बीज में महिलाओं की भागीदारी

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प्रबन्धन कृषि में बहनों का बहुत बड़ा योगदान होता है। ऐसा देखा गया है जहाँ बहनें भी खेती में हाथ बँटाती हैं वहाँ उपज बेहतर होती है। ग्रामीण परिवार खरीफ के मौसम की फसलों की तैयारी में जुट गये हैं ऐसे में सोयाबीन की खेती में अधिक उपज के लिये कृषक बहनें यदि निम्नलिखित बातों पर ध्यान देती हैं तो निश्चित ही बेहतर उपज प्राप्त कर सकेंगी :
गहरी जुताई:

  • बहनें तीन साल में एक बार किये जानी वाली गहरी जुताई के लिये पर्याप्त राशि जमा करें।
  • नौतपे के पहले, तीन साल में एक बार गहरी जुताई करवाने के लिये घर में किसान भाई को याद दिलायें और एकत्रित की हुई राशि उन्हें सौंपें।
  • सुनिश्चित करें की समय पर गहरी जुताई हो जाये।

बीज तैयार करने की विधि

  • बीज को छानें, इसे छानने के लिये दो व्यक्तियों द्वारा चलाया जाने वाले बड़े छन्ने की चारों मूठ से रस्सी बाँध कर पेड़ की शाखा अथवा घर के अन्दर की बीम से झूले की तरह लटका दें। इसे जमीन से इतना ऊँचा लटकायें कि जब जमीन पर बैठ कर कोई चलाये तो यह उस व्यक्ति के नाभी की ऊँचाई पर हो। इस प्रकार तैयार झूले छन्ने के नीचे तिरपाल बिछायें जिस पर कचरा गिरे और बगल में एक और तिरपाल बिछायें जिस पर छना हुआ बीज पलटायें। इस प्रकार कम श्रम में और शीघ्रता से मात्र एक व्यक्ति ही बीज छान लेगा।
  • छानने के उपरान्त छने हुये बीज से बीज के आकार के कंकड़, पत्थर, मिट्टी के ढेले, कटे-फटे बीज, कीड़े द्वारा खाये हुये बीज, बदरंगे बीज और कम चमक के बीज बीन कर अलग कर दें।
  • अब आपके पास बड़े आकार के चमकदार बीज उपलब्ध हैं, ध्यान रहे कि छानने और बीनने हेतु इतनी मात्रा में बीज लें कि अंत में पर्याप्त मात्रा में आपके पास बीज उपलब्ध हो सके।
  • इस बात का भी ध्यान रखें कि कटाई के समय की गई बीज की किसी भी प्रकार की सफाई अगली बार की बुवाई के लिये पर्याप्त नहीं है अत: बोनी के ठीक पहले की नवरात्र के पूर्व ही बीज की तैयारी कर लें।

अंकुरण परीक्षण का परिणाम

  • यदि 100 में से 75 से अधिक दाने स्वस्थ रूप से अंकुरित होते हैं तो 28 किलो सोयाबीन प्रति एकड़ बीज दर रखें।
  • यदि 70 दानों में ही अंकुरण बीज होता है तो बीज दर 5 किलो बढ़ा दें। अर्थात प्रति एकड़ 37 से 40 किलो प्रति एकड़ बीज बोयें।
  • यदि 70 से कम बीज अंकुरित हों तो बीज की छनाई करें तथा बदरंगे अथवा अलग किस्म के दिखने वाले दानों की बिनाई कर अलग करें।
  • अब बीज को उपचारित कर बुवाई करें।

फफूंदनाशक द्वारा बीज का उपचार

  • फफूंदनाशी दवा 2 ग्राम थीरम, 1 ग्राम बाविस्टीन/ किलो बीज की दर से उपचारित करें।

बीज का जैव ऊर्वरक (कल्चर) द्वारा उपचार

  • बोनी पूर्व 1 एकड़ के बीज का उपचार 3 पैकेट पी.एस.बी. 600 ग्राम तथा 1 पैकेट राईजोबियम 250 ग्राम कल्चर से उपचारित करें । यह उपचार, शिशु को पोलियो का टीका लगाने के समान है।
  • कल्चर की जाँच के लिये कल्चर को  में बन्द कर दबायें। अगर जैव उर्वरक (कल्चर) का लड्डू बनता है तो इस कल्चर में पर्याप्त नमी है और कल्चर में उपस्थित जीवों के सक्रिय होने की सम्भावना अधिक है।
  • अच्छा जैव उर्वरक (कल्चर) प्राप्त करने के लिये कृपया अपने जिले के कृषि विज्ञान केन्द्र से सम्पर्क कर जवाहर कल्चर प्राप्त करें और इसी कल्चर का ही उपयोग करें।

बीज उपचार की विधि

  • पर्याप्त मात्रा में प्लास्टिक की बोरी में बीज लें।
  • समें पानी छींट कर हल्का गीला कर लें।
  • बताई गई मात्रा में फफूंदनाशक डालें।
  • बोरी का मुँह बंद कर दो बहनें दोनों छोरों से बोरी को पकड़ कर जोर से हिलायें।
  • इसके उपरांत बताई गई मात्रा में फिर कल्चर को डालें।
  • बोरी का मुँह बंद कर दो बहनें दोनों छोरों से बोरी को पकड़ कर एक बार फिर जोर से हिलायें।
  • अब बीज को बोयें।

महिला कृषक बहनों से निवेदन कि वे किसान भाईयों को याद दिलायें कि किसान भाई

  • बीज की सफाई, अंकुरण की जाँच तथा जैव उर्वरक (कल्चर) और फफूंदनाशक से उपचारित करने के उपरांत ही सोयाबीन की बुवाई करें।
  • सोयाबीन की बुवाई हेतु ऐसे खेत का चुनाव करें जिसमें पानी का भराव न होता हो।
  • सोयाबीन की बोवाई कतार में करें तथा कतार से कतार की दूरी 12-14 इंच रखें । इस तरह से बोनी के लिये सीड ड्रिल की एक कुसिया को बन्द करें और एक को खुली छोड़ें और फिर बोनी करें।
  • दस कतार के बाद एक कतार खाली छोड़ें, इस जगह का इस्तेमाल ऊँचे जूते पहन कर दवाई छिड़कने के लिये करें।
  • बोनी हेतु मेड़ नाली सीड ड्रिल अथवा बी.बी.एफ. प्लान्टर का उपयोग और लाभकारी होगा।
अंकुरण परीक्षण की विधि :

  • इन बीजों को दस-दस दानों की दस कतार में गीले जूट के बोरे पर रख दें।
  • ऊपर से एक और गीले जूट के बोरे से ढक दें।
  • इन बोरियों को सुरक्षित स्थान पर 48 घंटे के लिये रख दें।
  • इन बोरियों को लगातार गीला करते रहें।
  • इसके उपरांत ऊपर वाली बोरी को हटायें तथा बिना अंकुरित बीज और छोटे और कमजोर अंकुर वाले बीज को हटा दें।
  • स्वस्थ अंकुरित बीज की संख्या को गिन लें ।

 

अंकुरण परीक्षण के लिये बीज का नमूना कैसे तैयार करें

बीज की बोरी की ऊपरी सतह से पहली मुठ्ठी और सबसे नीचे से पाँचवीं मुठ्ठी बीज निकालें। बीच की सतह से क्रमश: दूसरी, तीसरी और चौथी मुठ्ठी बीज निकालें।

  • इन्हें सूप अथवा थाली में रख कर अच्छे प्रकार से मिला लें।
  • आँख मूंद कर इन बीजों से
    सौ दाने निकाल लें।

 

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