कपास की उत्पादकता में हम कहाँ ?

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भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा कपास उत्पादक देश है। और यह विश्व की कपास का 27 प्रतिशत उत्पादन करता है, परन्तु देश की कपास उत्पादकता मात्र 565 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर है। यह विश्व का औसत उत्पादकता से कहीं नीचे है। यह एक चिंता का विषय है। पिछले दस वर्षों में देश का कपास की उत्पादकता में कोई सार्थक अन्तर नहीं आया है। विश्व के अन्य कपास उत्पादक देशों से हमारा उत्पादन एक तिहाई से भी कम है। विश्व में आस्ट्रेलिया सबसे अधिक 1833 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है वहीं इजराईल, टर्की, चीन व ब्राजील की उत्पादकता क्रमश: 1769, 1639, 1633 व 1522 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी कपास की उत्पादकता लगभग डेढ़ गुनी (748 किलोग्राम/हे.) है। उत्पादकता के मामले में भारत का नम्बर विश्व में 30वां है जो एक चिन्ता का विषय है। देश में पंजाब, राजस्थान, हरियाणा व गुजरात ही ऐसे राज्य हैं जहां कपास की उत्पादकता 700 किलोग्राम/हेक्टर से अधिक है। मध्य प्रदेश में यह 520 किलो/ हेक्टेयर है। सरकारी प्रयासों तथा वैज्ञानिकों द्वारा किये अनुसंधानों के बाद भी कम उत्पादकता की स्थिति बनी हुई है। पहले हमें विश्व की औसत उपज तक पहुंचना होगा।देश में कपास के उत्पादन क्षेत्र के उतार-चढ़ाव को भी नियंत्रित करना होगा। देश के उत्तरी क्षेत्र में कपास के उत्पादन क्षेत्र में वर्ष 2015-16 में एक बड़ी कमी आई थी जिसका प्रमुख कारण फसल का इसके पहले वर्ष में सफेद मक्खी के प्रकोप के कारण फसल का नष्ट होना था। कीटों पर कीटनाशकों के छिड़काव के बाद भी नियंत्रण न होना किसानों द्वारा अमानक कीटनाशकों का उपयोग था। अमानक कीटनाशकों का बाजार में उपलब्ध होना हमारी व्यवस्था पर तीखा प्रहार है जिसे रोकने के लिए हमें सख्त कदम उठाने होंगे और उनके उत्पादन को कड़ाई से रोकना होगा अन्यथा ये किसानों के प्रति अन्याय होगा और कपास के रकबे घटने की स्थिति किसी भी अन्य फसल में भी आ सकती है। बीटी कपास आने के बाद भी हमारी कपास की उत्पादकता में सकारात्मक वृद्धि नहीं दिखाई दे रही है। किसानों ने बीटी कपास को तो अपना लिया परन्तु वैज्ञानिकों द्वारा दी गयी एक महत्वपूर्ण सलाह को नजरअंदाज कर दिया है जिसके कारण बीटी कपास भी पिंक बालवर्म बीटी कपास आने के पहले कपास का एक प्रमुख हानिकारक कीट या बीटी कपास को फिर से इस कीट का प्रकोप आरम्भ हो गया है। बीटी कपास इस कीट के प्रति अपनी प्रतिरोधी क्षमता खोती जा रही है इसका मुख्य कारण है कि किसानों ने बीटी बीज के साथ मिलने वाली रिफ्यूजिया को नहीं लगाया या गलत तरीके से लगाया। शासन को भी रिफ्यूजिया लाइनों को आवश्यक रूप से लगाने के लिए प्रेरित करना होगा या इसे अपनाने के लिए नियम बनाने होंगे, अन्यथा बीटी कपास अन्य पतंगों की इल्लियों के प्रति भी अपनी प्रतिरोधी क्षमता खो देगी व फिर किसानों द्वारा बीटी कपास लगाने का कोई औचित्य नहीं रह जायेगा।

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