पेट्रोकेमिकल्स पर शून्य आयात शुल्क का भारत का फैसला समयोचित, लेकिन एग्रोकेमिकल उद्योग ने स्पष्टता और दायरा बढ़ाने की मांग की: ACFI
03 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: पेट्रोकेमिकल्स पर शून्य आयात शुल्क का भारत का फैसला समयोचित, लेकिन एग्रोकेमिकल उद्योग ने स्पष्टता और दायरा बढ़ाने की मांग की: ACFI – केंद्र सरकार द्वारा 2 अप्रैल से 30 जून 2026 तक प्रमुख पेट्रोकेमिकल इनपुट्स पर आयात शुल्क शून्य करने का निर्णय उद्योग जगत द्वारा एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम माना जा रहा है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है और कच्चे माल की उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है।
इस निर्णय पर प्रतिक्रिया देते हुए एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया (ACFI) के महानिदेशक डॉ. कल्याण गोस्वामी ने सरकार के कदम की सराहना की।
“हम सरकार के इस सक्रिय और समय पर उठाए गए कदम का स्वागत करते हैं, जो देश की आर्थिक और औद्योगिक स्थिरता तथा व्यापार सुगमता को मजबूत करेगा,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की नीतिगत पहलें भारतीय किसानों के लिए आवश्यक कृषि इनपुट्स की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
एग्रोकेमिकल सप्लाई चेन को मिलेगा सहारा
सरकार द्वारा जिन उत्पादों पर शुल्क में छूट दी गई है, उनमें एनहाइड्रस अमोनिया, मेथनॉल, फिनॉल, एसीटिक एसिड, मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG) और विभिन्न पॉलिमर शामिल हैं। ये सभी उत्पाद उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई उपकरण, प्लास्टिक सामग्री और पैकेजिंग उद्योग में व्यापक रूप से उपयोग होते हैं।
इससे उद्योगों की लागत कम होने और सप्लाई में स्थिरता आने की उम्मीद है, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ कृषि क्षेत्र को भी मिलेगा।
उद्योग ने उठाए कुछ महत्वपूर्ण सवाल
हालांकि ACFI ने इस निर्णय का स्वागत किया है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता की मांग भी की है।
डॉ. गोस्वामी ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भारत में बॉन्डेड वेयरहाउस में रखे गए आयातित माल पर भी क्या नई शून्य शुल्क दर लागू होगी या नहीं।
इसके अलावा, ACFI ने सरकार से आग्रह किया है कि एसीटोन, एसीटोनाइट्राइल, जाइलिन, ETFA और हेप्टेन जैसे महत्वपूर्ण रसायनों को भी इस छूट सूची में शामिल किया जाए, ताकि उद्योग की परिचालन स्थिरता बनी रहे।
सप्लाई चेन पर अभी भी दबाव
उद्योग के अनुसार, वर्तमान में कंपनियां फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स के माध्यम से तेजी से स्टॉक बनाने की रणनीति अपना रही हैं, जिससे बाजार में तेज खरीदारी और सप्लाई चेन पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
अनुमान है कि मौजूदा स्टॉक अगस्त–सितंबर 2026 तक ही पर्याप्त रहेगा, जिसके बाद नए आयात की आवश्यकता पड़ेगी।
इसके साथ ही, जहाजों के आगमन में देरी (वेसल डिले) के कारण स्थिति और जटिल हो रही है। ऐसे में ACFI ने सुझाव दिया है कि सरकार इस छूट को अगले तिमाही (Q2) तक बढ़ाने पर विचार करे, ताकि आपूर्ति में बाधा न आए।
पेट्रोकेमिकल इनपुट्स पर आयात शुल्क में छूट का यह निर्णय कृषि इनपुट सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, उद्योग की मांग के अनुसार यदि सरकार स्पष्टता, अतिरिक्त उत्पादों का समावेश और अवधि विस्तार पर विचार करती है, तो यह कदम और अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
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