राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

400 करोड़ की कीटनाशक तस्करी का खुलासा

20 मार्च 2026, मुंबई (कृषक जगत): 400 करोड़ की कीटनाशक तस्करी का खुलासा – न्हावा शेवा स्थित जवाहरलाल नेहरू कस्टम हाउस के एक हालिया आदेश ने चीन से भारत तक फैले करीब रू. 400 करोड़ के अवैध कीटनाशक तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि यह पूरा रैकेट नियमों, गुणवत्ता मानकों और कर व्यवस्था को दरकिनार कर संचालित हो रहा था, जिससे किसानों और बाजार दोनों को नुकसान पहुंच रहा है।

कस्टम हाउस के आदेश संख्या 235/2025-26 में दर्ज जाँच विवरण इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को सामने लाता है। कुछ समय पूर्व  जारी इस आदेश में बताया गया है कि इस सिंडिकेट ने लगभग रू. 400 करोड़ मूल्य के कीटनाशकों की तस्करी की।

किसानों के लिए बड़ा खतरा

इस अवैध नेटवर्क के जरिए देश में कम गुणवत्ता वाले और अप्रमाणित कीटनाशक पहुंच रहे थे। केंद्रीय कीटनाशक प्रयोगशाला, फरीदाबाद में भेजे गए नमूनों ने न केवल इस धोखाधड़ी की पुष्टि की, बल्कि यह भी बताया कि इन उत्पादों में से कई भारतीय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इसके बाद यह निम्न गुणवत्ता वाले कीटनाशक अनजान किसानों को बेच दिए जाते थे, जिससे कीट नियंत्रण प्रभावी नहीं होता और फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही, यह अवैध माल वैध भारतीय कृषि रसायन कंपनियों को भी भारी नुकसान पहुँचाता है, जो सभी नियमों का पालन करते हुए और कर का भुगतान करते हुए व्यापार करती हैं।

कोड वर्ड से होता था सौदा

जांच में पाया गया कि सूरत के व्यापारी चीनी आपूर्तिकर्ताओं से व्हाट्सएप और वीचैट (WeChat) मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से संपर्क करते थे। कीटनाशकों के लिए कोड भाषा का इस्तेमाल होता था-जैसे एबामेक्टिन (Abamectin) को “Aba” और उसके एक संस्करण को “Nano Aba” कहा जाता था। इसी कोड में मात्रा और कीमत तय की जाती थी।

फर्जी दस्तावेजों से छिपाया असली माल

कंटेनरों में महंगे कीटनाशक भरे जाते थे, लेकिन कागजों में उन्हें सस्ते औद्योगिक केमिकल के रूप में दिखाया जाता था। इससे कस्टम जांच से बचकर माल आसानी से देश में प्रवेश कर जाता था।

हवाला से होता था भुगतान

आयात में असली कीमत छिपाने के लिए अंडर-इनवॉयसिंग की जाती थी। उदाहरण के तौर पर, रू. 70 प्रति किलो के माल को केवल रू. 2 प्रति किलो दिखाया गया। बाकी भुगतान का बड़ा हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए किया जाता था।

बिना अनुमति वाली फैक्ट्रियों से सप्लाई

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ कीटनाशक ऐसी विदेशी कंपनियों से खरीदे गए, जिन्हें उनके उत्पादन की अनुमति नहीं थी। यानी यह नेटवर्क शुरू से ही नियमों को नजरअंदाज कर रहा था।

सख्ती की जरूरत

रिपोर्ट में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्यूआर कोड सिस्टम, सप्लाई चेन की निगरानी और आयात नियंत्रण को सख्त करने की जरूरत बताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जाएगा, तब तक यह अवैध कारोबार कृषि और किसानों के लिए गंभीर खतरा बना रहेगा।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisements