पाले से बचाव

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शाजापुर। जिले में रबी फसलों की वर्तमान स्थिति काफी अच्छी है। लेकिन विगत 2 से 3 दिनों में लगातार गिरता हुआ तापक्रम एवं बढ़ती हुई ठंड फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसी सम्भावना है कि आगामी सप्ताह में पाले की सम्भावना रात्रि का तापक्रम 5 डिग्री से कम हो सकता है इस विषम परिस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए पाले एवं ठंड से फसलों को बचाने के लिये केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा किसान भाईयों को सलाह दी जा रही है कि गिरते तापक्रम एवं ठंड पर विशेष ध्यान रखें एवं सावधानीपूर्वक उपाय का प्रयास करें।
पाला क्या है ?
सर्दी के मौसम में दिसम्बर-जनवरी महीने में ठंड की लहर चलती है और रात का तापक्रम लगातार कम होता जाता है। जब तापक्रम लगातार 5 डिग्री से कम हो जाता है तो फसलों के अंदर उपस्थित पानी जम जाता है, जिससे कोशिकाभित्त फट जाती है और तरल पदार्थ बाहर की तरफ आ जाते हैं। पौधे मुरझा जाते हैं। इसे ही पाला या ठंड से जलना कहते हैं ।
पाला कब पढ़ता हैै ?

  • लगातार रात्रि का तापक्रम 3 डिग्री तक चला जाये।
  • आसमान में बादल न रहें । सुबह-सुबह हवा चल जाये।

पाले से बचाव: इसके लिये पहले से सचेत रहना चाहिये। विशेष रूप से आलू, मटर, काबुली चना की फसल को बचाने हेतु उपाय करना चाहिए।
सिंचाई करें:

  • सिंचाई करने से खेत का तापक्रम 0.5 से 2 डिग्री तक बढ़ जाता है। पाले की सम्भावनाओं को देख खेत में हल्की सिंचाई करें जिससे मिट्टी गीली रहे।
  • चना, आलू, मटर, मसूर फसल में सरसों के अंतरवर्तीय फसल लेने से हवा की ठंडी तरंगे फसलों को कम नुकसान पहुंचाती है।
  • बगीचे या खेत में उत्तर पश्चिम दिशा में वृक्ष घने लगायें जो वायुरोधी कार्य करेगी, ठंडी हवाओं को खेत में बहने से रोकेगी।
  • आम, नींबू, अनार, बेर, सीताफल के पौधों की घास -फूस, ज्वार के कड़वी की टाटियों से ढंकें।
  • पपीते के बड़े पौधों के ऊपर ताड़ के पत्ते या सूखी घास फैला दें टाट से ढंके इस तरह पौधों के ऊपर ठंड से बचाव करें।
  • पाले से बचाव हेतु फसल पर घुलनशील सल्फर 0.4 प्रतिशत एवं घुलनशील बोरान 0.2 प्रतिशत मिश्रण का 500 ली. पानी के साथ में छिड़काव करें। प्रति पम्प घुलनशील सल्फर 40 ग्राम एंव घुलनशील बोरान 20-25 ग्राम का घोल बनाकर कम से कम छ: टंकी का प्रयोग करें।
  • डाईमिथाइल सल्फोआक्साइड 78 मि.ली./1000 ली./हेक्टेयर भी पाले से बचा सकता है।

धुआं द्वारा: खेतों व बगीचों में धुआं हेतु नम घास सोयाबीन एवं गेंहू का खराब भूसा या टहनियों को इस तरह जलायें कि धुआं खेतों पर एक परत बना ले व खेत में फसलों व पौधों के ऊपर धुआं बना रहे इससे तापक्रम में 5 डिग्री अंतर आ जाता है।

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