श्री विधि से सरसों की खेती

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  • डॉ. विशाल मेश्राम
  • डॉ. आर.पी. अहिरवार, डॉ. प्रणय भारती
    कृषि विज्ञान केंद्र, मंडला (म.प्र.)

 

11 अक्टूबर 2021, श्री विधि से सरसों की खेती – श्री विधि से सरसों की खेती क्या है? यह सरसों की खेती करने का तरीका है जिसमें श्री विधि के
सिद्धांतों का पालन करके अधिक उपज प्राप्त की जाती है जैसे-

  • कम बीज दर सिर्फ 50 ग्राम से 250 ग्राम तक एकड़।
  • बीज शोधन एवं बीज उपचार।
  • उपचारिक एवं अंकुरित बीज की उपयुक्त नर्सरी तैयार करना।
  • 12 से 15 दिन के 3 से 4 पत्ती वाले पौधे की रोपाई करना।
  • पौधे से पौधे एवं कतार से कतार की उपयुक्त दूरी रखना।
  • कम से कम दो से तीन बार खरपतवार की निकासी एवं कोनोबीडर कुदाल से गुड़ाई।
  • फसल की देखभाल समान्य सरसों की फसल की तरह की जाती है।
बीज का चुनाव

इस बीज के लिए किसी खास बीज की जरूरत नहीं है अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित बीज का प्रयोग करें अगर अपना बीज पुराना है तो नया बीज ले लें।

उन्नत किस्में

पूसा बोल्ड, वरूणा, क्रांति, (के.आर.वी.), रोहणी (पी.आर.15), माया वरदान, पूसा अग्रणी (सेज 2), जे.एम.1, जे.एम. 2, जे.एम. 3,जी.एम. 2, लक्ष्मी पूसा जय किसान, जे.डी 6, कृष्णा, वसुंधरा, झुमका, पी.टी.303, एम 27, टी.एम 46।

बीज की मात्रा

बीज की मात्रा फसल की अवधि पर निर्भर करती है। यदि अधिक दिनों की किस्म है तो बीज की मात्रा कम लगेगी तथा यदि कम दिनों की किस्म है तो बीज की अधिक लगेगी।

बीज का शोधन बीज का उपचार
  •  बीज के हिसाब से दोगुना पानी लें।
  • बीज गुनगुने पानी में डालकर हल्के एवं उपर तैर रहे बीजों कों बाहर कर दें।
  • गुनगुने पानी में एवं अच्छे बीज में बीज की मात्रा से आधी मात्रा गौ मूत्र, गुड़ एवं केचुआ खाद मिलाकर 6 से 8 घंटे छोड़ दें।
  • बीज को तरल पदार्थ से अलग कर 2 ग्राम बाविस्टीन अथवा कार्बेण्डाजिम दवाई मिलाकर सूती कपड़ा में बांधकर पोटली बनाकर अंकुरित होने केक लिए 12 से 12 घंटे के लिए रख दें। स्थानीय मौसम के हिसाब से समय कम अधिक लग सकता है।
  • अंकुरित बीज को नर्सरी में 2&2 इंच की दूरी में आधा इंच गहराई में डाल दें।
नर्सरी की तैयारी
  • नर्सरी हेतु सब्जी वाले खेत का चुनाव करें फसल की उम्र के हिसाब से नर्सरी हेतु नर्सरी बेड का छोटा-बड़ा निर्माण करें। जैसे कम दिन वाले किस्मों के लिए अधिक।
  • जिस खेत में नर्सरी बेड तैयार किया जा रहा हो उस खेत में नर्सरी के क्षेत्रफल के प्रति वर्ग मी. में 2 से 2.5 कि.ग्रा. वर्मीकम्पोस्ट, 2 से 2.5 ग्रा. कार्बोफ्यूरान मिट्टी में अच्छी प्रकार से मिला लें।
  • नर्सरी बेड की चौड़ाई 1 मी. तथा लम्बाई सुविधानुसार रखें। यह ध्यान रखें कि नर्सरी बेड जमीन से 4 से 6 इंच उचा हो दो बेड के बीच 1 फिट की नाली बनायें।
  • नर्सरी में बीज की बुआई के समय खेत मे पर्याप्त नमी का होना अति आवश्यक है।
  • अंकुरित बीज को 2 इंच कतार से कतार तथा 2 इंच बीज से बीज की दूरी पर तथा आधा इंच की गहराई पर डालकर रखें।
  • नर्सरी बेड को बीज की बुआई के उपरांत वर्मीकम्पोस्ट एवं पुआल से ढक दें।
  • सुबह एवं शाम झारे (हजारे) से सिंचाई करें।
  • 12 से 15 दिनों में रोपाई हेतु पौध तैयार हो जाती है।
भूमि का चयन

सरसों की खेती रेतीली से लेकर भारी मटियार मृदाओं में की जा सकती है लेकिन बलुई दोमट मृदा सर्वाधिक उपयुक्त होती है।

खेत की तैयारी
  • जिस खेत में श्री विधि से सरसों की रोपाई करना हो उस खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए। यदि खेत सूखा है तो सिंचाई (पलेवा सिंचाई) करके जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बना लें तथा खरपतवार को हाथ से ही निकालकर खेत से बाहर कर दें।
    सरसों की फसल की अवधि के हिसाब से उचित अंतराल पर (कतार से कतार तथा पौध से पौध) 6 इंच चौड़ा तथा 8 से 10 इंच गहरा गड्ढा कर लें। इसे 2 से 3 दिनों के लिए छोड़ेंं।
  • 1 एकड़ खेत हेतु 50 से 60 क्ंिवटल कम्पोस्ट खाद में 4 से 5 कि.ग्रा. ट्राइकोडर्मा, 27 कि.ग्रा. डीएपी, एवं 13.5 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश को अच्छी तरह मिला लें तथा प्रत्येक गड्ढे में बराबर मात्रा में इस खाद को डालकर 1 दिन के लिए पुन: छोड़ दें।
  • डीएपी के स्थान पर तत्व के अनुपात में सुपर फास्फेट एवं यूरिया अथवा नत्रजन युक्त खाद का भी उपयोग किया जा सकता है।
    फसल की देखरेख (रोपाई के 30 दिन तक
  • रोपाई के 15 से 20 दिन के अंदर पहली सिंचाई की जानी चाहिए। सिंचाई के 3 से 4 दिन बाद जब खेत में चलने लायक हो जाये तब 3 से 4 क्ंिवटल वर्मीकम्पोस्ट में 13.5 कि.ग्रा. यूरिया मिलाकर जड़ों के समीप देकर कुदाल या खुरपा अथवा बीडर चला दें
  • दूसरी सिंचाई समान्यत: पहली सिंचाई के 15 से 20 दिन बाद करते हैं सिंचाई के पश्चात रोटरी बीडर/कोनीबीडर अथवा कुदाल से खेत की गुड़ाई आवश्यक है। आवश्यकता अनुसार पौधे पर हल्की मिट््टी भी चढ़ा दें।
फसल की देखरेख (रोपाई के 35 दिन बाद)
  • रोपाई के 30 दिन बाद से पोधे तेजी से बड़े होते हैं। साथ ही नई शाखाएं भी निकलती रहती हैं इसके लिए पौधों को अधिक नमी एवं पोषण की जरूरत होती है अत: रोपाई के 35 दिन बाद आवश्यकतानुसार तीसरी सिंचाई करें। सिंचाई के 3 से 4 दिन पश्चात जब खेत में चलने लायक हो जाये तब 13.5 कि.ग्रा. यूरिया एवं 13.5 कि.ग्रा. पोटाश को वर्मीकम्पोस्ट मेें मिलाकर जड़ों के समीप डालकर बीडर या कुदाल से अच्छी प्रकार मिट्टी हल्का कर जड़ों के उपर मिट्टी चढ़ा दें।
  • मिट्टी नहीं चढ़ाने से पौधे के गिरने का डर रहता है एवं मिट्टी चढ़ाने से पौधे के फैलाव करने मदद मिलती है जिस प्रकार आलू की फसल में मिट्टी चढ़ाते हंै ठीक उसी प्रकार से कतार से कतार 1 फिट ऊंचाई तक श्री विधि से सरसों की खेती में भी मिट्टी चढ़ाना आवश्यक है।
  • ध्यान देने की यह बात है कि पौधे के उपर माही लाही एवं अन्य कीट का प्रकोप हो सकता है इससे बचने के लिए उचित प्रबंधन की आवश्यकता पड़ती है
  • पौधों में फूल आने लगते हैं, फूल आने एवं फलियों में दाने भरने के समय पानी की कमी नहीं हो अन्यथा उपज में कमी हो जायेगी।
श्री विधि से सरसों की रोपाई
  • रोपाई के 2 घंटे पूर्व नर्सरी में नमी बना कर रख लें सावधानीपूर्वक मिट्टी सहित पौध को नर्सरी बेड से निकालें।
  • नर्सरी से पौध निकालते समय यह ध्यान रखें कि पौध को खुरपा या कुदाल की सहायता से कम से कम 1 से 2 इंच मिट्टी सहित नर्सरी से निकालें।
  • पौध को नर्सरी से निकालने के बाद आधा घंटे के अंदर गड्ढे में रोपाई कर दें।
  • रोपाई पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि प्रत्येक गड्ढे में सावधानीपूर्वक मिट्टी सहित लगा दें ध्यान रखें कि रोपाई ज्यादा गहराई में ना हो।
  • रोपाई के उपरांत 3 से 5 दिन तक खेत में नमी बनाकर रखें। ताकि पौधा खेत में अच्छी तरह से लग जाये।
  • जहंा मिट्टी भारी हो वहां सूखी रोपाई गोभी के समान करें तथा रोपाई के तत्काल बाद जीवन रक्षक सिंचाई करें।
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