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जिंक फसल के साथ मनुष्य के लिए भी जरूरी : श्री पटेल

 

सुमिल केमिकल ने लांच किया नया जिन्डा उत्पाद

इंदौर। भारत के विभिन्न राज्यों की भूमि में जिंक की मात्रा विश्व के विकसित देशों अमेरिका और चीन से भी कम पाई गई है। इसी कारण भारत में खाद्यान्न उत्पादन की दर धीमी है। जिंक सिर्फ फसलों के लिए ही नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए भी जरूरी है। यह बात सुमिल केमिकल इंडस्ट्रीज प्रा.लि. के नेशनल बिजनेस मैनेजर श्री एन.बी. पटेल ने इंदौर में आयोजित विक्रेता सम्मेलन में नए उत्पाद जिंडा को लांच करते हुए कही।

मिट्टी की सेहत खराब

इस कार्यक्रम में श्री पटेल ने दृश्य -श्रव्य माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि खेतों में उर्वरकों और माइक्रो न्यूट्रिएंट के बेतहाशा उपयोग के कारण रसायनिक संतुलन बिगड़ गया है। जमीन में जिंक की मात्रा कम होकर 43 प्रतिशत रह गई है। इसी कारण मृदा का स्वास्थ्य खराब है। देश के 0 से 5 वर्ष के बच्चे जिंक की कमी के कारण मरते हैं। जिंक फसलों के अलावा मानव जीवन के लिए भी जरुरी है।

भारत में गेहूं ,चावल,आलू, कपास, अंगूर, मिर्च, सोयाबीन, गन्ना आदि में जिंक की कमी के कारण भारत अमेरिका और चीन जैसे विकसित देशों की तुलना प्रति हेक्टर पैदावार में पिछड़ा हुआ है। यहां तक की विश्व की औसत पैदावार में भी पीछे है।

62 प्रतिशत नमूनों में जिंक की कमी

श्री पटेल ने बताया कि इण्डिया फर्टिलाइजर जर्नल दिसंबर 2014 के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों से एकत्रित किए गए 7500 नमूनों का जब विश्लेषण किया गया तो 62 प्रतिशत नमूनों में जिंक की कमी पाई गई। इनमे तमिलनाडु में सर्वाधिक 67 और महाराष्ट्र में 54 प्रतिशत जिंक की कमी पाई गई। इसमें मप्र भी शामिल है। जिंक की कमी का कारण उर्वरकों के ज्यादा उपयोग करने और जैविक खाद का उपयोग नहीं करने के अलावा जल भराव जैसे कारण भी है।

मानव शरीर में जिंक की कमी होने पर डॉक्टर परामर्श लिखते हैं। लेकिन बिना दवाई के जिंक कैसे मिले इसके दो उपाय हैं। पहला तो यह कि कृषि वैज्ञानिक नई किस्मों को इस तरह क्रास करें कि फसलों में ज्यादा जिंक आए. दूसरा यह कि किसान अपने खेतों में जिंक का ज्यादा उपयोग करे। किसी भी फसल में सबसे ज्यादा जिंक की जरूरत फूल आने के समय रहती है। जिंक फसल में क्लोरोफिल बढ़ाता है, परागण के लिए धान में जिंक की 30 प्रतिशत मात्रा शुरू के 30 दिनों में लगती है,शेष 70 प्रतिशत बाद में लगती है।

जिंडा की विशेषताएं

  • परागण से बीज निर्माण तक में मदद
  • 18 फीसदी ज्यादा गुणवत्तायुक्त उपज

जिन्डा कैसे प्रयोग करें

श्री पटेल ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि सुमिल केमिकल का जिंडा नामक उत्पाद स्लो रिलीज तकनीक पर आधारित है जो परागण से लेकर बीज निर्माण तक मदद करता है. इसके उपयोग से सल्फर और जिंक की कमी की पूर्ति हो जाती है। इससे फसल स्वस्थ रहकर गुणवत्तायुक्त उपज देती है जो अन्य उत्पाद की तुलना में 18 फीसदी ज्यादा है. इस उत्पाद को स्वास्थ्य विभाग के अनुसंधान केंद्र ने भी अनुमोदित कर हमारा समर्थन कर बड़ा योगदान दिया है। यह मानव के लिए भी लाभकारी है।

पुराने खादों से अपने उत्पाद की तुलना करते हुए उन्होंने विभिन्न फसलों के उत्पादन के तुलनात्मक आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने इस उत्पाद की प्रमुख विशेषताएं बताते हुए कहा कि यह विश्व का माइक्रोनाइज ग्रेन्युल वाला पहला जिंक और सल्फर का कॉम्बिनेशन उत्पाद है, जिससे जमीन का पीएच कम होता है। इसे वर्षों के परीक्षण के बाद प्रमाणित किया है कपास, धान आदि के लिए 4 किलो /एकड़ डालने की सिफारिश गई है।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में क्षेत्रीय प्रबंधक श्री इमरान कुरैशी ने विक्रेताओं का स्वागत कर मध्य प्रदेश में विपणन रणनीति की जानकारी विस्तार से दी। इस अवसर पर विक्रेताओं को प्रोत्साहन पुरस्कार भी दिए गए।

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