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उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला 12 से 16 फरवरी तक लगेगा

21 जनवरी 2026, उज्जैन: उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल वन मेला 12 से 16 फरवरी तक लगेगा – उज्जैन में पहली बार विंध्य हर्बल मेले का आयोजन महाशिवरात्रि पर्व की अवधि के दौरान 12 फरवरी से 16 फरवरी तक दशहरा मैदान में वन विभाग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। वन मेले का शुभारंभ आगामी 12 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ  मोहन यादव द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। इस मेले का उद्देश्य आमजन को वन, पर्यावरण, वन्यजीव संरक्षण आयुर्वेद और  पारम्परिक  ज्ञान, वनोपज, हर्बल उत्पादों, आयुष, स्वास्थ्य, जैव विविधता एवं जनजातीय संस्कृति से जोड़ना है।

वन मंडल अधिकारी श्री अनुराग तिवारी ने बताया कि मेले में मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के हर्बल उत्पाद, आयुर्वेदिक औषधियां, वनोपज पर आधारित हस्तशिल्प कला कृतियां, आचतिक व्यंजन प्रदर्शित किए जाएंगे। इस मेले में देश के विभिन्न राज्यों के साथ प्रदेश के जिलों में मिलने वाली जड़ी बूटियां और वनोपज लोगों को देखने व खरीदने को मिलेगी। इस संबंध में पिछले दिनों प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक म.प्र. राज्‍य लघु वनोपज संघ द्वारा उज्जैन में विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया गया, जिसमें दशहरा मैदान, सेठी नगर, उज्जैन मुख्यमंत्री म.प्र. शासन की मंशानुरूप उपयुक्त पाया जाने से चयनित किया गया है।उज्जैन, जो सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली राजधानी रही है। सदियों से काल गणना, ज्योतिष एवं सांस्कृतिक चेतना का वैश्विक केंद्र रहा है। इसी ऐतिहासिक विरासत के अनुरूप यह मेला जिले की पहचान और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा।

उक्त मेले में संपूर्ण मध्य प्रदेश से हर्बल उत्पादक, प्रसंस्करणकर्ता, हर्बल उत्पादन के क्रेता-विक्रेताओं द्वारा भाग लिया जाएगा। मेले में विंध्य हर्बल के 140 से अधिक उत्पाद रखे जाएंगे। इनमें महुआ से बना बॉडी लोशन, एंटी एजिंग क्रीम, बच्चों के लिए ग्रोविट, महुआ युक्त च्यवनप्राश, लैब टेस्टेड जंगल की शहद और शिलाजीत शामिल हैं। सरकारी ब्रांड होने, लैब टेस्ट रिपोर्ट और आयुर्वेदिक प्रोसेसिंग के कारण इन उत्पादों की विशेष पहचान रहेगी। मेले के दौरान अंतर्राष्ट्रीय हर्बल कार्यशाला और क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित होंगे। प्रतिदिन 200 से अधिक आयुर्वेदिक चिकित्सक निशुल्क परामर्श देंगे। उक्त मेले में मध्य प्रदेश वन विभाग की विभिन्न शाखाओं की योजनाओं से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। बच्चों और युवाओं के लिए मेले का सबसे बड़ा आकर्षण चीता परिवार का विशाल स्कल्पचर रहेगा।

मेले में लोक नृत्य, लोक संगीत, नाट्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों के लिए चित्रकला एवं प्रकृति आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही जंगली वन्य प्राणियों को पकड़ने में उपयोग होने वाला बोमा भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को वन, जैव विविधता की जानकारी दी जाएगी। मेले के आयोजन के दौरान विविधता और चीतों के पुनर्स्थापन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी। मेले के दौरान महाकाल मंदिर से मेला परिसर तक निःशुल्क बस सेवा चलेगी। कम शुल्क पर ई-रिक्शा की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए गोल्फ कार्ट और व्हील चेयर की व्यवस्था भी की जाएगी।

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