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आवश्यक है मौसम का सटीक पूर्व अनुमान

देश में अभी भी खरीफ फसलों की खेती मानसून की वर्षा पर निर्भर करती है। अति व अल्प वर्षा खरीफ फसलों की सफलता व विफलता के लिए जिम्मेदार रहती ही है। साथ में मानसून का समय से आना या न आना खरीफ फसलों की बुवाई को भी प्रभावित करता है, जिसका सीधा प्रभाव फसल के उत्पादन पर पड़ता है। मानसून की वर्षा का पूरे मौसम में वितरण भी फसल की बढ़वार व उत्पादन को प्रभावित करता है। मौसम की सटीक भविष्यवाणी फसल उत्पादन की क्रियाओं में फेरबदल करने में किसानों को सहायक हो सकती है ताकि विपरीत मौसम से फसलों को कम हानि पहुंचे तथा सामान्य मौसम अवस्था में फसलों का उत्पादन बढ़ाने में सहायक हो सके। पिछले वर्षों में मौसम की सही भविष्यवाणी न होने के कारण किसानों को फसल उत्पादन में हानि झेलनी पड़ी है। किसान को यदि हम मौसम की सही जानकारी देने में सक्षम नहीं है तो अच्छा होगा कि हम गलत भविष्यवाणी न करें ताकि किसान गलत जानकारी द्वारा होने वाली अतिरिक्त हानि से बच सकें। भारत सरकार के मौसम विभाग द्वारा अभी तक वर्ष 2018 के लिए मानसून वर्षा की कोई भविष्यवाणी नहीं की गई है। मौसम का पूर्व अनुमान लगाने वाली एक निजी संस्था स्काईमेट ने वर्ष 2018 में सामान्य वर्षा की सम्भावना की उम्मीद जताई है। संस्था द्वारा इस वर्ष शत-प्रतिशत सामान्य (5 प्रतिशत कम या अधिक) वर्षा होगी। जून से सितम्बर तक चार महीनों में औसतन 887 मि.मी. वर्षा होने का अनुमान लगाया गया है। संस्था का अनुमान है कि इस वर्ष सामान्य से 110 प्रतिशत वर्षा होने की सम्भावना 5 प्रतिशत, 105 से 110 प्रतिशत की 20 प्रतिशत, 96 से 104 प्रतिशत की 55 प्रतिशत, 90 से 95 प्रतिशत की 20 प्रतिशत तथा 90 प्रतिशत के कम वर्षा होने की सम्भावना बिल्कुल नहीं है जो किसानों के लिए एक शुभ सूचना है।
सामान्य वर्षा के साथ-साथ वर्षा का पूरे मौसम में बंटवारा भी फसलों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, स्काईमेट के अनुसार जून माह में 111 प्रतिशत वर्षा होने की सम्भावना है जो फसलों की समय पर बोनी निश्चित करेगा। जुलाई व अगस्त में सामान्य वर्षा क्रमश: 97 व 96 प्रतिशत होने की सम्भावना है जबकि सितम्बर में सामान्य से 101 प्रतिशत वर्षा होने की सम्भावना है जो फसलों के दानों में विकास व रबी फसलों की बोनी के लिए भी सहायक होगा। स्काईमेट के ये अनुमान किसानों के लिए एक शुभ समाचार लेकर आये हैं। मौसम अनुमान सही होने की सम्भावना पिछले वर्षों के अनुभवों से एक प्रश्न चिन्ह ही है जिसका पता मौसम के अन्त में ही चल पायेगा। फिर भी आशा है कि अनुमान सही निकलेंगे।

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