पशुपालन विभाग अब ‘गौपालन एवं पशुपालन विभाग’ के नाम से जाना जाएगा
19 मार्च 2026, इंदौर: पशुपालन विभाग अब ‘गौपालन एवं पशुपालन विभाग’ के नाम से जाना जाएगा – मध्य प्रदेश सरकार ने पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देने की मंशा से विभाग के नाम में बदलाव का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग को गौ पालन एवं पशुपालन विभाग तथा संचालनालय को संचालनालय, गौ पालन एवं पशुपालन के नाम से जाना जाएगा।
आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में राज्य में पशुपालन एवं गौ संवर्धन को नई गति देने के उद्देश्य से इस परिवर्तन को मंजूरी प्रदान की गई।
सरकार का मानना है कि यह नाम परिवर्तन केवल औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि गौ पालन को मुख्यधारा में लाने और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक संकेत है। इससे प्रदेश में गौ संवर्धन, दुग्ध उत्पादन और पशुपालन से जुड़े कार्यक्रमों को नई प्राथमिकता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ‘किसान कल्याण वर्ष’ के तहत विभाग में नई नियुक्तियां, संसाधनों की उपलब्धता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे पहलुओं पर सरकार कितना ध्यान देती है। नाम परिवर्तन के साथ यदि जमीनी स्तर पर सुधार और विभागीय सुदृढ़ीकरण होता है, तभी यह निर्णय किसानों और गौ पालकों के लिए वास्तविक रूप से लाभकारी साबित हो सकेगा।
कैबिनेट बैठक में इसके साथ ही रबी सीजन 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय भी लिया गया, निर्णय के अनुसार उपार्जित गेहूं में से भारत सरकार द्वारा स्वीकार न की जाने वाली सरप्लस मात्रा का निस्तारण मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन द्वारा खुली निविदा के माध्यम से किया जाएगा। इस पर होने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
किसानों को बोनस राशि का भुगतान विभागीय मद में बजट प्रावधान कर सुनिश्चित किया जाएगा, जबकि सरप्लस गेहूं के निस्तारण पर आने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री कृषक फसल उपार्जन सहायता योजना के अंतर्गत आवंटित बजट से की जाएगी। इस निर्णय से प्रदेश के गेहूं उत्पादक किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
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