छत्तीसगढ़ बनेगा ‘मखाना हब’, रायपुर-धमतरी-गरियाबंद-बालोद में ‘मखाना सर्किट’ विकसित करेंगे – मंत्री नेताम
08 अप्रैल 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़ बनेगा ‘मखाना हब’, रायपुर-धमतरी-गरियाबंद-बालोद में ‘मखाना सर्किट’ विकसित करेंगे – मंत्री नेताम – छत्तीसगढ़ में मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय के नए विकल्प सृजित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार सक्रिय कदम उठा रही है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने आज रायपुर जिले के आरंग के लिंगाडीह में मखाना सेंटर का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि रायपुर, धमतरी, गरियाबंद और बालोद क्षेत्र सहित प्रदेश के उपयुक्त क्षेत्रों में मखाना की खेती की व्यापक संभावना है। इसके लिए मखाना उत्पादन क्षेत्रों और जिलों को सर्किट के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन की समेकित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि आरंग और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 50-60 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती की जा रही है, जिसमें ग्रेड-6 गुणवत्ता का मखाना उत्पादित हो रहा है। मंत्री ने उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण तक की प्रक्रिया का अवलोकन किया और किसानों को वैज्ञानिक खेती, प्रशिक्षण कार्यक्रम और आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख मखाना उत्पादक राज्यों में शामिल होगा।
मखाना सर्किट: उत्पादन से विपणन तक समेकित योजना
मंत्री ने रायपुर, धमतरी, गरियाबंद और बालोद जिलों को जोड़कर “मखाना सर्किट” विकसित करने की योजना साझा की। इसका उद्देश्य मखाना उत्पादन के साथ-साथ उसकी प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार में बेहतर मूल्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि एक किलोग्राम बीज से 200-250 ग्राम पॉप मखाना तैयार होता है, जिसकी बाजार में कीमत 700-1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
प्रशिक्षण और महिला समूहों की भागीदारी
मंत्री ने बताया कि राज्य में महिला स्व-सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों को मखाना उत्पादन से जोड़ा जा रहा है। विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रसंस्करण और विपणन की जानकारी दी जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल से राज्य को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड से जोड़ा गया है, जिससे उत्पादन और विपणन में नई संभावनाएं विकसित हुई हैं।
उन्नत कृषि तकनीक और मूल्य संवर्धन
मंत्री ने टिशू कल्चर लैब और बीज विकास केंद्र का भी अवलोकन किया, जहाँ केला, सागौन, बांस और अन्य पौधों के उन्नत उत्पादन की जानकारी ली। उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने और मूल्य संवर्धन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए।
वर्ष 2026-27 के लिए 2 करोड़ रुपये की कार्ययोजना प्रस्तावित की गई है, जिसके तहत मखाना उत्पादन क्षेत्र का विस्तार और नई संरचनाओं का विकास किया जाएगा। मंत्री ने अधिकारियों को नवाचार आधारित कृषि मॉडल गांव-गांव तक पहुँचाने के निर्देश दिए, जिससे किसानों की आय बढ़े और प्रदेश में मखाना हब के रूप में छत्तीसगढ़ की पहचान मजबूत हो।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

