वैज्ञानिकों द्वारा कृषक प्रशिक्षण – चने की फूल अवस्था में सिंचाई न करें

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शहडोल। कृषि विज्ञान केन्द्र शहडोल के द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत रबी 2017-18 में कृषकों के खेतों में चना, मसूर एवं अलसी के प्रदर्शन डाले गये। कृषि महाविद्यालय रीवा के अधिष्ठाता डॉ. एस. के. पाण्डेय, डॉ. एम.ए. आलम (प्राध्यापक कीट शास्त्र विभाग), डॉ. एस. के. त्रिपाठी (प्राध्यापक पादप रोग विभाग), डॉ. मृगेन्द्र सिंह (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख), श्री पी. एन. त्रिपाठी (कार्यक्रम प्रभारी एवं मृदा वैज्ञानिक), श्रीमती अल्पना शर्मा (वैज्ञानिक गृह विज्ञान), इंजी. दीपक चौहान (वैज्ञानिक कृषि अभियांत्रिकी) एवं श्री पुष्पेन्द्र सिंह (तकनीकी एजेंट) आदि के साथ ग्राम चटहा, सिगुड़ी, बोडऱी, एवं मड़वा का भ्रमण किया गया है, एवं कृषक परिचर्चा का आयोजन ग्राम सिगुड़ी में किया गया। डॉ. एस. के. पाण्डेय ने जैव उर्वरक के प्रयोग एवं अजोला का प्रयोग दूधारू पशुओं के दुग्ध उत्पादन एवं गुणवत्ता के लिए करने पर जोर दिया। पौध रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. के. त्रिपाठी ने कृषकों को रबी मौसम में फसलों में लगने वाली बीमारियों के प्रबन्धन की जानकारी दी।
कीट विशेषज्ञ डॉ. एम.ए. आलम ने कीटों के प्रबन्धन की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केन्द्र शहडोल के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मृगेन्द्र सिंह ने कृषकों को फसलों के साथ-साथ अतिरिक्त आय के लिए मुर्गी पालन एवं पशु पालन अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के प्रभारी श्री पी. एन. त्रिपाठी ने बताया चने की उन्नत किस्म (जे.जी-16) मसूर (आई.पी.एल.-316), अलसी (जे. एल.एस.-27) के अलग- अलग 75 प्रदर्शन डाले गये, वर्तमान समय में चने की फसल फूल की अवस्था पर है, इस समय सिंचाई न देने की सलाह दी, साथ ही खेत में फेरोमेन ट्रेप 10/हेक्टर तथा प्रकाश प्रपंच लगाने की बात कही।
कृषि अभियांत्रिकी इंजी. दीपक चौहान के द्वारा चना व मसूर की लाईन से बोवाई में खरपतवार निकालने के लिए (हेन्ड हो) व (व्हील हो) के प्रयोग की जानकारी दी।

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