रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह
- रबी दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई कर धूप में सुखाकर गहाई करें एवं सुरक्षित स्थान पर रखें।
- गेंहू की फसल को कम्बाइन हार्वेस्टर से कटाई के बाद, फसल के ठूंठ या अवशेषों का ट्रैक्टर चालित भूसा बनाने वाली मशीन (स्ट्रा-रीपर) से भूसा बना सकते है। स्ट्रा-रीपर से भूसा बनाने के बाद खेत में ट्रैक्टर चालित रोटावेटर से जुताई करने से फसल अवशेष बारीक होकर मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे फसल अवशेष खेत में सड़कर खाद का काम करेगी।
- मूंग की बुआई के 20- 25 दिनों बाद एवं अगले 45 दिनों के बाद खरपतवार को अवश्य निकालना चाहिए।
- पतझड़ के समय इकट्ठा किए गए पत्तों तथा फसल के अवशेष से कम्पोस्ट खाद बनाना अत्यंत लाभप्रद होता है। इन पत्तों को आग में नहीं जलाना चाहिए।
- रबी फसलों की कटाई के बाद अप्रैल माह में खाली खेत की गहरी जुताई तीन साल में एक बार जरूर करनी चाहिए।
- खेतों की मिट्टी की उर्वरता की जांच हेतु विधिवत मिट्टी नमूने लेकर अपने खेतों की मिट्टी की जांच अवश्य करायें। जांच हेतु नमूने निकटतम मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में पहुंचायें।
उद्यानिकी
- कद्दूवर्गीय सब्जियों की हेतु खेत की तैयारी कर उन्नत बीज की बुआई करें। बुआई हेतु 150 सेमी की दूरी पर नालियां बनाएं उनमें 100 सेमी की दूरी पर थाले बनाएं व थाले में 10 किलो गोबर खाद, क्रमश: 10 ग्राम यूरिया, 25 ग्राम एसएसपी,10 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति थाला डालकर बुआई करें।
पशुपालन
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- दुग्ध उत्पादन बढ़ाने हेतु साफ पानी, हरे एवं शुष्क चारे के मिश्रण के साथ दाना खिलावें। पशुओं के लिए हरे चारे की मई-जून माह में उपलब्धता हेतु ज्वार या मक्का चरी की बुआई करें।
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