल बेचने की बजाय बाजार पर नजर रखते हुए चरणबद्ध बिक्री बेहतर हो सकती है।
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